कोविड-19

कोविड-19: कहानीकार मंज़ूर एहतेशाम और फिल्म संपादक वामन भोंसले का निधन

बीते रविवार को बनारस घराने के प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित राजन मिश्र का दिल्ली के एक अस्पताल में कोविड-19 समस्याओं के चलते निधन हो गया. उनके लिए वेंटिलेटर उपलब्ध कराने के लिए काफ़ी प्रयास किए गए थे, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी.

मंज़ूर एहतेशाम और वामन भोंसले. (फोटो साभार: फेसबुक/फिल्म हिस्ट्री पिक)

मंज़ूर एहतेशाम और वामन भोंसले. (फोटो साभार: फेसबुक/फिल्म हिस्ट्री पिक)

भोपाल/मुंबई: कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से कला और साहित्य क्षेत्र की तीन मशहूर हस्तियों का रविवार और सोमवार को निधन हो गया. इनमें से पद्मश्री से सम्मानित कहानीकार मंज़ूर एहतेशाम थे, जबकि दूसरे व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म संपादक वामन भोसले थे. रविवार को ही बनारस घराने के प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित राजन मिश्र का दिल्ली के एक अस्पताल में कोविड-19 समस्याओं के चलते निधन हो गया था.

अपनी पहली कहानी ‘रमज़ान में मौत’ से शोहरत हासिल कर लेने वाले कहानीकार पद्मश्री मंज़ूर एहतेशाम का मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक निजी अस्पताल में कोरोना से निधन हो गया. वह 73 वर्ष के थे.

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार-सोमवार की रात करीब 12 बजे के आसपास उन्होंने भोपाल के पारूल अस्पताल में अंतिम सांस ली.

अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि वह एक सप्ताह पहले कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे, जिससे उनकी मृत्यु हो गई.

यह अजीब संयोग है कि ढेरों कहानियां रचने वाले मंज़ूर एहतेशाम की पहली कहानी का नाम ‘रमजान में मौत’ था और वह इसी पाक महीने में इस दुनिया से विदा हो गए.

मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘अपनी पहली कहानी ‘रमज़ान की मौत’ लिखने वाले पद्मश्री कथाकार मंज़ूर एहतेशाम के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिजनों एवं प्रशसकों को इस दुख को सहने का संबल प्रदान करे.’

उनके परिवार में सिर्फ दो बेटियां और दामाद हैं. उनका जन्म तीन अप्रैल 1948 को भोपाल में हुआ था.

उन्होंने पांच उपन्यास समेत कई कहानियां और नाटक लिखे थे. उन्हें साल 2003 में चौथे सर्वाच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था. इसके अलावा उन्हें भारतीय भाषा परिषद का पुरस्कार, श्रीकांत वर्मा स्मृति सम्मानए वागेश्वरी अवॉर्ड, मैथिली शरण गुप्त सम्मान और पहल सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में ही उनकी पत्नी सरवर एहतेशाम का निधन हुआ था और एक माह पूर्व उनके बड़े भाई का भी कोरोना से निधन हुआ है.

उनका पहला उपन्यास ‘कुछ दिन और’ 1976 में प्रकाशित हुआ था. इसके बाद 1986 में सूखा बरगद, 1995 में दास्तान-ए-लापता, 2004 में बशारत मंज़िल और साल 2007 में पहर ढलते उपन्यास आए थे. इनके अलावा उन्होंने ‘तसबीह’, ‘तमाशा’ सहित अनेक कहानियां लिखीं. उनकी लेखनी समाज की विद्रूपताओं, कड़वी सच्चाई और अन्याय को बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती थी.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म संपादक वामन भोसले का निधन

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म संपादक वामन भोसले का उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण सोमवार सुबह निधन हो गया. उनके परिवार के सदस्यों ने इस बारे में बताया.

भोसले 87 साल के थे.

वामन भोसले के भतीजे दिनेश भोसले ने बताया कि 25वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘इनकार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार पाने वाले वामन का गोरेगांव आवास पर तड़के चार बजकर 25 मिनट पर निधन हो गया.

दिनेश ने बताया, ‘पिछले साल लॉकडाउन के कारण उनकी दिनचर्या और दूसरी गतिविधियां प्रभावित हुई थीं.’

गोवा के पोमबुरपा गांव में जन्मे भोसले नौकरी की तलाश में 1952 में मुंबई आए थे और ‘पाकीजा’ फिल्म के संपादक डीएन पई से बॉम्बे टॉकीज में प्रशिक्षण लेने लगे.

भोसले ने ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘दो रास्ते’, ‘इनकार’, ‘दोस्ताना’, ‘अग्निपथ’, ‘परिचय’, ‘कालीचरण’, ‘कर्ज’, ‘राम लखन’, ‘सौदागर’, ‘गुलाम’ समेत 230 से ज्यादा फिल्मों का संपादन किया.

अमोल पालेकर निर्देशित ‘कैरी’ संपादक के तौर पर भोसले की आखिरी फिल्म थी.

फिल्मकार मधुर भंडारकर, अभिनेता-फिल्मकार विवेक वसवानी, प्रख्यात लेखक गीतकार वरूण ग्रोवर ने भोसले के निधन पर शोक जताया है.

पंडित राजन मिश्र का कोविड-19 के चलते निधन, वेंटिलेटर के लिए किए गए प्रयास विफल रहे

नई दिल्ली: इन दोनों हस्तियों से एक दिन पहले रविवार शाम को प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित राजन मिश्र का दिल्ली के एक अस्पताल में कोविड-19 समस्याओं के चलते निधन हो गया. वह 70 वर्ष के थे.

पंडित राजन मिश्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

पंडित राजन मिश्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

इससे पहले मिश्र के लिए उनके मित्रों एवं शुभचिंतकों ने सोशल मीडिया पर जीवन रक्षा संदेश (एसओएस) जारी कर वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की गुहार लगाई. हालांकि, इससे कोई लाभ नहीं हुआ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया है.

मिश्र के बेटे रजनीश ने कहा कि वह पिछले तीन दिन से सेंट स्टीफन अस्पताल में भर्ती थे.

रजनीश ने कहा, ‘मिश्र का (रविवार) शाम करीब 6:30 बजे दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. हम वेंटिलेटर के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन किसी ने हमारी सहायता नहीं की. बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मदद का हाथ बढ़ाया, लेकिन तब तक राजन मिश्र का निधन हो चुका था.’

मिश्र के परिवार में उनकी पत्नी, बेटी अंजू, और बेटे रितेश और रजनीश हैं.

हालांकि, इस संबंध में समाचार एजेंसी पीटीआई के सवालों को लेकर अस्पताल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

मिश्र के भतीजे अमित ने बताया कि शास्त्रीय गायक को (रविवार) दोपहर पहली बार और शाम के समय दूसरी बार दिल का दौरा पड़ा. वह खयाल गायकी में अपने भाई साजन मिश्र के साथ अग्रणी गायकों में शामिल थे.

अमित ने कहा, ‘पंडित राजन मिश्र जी को 15-20 दिन पहले टीके की पहली खुराक दी गई थी. उन्हें दोपहर में पहली बार और फिर शाम करीब साढ़े पांच बजे दूसरी बार दिल का दौर पड़ा.’

मिश्र पद्म भूषण से सम्मानित थे. दोनों भाई बनारस घराने से संबंध रखते हैं.

मिश्र के साथी संगीतकार और करीबी मित्र विश्व मोहन भट्ट ने पहली बार जानकारी दी थी कि मिश्र परिवार शहर में वेंटिलेटर के लिये संघर्ष कर रहा है.

भट्ट ने रविवार दिन में ट्वीट किया था, ‘पद्म भूषण पंडित राजन मिश्र (शास्त्रीय गायक) को जल्द से जल्द वेंटिलेटर की जरूरत है. फिलहाल वह दिल्ली के तीस हजारी में स्थित सेंट स्टीफन अस्पताल में भर्ती हैं. कृपया तत्काल उनकी मदद करें.’

हालांकि मिश्र की तबीयत बिगड़ती गई और उन्हें किसी और अस्पताल में नहीं ले जाया जा सका.

भट्ट ने मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया.

उन्होंने कहा, ‘हैरान करने वाली अविश्वसनीय खबर. पंडित राजन मिश्र का कोरोना और दिल का दौरा पड़ने से निधन. भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति. सच्चा मित्र खो दिया. उनकी आत्मा को शांति मिले.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)