क्वारंटीन सेंटर की बदहाली दिखाने पर उत्तर प्रदेश में पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज

मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का है. एक न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार रविंद्र सक्सेना को सरकारी काम में बाधा डालने, आपदा प्रबंधन और हरिजन एक्ट आदि के तहत आरोपी बनाया गया है.

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(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का है. एक न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार रविंद्र सक्सेना को सरकारी काम में बाधा डालने, आपदा प्रबंधन और हरिजन एक्ट आदि के तहत आरोपी बनाया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)
(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी/सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार पर क्वारंटीन सेंटर की बदहाली दिखाने पर प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार को सरकारी काम में बाधा डालने, आपदा प्रबंधन और हरिजन एक्ट आदि के तहत आरोपी बनाया गया है.

इस पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने सीतापुर के डीएम को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

पूर्वी यूपी के सीतापुर जिले के महोली तहसील में क्वारंटीन सेंटर में रह रहे कुछ लोगों का आरोप था कि वहां पर कोई खास इंतजाम नहीं किया गया है. खाने के नाम पर उन्हें फफूंद लगे चावल दिए जा रहे हैं.

इसी ख़बर को वीडियो और एक पीड़ित की बाईट के साथ स्थानीय टुडे-24 पोर्टल के पत्रकार रविंद्र सक्सेना ने दिखाया. इसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया.

उत्तर प्रदेश के सीतापुर के पत्रकार रविंद्र सक्सेना पर दर्ज एफआईआर की प्रति. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)
उत्तर प्रदेश के सीतापुर के पत्रकार रविंद्र सक्सेना पर दर्ज एफआईआर की प्रति. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

रविंद्र सक्सेना ने कहा, ‘महोली क्वारंटीन सेंटर की बदहाली और सही खाना न मिलने से परेशान होकर मोहल्ला आजादनगर निवासी एक क्वारंटीन व्यक्ति बाबूराम तहसील में एसडीएम शशि भूषण राय से इसकी शिकायत करने पहुंचा था. हम भी खबरों के सिलसिले में वहां मौजूद थे. वहीं हमें यह व्यक्ति मिला जो साथ में फफूंद लगे चावल भी लिए हुए था. जब हमने उससे कैमरे पर बात की तो उसने हमें बताया कि क्वारंटीन सेंटर से ये फफूंद लगे चावल मिले हैं, जिनकी शिकायत एसडीएम से करने आया हूं, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है.’

रविंद्र आगे बताते हैं, ‘इसके बाद हमने इससे सम्बन्धित क्वारंटीन सेंटर का दौरा किया और वहां हो रही लापरवाहियों का वीडियो बनाकर अपने पोर्टल पर खबर चलाई. इसके बाद प्रशासन ने एक ट्रेनी एससी लेखपाल ऋषभ गौतम के द्वारा मेरे खिलाफ हरिजन एक्ट, आपदा प्रबंधन और लॉकडाउन का उल्लंघन जैसे मामलों में मुकदमा दर्ज करा दिया है. जबकि हमारे ऊपर तो धारा 188 लागू ही नहीं होती. ये तो मुख्यमंत्री के आदेश हैं क्योंकि हम तो आवश्यक कर्मचारी की श्रेणी में आते हैं.’

पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने पत्रकार पर हुई एफआईआर पर कहा, ‘अब एफआईआर तो हो चुकी है, तो उसे तो रद्द करा नहीं सकते लेकिन हमने गिरफ्तारी रुकवा दी है. आगे पुलिस अपनी जांच करेगी और रिपोर्ट देगी.’

सीएए: अखिल गोगोई के खिलाफ मामले में एनआईए ने असम के पत्रकार से पूछताछ की

पिछले साल हुए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार असम के सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को गुवाहाटी स्थित एक पत्रकार से पांच घंटे तक पूछताछ की.

एनडीटीवी के अनुसार, पत्रकार ने कहा कि उन्हें पूछताछ के लिए पेश होने के लिए समन नहीं भेजा गया था, बल्कि फोन पर बुलाया गया था.

एक वेबसाइट के लिए पत्रकारिता करने वाले मानश ज्योति बरुआ ने कहा कि उन्हें एक फोन कॉल करके कहा गया कि गुरुवार को वे गुवाहाटी के बाहरी इलाके सोनापुर में स्थित एनआईए के क्षेत्रीय मुख्यालय आएं. उन्होंने कहा कि उनसे पांच घंटे तक पूछताछ की गई.

बरुआ ने कहा, ‘मुझे एनआईए अधिकारी डीपी सिंह ने फोन किया. उन्होंने मुझे सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई के खिलाफ एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया. जब मैंने आधिकारिक समन के बारे में पूछा तब उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण वे समन भेज पाने में असमर्थ हैं लेकिन जब मैं उनके दफ्तर जाऊंगा तब वे मुझे नोटिस देंगे. हालांकि, उन्होंने नोटिस नहीं दिया.’

दिसंबर, 2019 और जनवरी, 2020 के दौरान बरुआ ने असम में सीएए विरोधी प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग की थी.

बरुआ ने कहा, ‘उन्होंने मुझसे करीब पांच घंटे तक पूछताछ की. 80 फीसदी सवाल अखिल गोगोई से संबंधित थे. उन्होंने मुझ पर अखिल गोगोई से करीबी संबंध होने के आरोप लगाए. उन्होंने मुझसे खासतौर पर पूछा कि गोगोई को फंडिंग कहां से मिलती है. मैंने उनसे कहा कि मैं एक पत्रकार हूं और गोगोई के साथ औपचारिक संबंध रखता हूं.’

गोगोई के कानूनी सलाहकार शांतनू बोर्थकुर ने कहा कि सामान्य तौर पर किसी गवाह को एक नोटिस जारी कर बुलाया जाता है.

उन्होंने कहा, ‘जब सीआरपीसी में कोई प्रक्रिया तय की गई है तब जांच एजेंसियों को उनका पालन करना चाहिए. हम नहीं समझ पा रहे हैं कि इस मामले में प्रक्रिया का पालन किए बिना पत्रकार को क्यों बुलाया गया.’

इस संबंध में गुवाहाटी के एनआईए अधिकारियों ने कोई जवाब देने से इनकार कर दिया.

बता दें कि, सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हिंसा में कथित भूमिका को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई को पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया गया था.

हालांकि, कथित माओवादी संबंध के मामले में 90 दिनों की निर्धारित अवधि के अंदर एनआईए द्वारा आरोपपत्र नहीं दाखिल कर पाने के कारण गुवाहाटी की एक विशेष एनआईए अदालत ने पिछले महीने उन्हें जमानत दे दी थी.

बाद में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगा दी और वे हिरासत में ही हैं. उनके खिलाफ राजद्रोह सहित कई अन्य मामले लंबित हैं.