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असम: बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनाव के पहले चरण में 77 प्रतिशत मतदान

असम में 40 सदस्यीय बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनावों के लिए दूसरे चरण का मतदान 10 दिसंबर को होगा. यह चुनाव केंद्र, राज्य और बोडो समूहों के बीच इस साल जनवरी में लंबे समय से चले आ रहे बोडो मुद्दे को लेकर हुए समझौतों के बाद हुआ है. असम में कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान की गई है.

People stand in a queue to vote during the Bodoland Territorial Regions election, at a polling station in Baksa district of Assam on December 7, 2020 PTI Photos

बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनाव में मतदान के लिए असम के बक्सा जिले में लाइन में लगे मतदाता. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम में 40 सदस्यीय बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) चुनावों के लिए पहले चरण का मतदान सोमवार को संपन्न हुआ, जिसमें 77 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

सोमवार शाम 4:30 बजे मतदान समाप्त होने तक कुल 1,364,018 मतदाताओं में से तकरीबन 77 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. उदलगुड़ी और बक्सा जिलों के 21 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 130 उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटी में कैद हो गई.

मतदान केंद्रों पर कुछ लोग कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए दिखे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह चुनाव महत्वपूर्ण बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हुआ है- जिसे केंद्र, राज्य और बोडो समूहों के बीच इस साल जनवरी में लंबे समय से चले आ रहे बोडो मुद्दे के अंतिम और व्यापक समाधान के रूप में वर्णित किया गया है. इस चुनाव के परिणाम अगले साल असम में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है.

यह पिछले 27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता है. पहला समझौता 1993 में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन के साथ हुआ था जिसका परिणाम सीमित राजनीतिक शक्तियों के साथ बोडोलैंड स्वायत्त परिषद के रूप में निकला.

दूसरा समझौता 2003 में उग्रवादी समूह ‘बोडो लिबरेशन टाइगर्स’ के साथ हुआ था जिसका परिणाम असम के चार जिलों-कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुड़ी को मिलाकर बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के गठन के रूप में निकला. इन चारों जिलों को बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला (बीटीएडी) कहा जाता है.

बोडो क्षेत्रीय परिषद संविधान की छठी अनुसूची के तहत एक स्वायत्त स्वशासी निकाय है, एक विशेष प्रावधान जो पूर्वोत्तर के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक स्वायत्तता और विकेंद्रीकृत शासन की अनुमति देता है.

इसके अधिकार क्षेत्र में पश्चिमी असम (उदलगुड़ी, बक्सा, चिरांग और कोकराझार) के चार बोडो बसे हुए जिले हैं, जिन्हें बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के नाम से जाना जाता है.

दूसरे चरण के तहत बाकी बचे 19 निर्वाचन क्षेत्रों में 10 दिसंबर को मतदान होगा. दूसरे चरण में 1,023,404 मतदाता कोकराझार और चिरांग जिलों के 1,407 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके 111 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.

दोनों चरणों की मतगणना 12 दिसंबर को होगी, जो सुबह आठ बजे से शुरू होगी और प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगी.

बीटीसी का चुनाव चार अप्रैल को होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी फैलने के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, 2005 से बीटीसी को राज्य और केंद्र में भाजपा के सहयोगी हाग्रामा मोहिलरी के नेतृत्व वाले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) द्वारा नियंत्रित किया गया है.

इसके बावजूद दोनों इस चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. बीपीएफ को यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.

यूपीपीएल को 2020 के समझौते में शामिल एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षरकर्ता और प्रभावशाली ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद बोरो का समर्थन हासिल है. कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) संयुक्त रूप से चुनाव लड़ रहे हैं.

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों में छठी अनुसूची के तहत जनजातीय समुदायों को स्वायत्तता दी गई है. असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिज़ोरम छठी अनुसूची के तहत ही स्वायत्त क्षेत्र हैं.

वर्तमान में संविधान की छठी अनुसूची में 4 राज्यों के 10 स्वायत्त जिला परिषद शामिल हैं. जिनमें से असम में तीन हैं- बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद और दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)