राजनीति

यूपी पंचायत चुनाव: गोरखपुर में हारे प्रत्याशी को ​जीता हुआ बताने पर बवाल, पीएसी बस फूंकी गई

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में चौरीचौरा के ब्रह्मपुर ब्लाक में हुए बवाल के दौरान पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई थी. पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत अन्य धाराओं में 500 से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. रिटर्निंग ऑफिसर के ख़िलाफ़ चुनाव परिणामों में गड़बड़ी के आरोप में मामला दर्ज कराया गया है.

चुनाव परिणामों से नाराज लोगों ने पीएसी की बस फूंक दी (सभी फोटो सौजन्य: मनोज सिंह)

चुनाव परिणामों से नाराज लोगों ने पीएसी की बस फूंक दी (सभी फोटो सौजन्य: मनोज सिंह)

गोरखपुर: जिला पंचायत सदस्य चुनाव के दो वार्डों में हारे हुए प्रत्याशियों को जीता बताते हुए प्रमाण पत्र जारी करने पर बुधवार शाम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरीचौरा के ब्रह्मपुर ब्लाक में जमकर बवाल हुआ. वार्ड संख्या 60 और 61 में जीते हुए प्रत्याशियों को हराने का आरोप लगाते हुए शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन हिंसक हो गया.

गुस्साए लोगों ने ब्लाक की नई बाजार पुलिस चौकी में आग लगा दी और तोड़फोड़ किया. पीएसी की एक बस भी जला दी गई और पीएसी जवानों पर पथराव किया गया. ब्लाक कार्यालय को भी फूंकने की कोशिश हुई.

बवाल के बाद गोरखपुर जिला प्रशासन ने पांच वार्डों के मतों का फिर से मिलान किया और तीन वार्डों के चुनाव परिणाम बदल दिया, हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार सुबह तक पूर्व घोषित परिणाम ही दर्ज है.

बवाल की शुरुआत तब हुई जब जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा वार्ड संख्या 60 से गोपाल यादव और 61 से रमेश को निर्वाचित घोषित करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र दिया गया.

इस पर वार्ड 60 से प्रत्याशी रवि प्रताप निषाद और वार्ड 61 से प्रत्याशी कोदई साहनी का कहना था कि मतगणना के बाद उन्हें जीता हुआ बताया गया, लेकिन प्रमाण पत्र हारे हुए प्रत्याशी को दे दिया गया. दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाया और ब्रह्मपुर ब्लाक मुख्यालय के पास प्रदर्शन करने लगे.

प्रदर्शन अपराह्न चार बजे शुरू हुआ. कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे चौरी चौरा के इंस्पेक्टर ने लोगों को समझाया तो कुछ लोग नई बाजार आ गए और वहां पर रास्ता जाम कर दिया.

पुलिस दोनों स्थानों पर प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रास्ता खुलवाने की कोशिश कर रही थी, तभी कई लोग नई बाजार पुलिस चौकी की तरफ बढ़ गए और पथराव करते हुए परिसर में खड़े वाहनों में आग लगा दी.

पुलिस चौकी पर जब आग लगाई गई तो वहां पर पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे. वे आक्रोशित भीड़ को संभाल नहीं पाए और भाग खड़े हुए. भीड़ ने पुलिस चौकी के कमरों में भी आग लगा दी और जमकर तोड़फोड़ की. पथराव में चौकी इंचार्ज का सिर फट गया.

पुलिस चौकी में आगजनी की सूचना मिलने पर गोरखपुर से पुलिस बल भेजा गया. पीएसी की एक बस ब्रह्मपुर पहुंची तो भीड़ ने उस पर पथराव किया. पीएसी के जवान जान बचाने के लिए भागे. भीड़ ने पीएसी की बस में आग लगा दी.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकी में भी आग लगा दी थी.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकी में भी आग लगा दी थी.

यह बवाल तब थमा पर जिला मुख्यायल से भारी पुलिस बल लेकर अधिकारी मौके पर पहुंचे. ब्रह्मपुर में हुए बवाल के मामले में पुलिस ने 500 से अधिक लोगों पर सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने, महामारी अधिनियम, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट, 307, 395 सहित एक दर्जन गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

वार्ड 60 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था, जबकि वार्ड 61 अनारक्षित था. ये दोनों वार्ड निषाद बाहुल्य हैं. वार्ड 60 से रवि प्रताप निषाद और 61 से कोदई साहनी चुनाव लड़े थे. रवि बसपा समर्थित थे जबकि कोदई निर्दल.

दोनों का कहना है कि मतगणना के बाद उन्हें विजयी बताया गया था लेकिन दोपहर बाद पता चला कि वार्ड 60 से सपा समर्थित गोपाल यादव और 61 से निर्दल प्रत्याशी रमेश को विजयी घोषित करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र दे दिया गया. यह खबर आते ही लोग सड़क पर आ गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया जो बाद में हिंसक हो गया.

प्रदर्शन के दौरान लोग चौरीचौरा की भाजपा विधायक संगीता यादव और बसपा से भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा सदस्य बने जय प्रकाश निषाद के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन्हीं दोनों नेताओं के इशारे पर चुनाव परिणाम बदला गया.

ब्रह्मपुर में बवाल के बाद बुधवार देर रात इन दोनों वार्डों के अलावा तीन अन्य वार्डों के मतों को मिलान किया गया. इसके बाद तीन वार्डों 25, 60 और 61 का परिणाम बदलने की घोषणा की गई. चुनाव परिणाम संशोधित करते हुए वार्ड 60 से रवि प्रताप निषाद, 61 से कोदई साहनी और 45 से देवशरण को विजयी घोषित किया गया.

जिला निर्वाचन अधिकारी के विजयेंद्र पांडियन के अनुसार कुल पांच वार्डों 21, 32, 45, 60 और 61 के संबंध में शिकायतें मिलीं थी. इन वार्डों में पड़े मतों का बुथवार मिलान किया गया, जिसमें 21 और 32 के परिणाम सही मिले, जबकि 60, 61 और 45 में परिणाम गलत मिले, जिसे संशोधित किया गया. वार्ड संख्या 45 में लिपकीय त्रुटि से रामअचल का जीता हुआ बताया गया था, जबकि यहां पर देवशरण जीते हैं. देवशरण सपा समर्थित प्रत्याशी हैं.

प्रदर्शनकारियों को समझाती पुलिस.

प्रदर्शनकारियों को समझाती पुलिस.

पांडियन के अनुसार, ब्रह्मपुर के रिटर्निंग ऑफिसर वीरेंद्र कुमार ने कुल मतों में फेरबदल कर दिया था, जिसके कारण वार्ड 60 और 61 में हारे हुए प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया गया था.

वार्ड 60 में रवि प्रताप निषाद को 8,635 वोट मिले थे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें 6,539 वोट प्राप्त करना दिखाया और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी गोपाल यादव जिन्हें 6,914 वोट मिले थे, विजयी बताया. इसी तरह कोदई साहनी को 4,464 वोट मिले थे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उन्हें 3,130 मत प्राप्त कराना दिखाया गया.

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को भी लिखा जाएगा. ब्रह्मपुर के रिटर्निंग ऑफिसर वीरेंद्र कुमार सिंचाई विभाग के एक्सईएन हैं.

बहरहाल बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे तक राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर इन तीन वार्डों के संशोधित चुनाव परिणाम को अपडेट नहीं किया गया है. वेबसाइट पर पूर्व घोषित परिणाम ही दिख रहा है.

तीन वार्डों के चुनाव परिणाम को बदले जाने को लेकर जिला प्रशासन की खूब फजीहत हो रही है. जिला प्रशासन सभी परिणाम मतगणना के चौथे दिन घोषित कर पाया. इसमें भी तीन वार्डों के चुनाव परिणाम को बदलना पड़ा.

सवाल उठ रहा है कि दो वार्डों की मतगणना में गड़बड़ी कर हारे हुए प्रत्याशी को जिताने में केवल रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका थी? यदि पांच वार्डों में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी तो मतों का मिलान किए बिना तीन वार्डों में हारे हुए प्रत्याशियों को क्यों विजयी घोषित किया गया?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में जिला पंचायत सदस्य के 68 वार्ड हैं. भाजपा 25 और सपा 20 सीटों पर जीत का दावा कर रही है.

(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)