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उत्तर प्रदेश: आर्थिक तंगी से परेशान गन्ना किसान ने की आत्महत्या, किसानों का प्रदर्शन

मामला मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के सिलौली का है, जहां एक पचास वर्षीय किसान का शव खेत में लटका मिला. उनके परिजनों ने बताया कि वह लॉकडाउन के कारण गन्ने की फसल न बेच पाने की वजह से अवसाद में थे.

Muzaffarnagar

मुजफ्फरनगर:  उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक पचास वर्षीय किसान का शव पेड़ से लटका मिला और अधिकारियों को संदेह है कि व्यक्ति ने आत्महत्या की है. किसान कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन की वजह से कथित तौर पर अपना गन्ना नहीं बेच पाया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुलिस ने बताया कि मृतक ओमपाल सिंह ने मुजफ्फरनगर के सिसौली इलाके में अपने खेत में एक पेड़ से फांसी लगा ली.

भूरा कलां थाना प्रभारी वीरेंद्र कसाना ने कहा, ‘शुरूआती जांच से पता चला है कि किसान को चार दिन पहले एक चीनी मिल से एक नोट मिला था. जिस दिन गन्ना बेचना था उस दिन वजन तौलने वाला मशीन काम नहीं कर रहा था. ऐसा प्रतीत होता है कि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी. देरी से दुखी होकर ओमपाल ने आत्महत्या कर ली.

किसानों ने पुलिस को बताया कि ओमपाल सिंह लॉकडाउन के दौरान वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे थे. उनका फसल पिछले 10 दिनों से तैयार थी और वे कई बार स्थानीय मिल का चक्कर लगाए थे.

किसान के परिवार ने पुलिस को बताया कि वह कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के कारण गन्ने की फसल नहीं बेच सके थे, जिसकी वजह से वह अवसाद में थे. हालांकि जिला प्रशासन ने इस दावे से इनकार किया कि उन्होंने गन्ने की बिक्री न होने की वजह से आत्महत्या की है.

जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने कहा कि प्राथमिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि किसान ने जमीन को लेकर हुए पारिवारिक विवाद की वजह से आत्महत्या की है. उन्होंने कहा कि मिलों में गन्ने की खरीद पर कोई रोक नहीं थी.

इसे लेकर किसानों और मृतक ओमपाल सिंह के परिवार के सदस्यों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर मांग की कि इस संबंध में चीनी मिल अधिकारियों के खिलाफ किसानों से गन्ना खरीदने में विफल रहने को लेकर मामला दर्ज किया जाए.

हालांकि प्रदर्शनकारियों ने जिला प्राधिकारियों द्वारा सिंह के परिवार के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा करने के बाद अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

सिंह के परिवार ने शुरू में शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था. बाद में सिंह का परिवार मान गया और पैतृक गांव सिसोली में उसका अंतिम संस्कार किया.

इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट करके भाजपा सरकार की आलोचना की. उन्होंने किसानों को गन्ने के बकाये का भुगतान नहीं होने पर सरकार की चुप्पी पर सवाल भी उठाया.

उन्होंने किसान की आत्महत्या को लेकर मीडिया की खबर को टैग करते हुए ट्वीट किया, ‘गन्ने की अपनी फसल को खेत में सूखता देख और पर्ची न मिलने के चलते मुजफ्फरनगर के एक गन्ना किसान ने आत्महत्या कर ली. सोचिए इस आर्थिक तंगी के दौर में भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी.’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘भाजपा का दावा था कि 14 दिन में पूरा भुगतान दिया जाएगा लेकिन हजारों करोड़ रुपये दबाकर चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं.’

प्रियंका ने कहा, ‘मैंने दो दिन पहले ही सरकार को इसके लिए आगाह किया था. सोचिए, इस आर्थिक तंगी के दौर में भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी. लेकिन भाजपा सरकार अब 14 दिन में गन्ना भुगतान का नाम तक नहीं लेती.’

इससे पहले मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान किसानों और मृतक के परिजनों से मिलने प्रदर्शन स्थल पर गए थे, जहां उनके साथ इस दौरान बुढ़ाना से भाजपा विधायक उमेश मलिक भी मौजूद थे.

इस बीच राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने परिवार के लिए अलग से एक एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की. वहीं, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रमुख नरेश टिकैत ने भी कहा कि लॉकडाउन के चलते अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने की वजह से किसान वित्तीय दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.

टिकैत ने किसानों के बिजली बिल और अन्य बकाए पूरी तरह से माफ किए जाने की मांग की. बीकेयू ने सिंह के परिवार के लिए 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता की भी घोषणा की.

बता दें कि जून 2019 में खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि देशभर के चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का लगभग 19,000 करोड़ रुपये का बकाया है. इसमें सबसे ज्यादा बकाया उत्तर प्रदेश की मिलों पर किसानों का बकाया 11,082 करोड़ रुपये था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)