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यूपी: हाथरस जा रहे पत्रकार को गिरफ़्तार करने के विरोध में आए पत्रकार संगठन, जल्द रिहाई की मांग

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार को हाथरस जा रहे केरल के एक पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत चार लोगों को गिरफ़्तार करते हुए उनके पीएफआई से जुड़े होने की बात कही थी. पत्रकार संगठनों ने कप्पन की अविलंब रिहाई की मांग करते हुए कहा है कि मीडिया को उसका काम करने से रोकने का प्रयास हो रहा है.

हाथरस पीड़िता के गांव में तैनात पुलिस बल. (फोटो: द वायर)

हाथरस पीड़िता के गांव में तैनात पुलिस बल. (फोटो: द वायर)

लखनऊ/तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस ने मथुरा में एक पत्रकार और तीन अन्य लोगों को तब गिरफ्तार किया, जब वे हाथरस में बर्बर मारपीट और कथित गैंगरेप का शिकार हुई दलित महिला के घर जा रहे थे.

पुलिस ने गिरफ्तार लोगों की पहचान मलप्पुरम के सिद्दीकी कप्पन, मुजफ्फरनगर के अतीक-उर रहमान, बहराइच के मसूद अहमद और रामपुर के आलम के रूप में की है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार को कहा था कि उसने मथुरा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उससे संबद्ध संगठनों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है.

गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद केरल के एक प्रमुख पत्रकार संगठन ने सिद्दीकी कप्पनको लेकर कहा कि वह दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

केरल के प्रमुख पत्रकार संगठन ने कप्पन को  जल्द से जल्द रिहा करने की मांग की है. ‘केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (केयूडब्ल्यूजे) की दिल्ली इकाई ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि कप्पन पत्रकार संगठन के सचिव हैं और एक रिपोर्टर के तौर पर अपना काम करने की कोशिश कर रहे थे.

आदित्यनाथ को भेजे इस पत्र पर केयूडब्ल्यूजे की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मिजी जोस ने हस्ताक्षर किए हैं.

पत्र में कहा गया कि वह हाथरस जिले में 19 वर्षीय दलित युवती से कथित बलात्कार और उसकी मौत के बाद की स्थिति पर समाचार देने के लिए वहां जा रहे थे.

केयूडब्ल्यूजे ने कहा, ‘कई मलयालम मीडिया घरानों के लिए काम करने वाले दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार सोमवार सुबह हाथरस गए थे ताकि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर समाचार दे सकें.’

केयूडब्ल्यूजे ने कहा, ‘हमें लगता है कि कप्पन को उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस टोल प्लाजा पर हिरासत में लिया. हमने और दिल्ली के कुछ वकीलों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया.’

उसने कहा कि हाथरस पुलिस थाने और राज्य पुलिस ने भी अभी तक कप्पन को हिरासत में लेने से जुड़ी कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई है.

केयूडब्ल्यूजे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि ‘कप्पन एक रिपोर्टर के तौर पर अपना काम करने की कोशिश कर रहे थे. हम आपसे उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने की अपील करते हैं.’

केयूडब्ल्यूजे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ऐसा ही पत्र लिखा है जिसमें उनसे कप्पन की रिहाई का आदेश देने का आग्रह किया गया है.

इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार लोगों से उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ साहित्य भी जब्त किए गए हैं जो शांति और कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे.

बता दें कि इससे पहले पीएफआई पर इस साल की शुरुआत में देश भर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की फंडिंग का आरोप लगा था और उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

इस बीच पीएफआई ने पुलिस के आरोपों का खंडन किया है. संगठन ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यूपी पुलिस ध्यान भटकाने के लिए ‘कॉन्सपिरेसी थ्योरी’ बना रही है.

बयान में कहा गया, ‘इस तरह के कदम देश और प्रदेश के लोगों में बढ़े गुस्से को लेकर उनकी घबराहट को दिखाते हैं. यूपी सरकार द्वारा दबाने की इन तरकीबों से पीएफआई डरने वाला नहीं है.’

द वायर  से बात करते हुए संगठन ने अतीक-उर रहमान और मसूद अहमद के कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई का छात्र संगठन) से जुड़े होने की पुष्टि है, हालांकि उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए चौथे व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

उधर दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने भी कप्पन  तत्काल रिहाई की मांग की है. इसके साथ ही प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी एक बयान जारी कर बिना किसी देर के कप्पन को रिहा करने को कहा है.

इस बयान में कहा गया, ‘यह हमारी आशंका है कि योगी आदित्यनाथ सरकार दुखद हाथरस घटना को षड्यंत्र बताते हुए पुलिस और प्रशासन के संदिग्ध और संभवतया आपराधिक कामों से ध्यान हटाने के लिए विषय बदलने की रणनीति अपनाएगी.’

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने यह भी कहा कि केरल के पत्रकार की गिरफ़्तारी को यूपी सरकार को मीडिया को उसका काम करने से रोकने के तौर पर देखा जाना चाहिए. मीडिया को रोकने का उदेद्श्य स्पष्ट रूप से तथ्यों को सार्वजनिक होने से रोकना है.

मालूम हो कि आरोप है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में 14 सितंबर को सवर्ण जाति के चार युवकों ने 19 साल की दलित युवती के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया था.

उनकी रीढ़ की हड्डी और गर्दन में गंभीर चोटें आई थीं. आरोप यह भी है कि आरोपियों ने उनकी जीभ भी काट दी थी.

अलीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के बाद उन्हें  दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 29 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया था.

इसके बाद परिजनों ने पुलिस पर उनकी सहमति के बिना आननफानन में युवती का अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया, जिससे पुलिस ने इनकार किया था.

युवती के भाई की शिकायत के आधार पर चार आरोपियों- संदीप (20), उसके चाचा रवि (35) और दोस्त लवकुश (23) तथा रामू (26) को गिरफ्तार किया गया है.

इस बीच मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अदालत की निगरानी में हाथरस मामले की सीबीआई जांच कराए जाने के आदेश देने को कहा.

इसके साथ ही एक हलफनामे में रात में अंतिम संस्कार करने के बारे ने कहा कि उन्हें खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि इस मामले को लेकर सुबह बड़े स्तर पर दंगा करने की तैयारी की जा रही थी. अगर सुबह तक इंतजार करते तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती थी.

राज्य सरकार ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई की जांच हो क्योंकि झूठे नैरेटिव के माध्यम से जांच को बाधित करने की कोशिश की जा सकती है.

राज्य सरकार ने राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों पर जातिगत विभाजन पैदा करने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)