सीमा विवाद: असम ने मिजोरम पुलिस पर अपने भू-भाग में बंकर जैसा ढांचा बनाने का आरोप लगाया

बीते 17 अक्टूबर को असम के कछार जिले के लैलापुर गांव और मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगटे गांव के लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चार लोग घायल हो गए थे. इसे लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा है और छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं.

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असम-मिजोरम सीमा पर तैनात सुरक्षा बल. (फोटो साभार: ट्विटर/@ZoramthangaC)

बीते 17 अक्टूबर को असम के कछार जिले के लैलापुर गांव और मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगटे गांव के लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चार लोग घायल हो गए थे. इसे लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा है और छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं.

असम-मिजोरम सीमा पर तैनात सुरक्षा बल. (फोटो साभार: ट्विटर/@ZoramthangaC)
असम-मिजोरम सीमा पर तैनात सुरक्षा बल. (फोटो साभार: ट्विटर/@ZoramthangaC)

गुवाहाटी: असम-मिजोरम सीमा विवाद के बीच असम सरकार ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी राज्य मिजोरम की पुलिस अपने भू-भाग में बंकर जैसा ढांचा बना रही है, जिसे लेकर लोग परेशान और नाखुश हैं.

कछार जिला उपायुक्त कीर्ति जल्ली ने मिजोरम के कोलाशीब जिला के अधिकारियों को लिखे एक पत्र में कहा है कि कुलीचेरा इलाके में आक्रामक गतिविधि स्थानीय शांति एवं सामान्य स्थिति में विघ्न डालेगी.

उन्होंने पत्र में कहा है, ‘यह भी पाया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 306 पर निर्माण कार्य जैसी गतिविधियां की गई हैं, जेसीबी मशीनों के इस्तेमाल से बंकर जैसे ढांचे बनाए जा रहे हैं.’

नार्थ ईस्ट नाउ के मुताबिक मिजोरम के दो प्रभावशाली छात्र संगठन – मिज़ो ज़िरलाई पावल (एमजेडपी) और मिज़ो स्टूडेंट्स यूनियन (एमएसयू) ने असम के करीमगंज डिप्टी कमिश्नर और मामित डिप्टी कमिश्नर के बीच शनिवार को हुए बैठक का विरोध किया और नारे लगाए.

छात्र संगठनों ने मामित डीसी और करीमगंज डीसी के बीच बैठक के मिनटों की प्रतियां भी जलाईं. जहां एमजेडपी ने वनापा हॉल के पास मिनट्स को जलाया तो वहीं एमएसयू ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के सामने प्रतियां जलाकर विरोध जताया.

एमएसयू ने मांग की कि मामित डिप्टी कमिश्नर डॉ. लालरोज़मा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) शशांक जायसवाल को सीमावर्ती जिले से स्थानांतरित किया जाए.

हालांकि, लालरोज़मा ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार के निर्देश पर काम किया और उन्हें आधिकारिक रूप से सीमा मुद्दे पर बैठक में शामिल न होने के लिए सूचित नहीं किया गया था.

एमजेडपी के अध्यक्ष वनलाल्टाना ने कहा, ‘हमने बैठक के मिनट्स की कॉपी जला दी क्योंकि एमजेडपी की राय है कि शनिवार को जिला प्रशासन स्तर की बैठक मिजोरम के लोगों का अपमान था और बैठक के फैसले से मिज़ोस की एकता और सुरक्षा में बाधा उत्पन्न हो सकती है.’

उन्होंने कहा कि एमजेडपी राष्ट्रीय राजमार्ग-306 पर नाकाबंदी हटाए जाने तक दोनों सरकारों के बीच किसी भी वार्ता का विरोध जारी रखेगा जब तक कि अंतर-राज्य सीमा विवाद हल नहीं हो जाता.

इस बीच लालरोज़मा ने कहा कि वह बैठक का विरोध करने वाले गैर-सरकारी संगठनों से अनजान थे और वह सीमा विवाद का समाधान के लिए राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार काम कर रहे थे.

उन्होंने कहा ‘मैंने बैठक के दौरान अपने करीमगंज के समकक्ष से कहा कि मिजोरम के पास सीमा क्षेत्र से अपनी सेना को वापस लेने का कोई कारण नहीं है क्योंकि मिजोरम क्षेत्र के भीतर पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाता है ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके.’

उल्लेखनीय है कि बीते 17 अक्टूबर को असम के कछार जिले के लैलापुर गांव और मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगटे गांव के निवासियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. जिसमें चार लोग घायल हो गए थे और भीड़ ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 20 अस्थायी झोपड़ियों और दुकानों को आग लगा दी थी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अक्टूबर महीने में दोनों राज्यों के निवासियों के बीच यह दूसरा ऐसा विवाद था. नौ अक्टूबर को असम के करीमगंज और मिजोरम के मामित जिलों में भी ऐसी झड़प हुई थी.

मिजोरम के कोलासिब जिले का वैरेंगते गांव राज्य का उत्तरी हिस्सा है, जिससे गुजरता राष्ट्रीय राजमार्ग-306 असम को इस राज्य से जोड़ता है. वहीं, असम के कछार जिले का लैलापुर इसका सबसे करीबी गांव है. असम और मिजोरम 164.6 किलोमीटर सीमाक्षेत्र साझा करते हैं.

इसके बाद दोनों राज्यों और केंद्र के अधिकारियों बीच कई दौर की वार्ता हुई थी. हिंसा के बाद बीते 19 अक्टूबर को विश्वास बहाली के क्रम में दोनों राज्यों के अधिकारियों ने कछार जिले में आपस में बातचीत की थी.

असम सरकार ने एक बयान में बताया था कि दोनों पक्षों ने अंतरराज्यीय सीमा पर शांति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है. केंद्र ने भी दोनों राज्यों की सरकारों से मिलकर सीमा विवाद को सुलझाने और शांति बहाल करने को कहा था. हालांकि इसके बावजूद दोनों राज्यों के बीच सीमा पर गतिरोध बना हुआ है.

उसके बाद केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर को हुई मिजोरम और असम के मुख्य सचिवों की एक ऑनलाइन बैठक हुई थी, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों सुरक्षा बलों की तैनाती पर चर्चा हुई थी.

भल्ला ने दोनों मुख्य सचिवों से आग्रह किया था कि वे अपने-अपने सीमावर्ती क्षेत्रों से सुरक्षा बल हटा लें ताकि आसपास के इलाके में शांति बहाल हो सके.

बता दें कि असम और मिजोरम में सीमा पर जारी गतिरोध के बीच मिजोरम के गृहमंत्री लालचामलियाना ने कहा था कि उनकी सरकार हालात सामान्य होने तक असम से लगी सीमा से अपने सुरक्षा बलों को नहीं हटाएगी.

असम के कछार जिला प्रशासन के मिजोरम सरकार से सीमावर्ती इलाकों से अपने सुरक्षा बलों को हटाने के लिए कहा था.

उसने एक बयान में कहा था कि असम के सीमावर्ती इलाके के लोग आवश्यक वस्तुओं को ले जा रहे ट्रकों को मिजोरम में प्रवेश करने नहीं दे रहे हैं. वे चाहते हैं कि मिजोरम सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को हटा ले. हालांकि मिजोरम ने इस बात से इनकार कर दिया है और असम सरकार पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया.

मिजोरम के गृहमंत्री लालचामलियाना ने संवाददाताओं से कहा था कि मिजोरम सरकार ने 1875 में बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (बीईएफआर), 1873 के तहत अधिसूचित सीमांकन को मिजोरम और असम की वास्तविक सीमा के रूप में स्वीकार किया है.

उन्होंने कहा कि यह राज्य की एक ऐतिहासिक सीमा थी, जिसे मिजोरम के पूर्वजों के समय से स्वीकार किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)