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अशोका यूनिवर्सिटी के कामकाज, फैकल्टी की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करेंगे: ट्रस्टी

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हाल ही में संस्थान से इस्तीफ़ा देने वाले प्रतिष्ठित राजनीतिक विश्लेषक और टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के समर्थन में दो दिन के लिए कक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान किया था. जिसके बाद बोर्ड ऑफ ट्रस्टी का बयान आया है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

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नई दिल्ली: अशोका विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने बीते मंगलवार को छात्रों को लिखे अपने पत्र में ये आश्वासन दिया है कि वे संस्थान के अकादमिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और फैकल्टी के लिखने और बोलने की आजादी की सुरक्षा की जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्टी आशीष धवन, विनीत गुप्ता, संजीव भिकचंदानी और प्रमथ राज सिन्हा द्वारा हस्ताक्षित बयान छात्रों के हड़ताल के दूसरे दिन आया है.

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हाल ही में संस्थान से इस्तीफा देने वाले प्रतिष्ठित राजनीतिक विश्लेषक और टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के समर्थन में दो दिन के लिए क्लास के बहिष्कार का ऐलान किया था.

यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ ने कहा कि दो प्रोफेसरों का इस तरह विवादित रूप में जाना प्रशासन पर सवाल खड़े करता है कि क्या वे ‘बाहरी दबावों’ से छात्रों की रक्षा कर पाएंगे.

मेहता ने अपने इस्तीफे में कहा था कि संस्थापकों ने ये बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि संस्थान के साथ उनका जुड़ाव एक ‘राजनीतिक जवाबदेही’ बन गई है. इसके दो दिन बाद ही अरविंद सुब्रमण्यम ने भी इस्तीफा दे दिया और कहा कि मेहता का इस तरह जाना अकादमिक स्वतंत्रता को लेकर गहरी चिंता पैदा करता है.

इसके बाद छात्रों और फैकल्टी के बीच उपजे असंतोष को शांत करने के लिए बोर्ड ने कहा कि अब से हर साल दो बार छात्रसंघ और संचालक मंडल के बीच बैठक होगी. उन्होंने कहा कि संस्थान अभिव्यक्ति की आजादी सुनिश्चित करने की अपनी नीति पर प्रतिबद्ध है.

इसके साथ ही संस्थापकों के साथ एक वार्षिक टाउनहॉल कराने की भी घोषणा की गई है, जहां छात्र सीधे उनसे बातचीत कर सकेंगे. छात्रों द्वारा सुझाव और चिंताओं को साझा करने के लिए एक ई-मेल भी बनाने की बात की गई है.

बयान में कहा गया, ‘हमारा मकसद है कि इसके और पूर्ववर्ति व्यवस्था के जरिये अशोका अपने उस दृष्टिकोण पर खरा उतरे जहां सवाल करने, अभिव्यक्ति की आजादी, बौद्धिक ईमानदारी, सभी मनुष्यों की गरिमा के लिए सम्मान और रचनात्मक परिवर्तन के लिए खुलापन की बात कही गई थी. जाहिर है कि ये सब एक रात में नहीं हो सकता है. अशोका हमेशा इस दिशा में काम करता रहेगा.’

मालूम हो कि प्रताप भानु मेहता पिछले कुछ सालों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं.

यह कहते हुए कि उनका इस्तीफा यूनिवर्सिटी के हित में होगा, मेहता ने लिखा था, ‘स्वतंत्रता के संवैधानिक मूल्यों और सभी नागरिकों के लिए समान सम्मान देने का प्रयास करने वाली राजनीति के समर्थन में मेरा सार्वजनिक लेखन विश्वविद्यालय के लिए जोखिम भरा माना जाता है.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘यह साफ है कि मेरे लिए यह अशोका छोड़ने का समय है. एक उदार विश्वविद्यालय को फलने-फूलने के लिए उदारवादी राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों की जरूरत होती है. मुझे उम्मीद है कि ऐसे माहौल को बचाने में यूनिवर्सिटी अपनी भूमिका निभाएगी. आज के माहौल के मद्देनजर संस्थापकों और प्रशासन को अशोका के मूल्यों के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता और अशोका की आजादी सुरक्षित रखने के लिए नए साहस की जरूरत होगी.’