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‘नोटा’ को अधिक वोट पर चुनाव नतीजे अमान्य करने की मांग, केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र एवं निर्वाचन आयोग से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आयोग को किसी निर्वाचन क्षेत्र में ‘नोटा’ के लिए सर्वाधिक मत पड़ने पर वहां का चुनाव परिणाम अमान्य करार देकर फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है.

साल 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव के दौरान नोटा पर वोट की अपील करता एक समूह. (फोटो: पीटीआई)

साल 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव के दौरान नोटा पर वोट की अपील करता एक समूह. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र एवं निर्वाचन आयोग से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आयोग को किसी निर्वाचन क्षेत्र में ‘नोटा’ के लिए सर्वाधिक मत पड़ने पर, वहां का चुनाव परिणाम अमान्य करार देने और फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है.

सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन ने विधि एवं न्याय मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करके उनसे याचिका पर जवाब देने को कहा है.

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं. यह याचिका वकील एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी.

याचिका में आयेाग को यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि उन उम्मीदवारों एवं राजनीतिक दलों को ताजा चुनाव में भाग लेने से रोका जाए, जिनके चुनाव को निरस्त किया गया है.

याचिका में कहा गया है, ‘किसी उम्मीदवार को खारिज करने और नए उम्मीदवार को चुनने का अधिकार लोगों को अपना असंतोष जाहिर करने की ताकत देगा. यदि मतदाता चुनाव में खड़े हुए उम्मीदवार की पृष्ठभूमि एवं प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं, जो वे इस प्रकार के उम्मीदवार को खारिज करने के लिए नोटा का बटन दबाएंगे और नए उम्मीदवार को चुनेंगे.’

स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई ने कहा, ‘अगर कुछ राजनीतिक दल लोगों के प्रभाव के साथ उम्मीदवारों को खारिज करवाने में सफल रहती हैं तो सीटें संसद में अधूरी रह जाएंगी.’

उन्होंने कहा, ‘यह एक संवैधानिक समस्या है. यदि आपका तर्क स्वीकार कर लिया जाता है और सभी उम्मीदवार खारिज हो जाते हैं और वह निर्वाचन क्षेत्र पूरी तरह से बिना प्रतिनिधित्व के रह जाता है. आप एक वैध संसद का गठन कैसे करेंगे?’

इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि यदि मतदाताओं को अस्वीकार करने का अधिकार रहेगा तो राजनीतिक दल स्वीकार्य उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे.

इस पर सीजेआई ने कहा, ‘भले ही आप जो कह रहे हैं हम उसके महत्व को समझते हैं फिर भी रेखांकित सुझाव को स्वीकार किया जाना बहुत कठिन है. हम नोटिस जारी करेंगे.’

याचिकाकर्ता ने कहा कि राजनीतिक दल मतदाताओं से परामर्श किए बिना बहुत ही अलोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करते हैं. इस वजह से निर्वाचन क्षेत्रों में लोग उनके सामने प्रस्तुत उम्मीदवारों के साथ पूरी तरह से असंतुष्ट होते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)