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सत्ता मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में सीएए से जुड़े मामलों में असम सरकार बनेगी पक्षकार: गोगोई

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) को वोटों के लिए समाज को विभाजित करने वाला भाजपा का राजनीतिक हथियार बताया है. गोगोई ने कहा कि विधानसभा चुनाव में असम की पहचान और विकास दोनों दांव पर हैं. असम में पार्टी के सत्ता में आने पर सीएए को लागू करने नहीं दिया जाएगा.

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को ‘वोटों के लिए समाज को विभाजित करने का भाजपा का राजनीतिक हथियार’ करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि असम में उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर सीएए को प्रदेश में लागू करने नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय में इससे जुड़े मामले में पक्षकार बनाया जाएगा.

लोकसभा में पार्टी के उप नेता गोगोई ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि इस विधानसभा चुनाव में असम की पहचान और विकास दोनों दांव पर हैं तथा प्रदेश में कांग्रेस की अगुवाई वाले ‘महाजोत’ (महागठबंधन) के पक्ष में आशा की बयार बह रही है.

उन्होंने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस पर हमले करने के लिए भाजपा पर निशाना साधा और कहा बदरूद्दीन अजमल की पार्टी के साथ गठबंधन धर्म नहीं, बल्कि इस बात पर आधारित है कि कोई सीएए के पक्ष में है या फिर विरोध में है.

यह पूछे जाने पर कि असम में ‘महाजोत’ की जीत की स्थिति में वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे तो गोगोई ने कहा कि वह कभी किसी पद के पीछे नहीं भागे और पार्टी के हिसाब से जो भूमिका फिट बैठती है उसके मुताबिक वह कांग्रेस की सेवा करने की आशा रखते हैं.

उल्लेखनीय है कि गोगोई के पिता तरुण गोगोई मई, 2001 से 2016 तक लगातार तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे. उनका पिछले साल नवंबर में कोरोना संबंधी जटिलताओं के बाद निधन हो गया था.

गौरव गोगोई ने कहा कि उनके पिता के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है उसे कोई नहीं भर सकता.

उन्होंने कहा, ‘उनके (तरुण गोगोई) विवेक और अनुभव की हम बहुत कमी महसूस करते हैं. वह पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में प्रस्ताव दिया कि असम विधानसभा चुनाव में एआईयूडीएफ और समान विचारधारा वाले दूसरे दलों के साथ गठबंधन करना चाहिए. ‘महाजोत’ की अवधारणा को पहले उन्होंने आगे बढ़ाया था.’

अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख के बारे में पूछे जाने पर गोगोई ने कहा कि इस मुद्दे पर असम समझौते के तहत कांग्रेस की स्पष्ट रूप से परिभाषित नीति है.

उन्होंने कहा, ‘हम इस संदर्भ में असम समझौते के महत्व और मूल्य को वापस लाएंगे कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं है.’

सीएए जुड़े सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा कि असम में उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर सीएए को प्रदेश में लागू करने नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय में इससे जुड़े मामले में पक्षकार बनाया जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गोगोई ने कहा कि असम के पास सीएए पर अपना अनूठा दृष्टिकोण है. उन्होंने असम के इतिहास को अलग-अलग समुदायों के बीच शांति और सौहार्द के मुद्दे के प्रति संवेदनशील बताया है.

गोगोई ने कहा, ‘सीएए ने असम के नाजुक संतुलन को बिगाड़ने के अलावा कुछ भी नहीं किया है और वास्तविक मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नहीं दिया है. यह कुछ भी नहीं है (भाजपा का) राजनीतिक हथियार है.’

उन्होंने कहा कि एनआरसी से बाहर रह गए कई भारतीय नागरिकों के मामले में ‘फॉरेन ट्रिब्यूनल’ में चल रहे हैं और कांग्रेस की सरकार बनने पर पूरी प्रक्रिया को तेज किया जाएगा तथा उन सभी लोगों को एनआरसी में शामिल किया जाएगा जो असल में भारतीय नागरिक हैं.

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के नागरिकों, जो 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हैं, भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.

आगामी चुनावों में असम की पहचान और विकास दोनों दांव पर हैं कहते हुए गोगोई ने कहा कि कोविड-19 से पहले सीएए असम में एक बहुत बड़ा मुद्दा था और वोट देने जा रहे लोग अब हमारी भाषा, संस्कृति के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘इस समय राज्य में सामाजिक-आर्थिक मुद्दे हैं जो बेरोजगार युवाओं के बीच सबसे ज्वलंत मुद्दे हैं. असम में अधिकांश लोग युवा वर्ग के हैं और चूंकि पश्चिम भारत की तुलना में पूर्वोत्तर औद्योगिक निजी क्षेत्र के निवेश की कमी है. इसलिए यहां  बेरोजगारी की समस्या बहुत ज्यादा है.’

उन्होंने कहा, ‘लोग वास्तव में उन पांच गारंटी की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो कांग्रेस की पेशकश है- सीएए को अमान्य करना, पांच लाख सरकारी नौकरियां प्रदान करना, चाय बागान श्रमिकों के दैनिक वेतन को बढ़ाकर 365 रुपये करना, प्रति घर 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और  ‘गृहिणी सम्मान’ के रूप में गृहिणियों को हर महीने 2,000 रुपये  सहायता देना.’

मालूम हो कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव एआईयूडीएफ, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ), सीपीआई (एम), सीपीआई, सीपीआई-एमएल और आंचलिक जन मोर्चा के साथ मिलकर ‘महाजोत’ (महागठबंधन) बनाकर लड़ रही है.

असम विधानसभा के 126 सदस्यीय सीटों के लिए 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन चरणों में मतदान होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)