राजनीति

रंगासामी चौथी बार पुदुचेरी के मुख्यमंत्री बने, पहली बार चलाएंगे गठबंधन सरकार

पुदुचेरी विधानसभा चुनाव में एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली एनआर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस के पूर्व नेता रंगासामी ने वर्ष 2011 में इस पार्टी की स्थापना की. उन्होंने यह क़दम केंद्र शासित प्रदेश के तत्कालीन लोकसभा सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी की कथित शिकायत पर कांग्रेस द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उठाया था.

एन. रंगासामी. (फोटो साभार: फेसबुक)

एन. रंगासामी. (फोटो साभार: फेसबुक)

पुदुचेरी: एआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) के संस्थापक 71 वर्षीय एन. रंगासामी ने शुक्रवार को रिकॉर्ड चौथी बार पुदुचेरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन पहली बार वह गठबंधन की सरकार चलाएंगे, क्योंकि सहयोगी भाजपा के प्रतिनिधियों के भी उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद है.

रंगासामी ने राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में पद व गोपनीयता की शपथ ली.

रंगासामी चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं. वह इस केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की अगुवाई करेंगे, जिसमें एनआर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी शामिल हैं.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को रंगासामी ने अकेले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में एआर कांग्रेस और भाजपा के विधायकों को उनके मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा.

रंगासामी को साधारण रहन-सहन, मृदुभाषी और आसान पहुंच वाला नेता माना जाता है. उन्हें मुख्यमंत्री रहते हुए भी दोपहिया वाहन के जरिये पुदुचेरी की गलियों में घूम हालात का जायजा लेने को लेकर जाना जाता है.

कांग्रेस के पूर्व नेता रंगासामी ने वर्ष 2011 में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) की स्थापना की. उन्होंने यह कदम केंद्र शासित प्रदेश के तत्कालीन लोकसभा सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी की कथित शिकायत पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उठाया था.

रंगासामी ने अपने चुनावी करिअर की शुरुआत असफलता से की. उन्हें वर्ष 1990 में उनके धुर राजनीतिक विरोधी व जनता दल नेता वी. पेथपेरुमल ने थाट्टनचावडी विधानसभा सीट पर मात दी थी.

हालांकि, अगले ही साल रंगासामी ने इसी सीट से जीत दर्ज की और मंत्रिमंडल में उन्हें बतौर कृषि मंत्री शामिल किया गया.

उन्होंने वर्ष 1996 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की. वर्ष 2001 में कांग्रेस पुदुचेरी की सत्ता में दोबारा आई और उन्हें शासन की बागडोर दी गई, पांच साल बाद रंगासामी के नेतृत्व में पार्टी दोबारा सत्ता में आई और कमान उनके हाथों में ही रही.

हालांकि, परिस्थितियां उस समय बदलीं जब नारायणसामी ने रंगासामी की विभिन्न मुद्दों पर आलोचना तेज की और कांग्रेस ने अगस्त 2008 में उन्हें हटाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वी. वैद्यलिंगम को बैठा दिया.

रंगासामी ने वर्ष 2011 में कांग्रेस से अलग होकर एनआर कांग्रेस का गठन किया और जे. जयललिता के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक से गठबंधन कर तब हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की.

एनआर कांग्रेस को 15 सीटों पर जीत मिली और एक निर्दलीय के समर्थन से रंगासामी ने पुदुचेरी विधानसभा में सरकार बनाने के जादुई आंकड़े को प्राप्त कर लिया और अपने नेतृत्व में सरकार बनाई.

रंगासामी वर्ष 2011 में सरकार बनाने के समय अन्नाद्रमुक से अलग हो गए, जिसकी वजह से उन्हें जयललिता की आलोचना का सामना करना पड़ा. जयललिता ने उन्हें ‘गद्दार’ तक करार दे दिया था.

एनआर कांग्रेस वर्ष 2016 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ी, लेकिन सफलता दोहराने में कामयाब नहीं हुई और 17 सदस्यों के साथ कांग्रेस-द्रमुक सरकार बनाने में सफल हुईं.

रंगासामी वर्ष 2016 में नेता प्रतिपक्ष बने. रंगासामी ने वाणिज्य में स्नातक किया है और विधि की पढ़ाई भी की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एन आर कांग्रेस के नेता एन. रंगासामी को पुदुचेरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी और नए कार्यकाल के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं.

मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘पुदुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर मैं एन रंगासामी को बधाई देता हूं. उनके कार्यकाल के लिए उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं.’

बीते दो मई को हुई मतगणना में पुदुचेरी में 30 सीटों की विधानसभा वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस 10 सीटें जीती और भाजपा की छह सीटों के साथ राजग ने बहुमत के लिए आवश्यक 16 के जादुई आंकड़े को पा लिया था.

पुदुचेरी में इस बार एनआर कांग्रेस, भाजपा और ऑल इंडिया अन्ना दविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

पूर्व मुख्यमंत्री और एनआर कांग्रेस प्रमुख एन. रंगासामी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन अपनी परंपरागत थत्टनचावडी सीट से ही उन्हें जीत मिल सकी. यहां उन्होंने सीपीआई उम्मीदवार के. सेतु सेल्वम को हराया.

इसके अलावा रंगासामी ने यनम सीट से भी चुनाव लड़ा था, जहां निर्दलीय उम्मीदवार गोल्लापल्ली श्रीनिवास से हार का सामना करना पड़ा.

बहरहाल इस केंद्र शासित प्रदेश में पहली बार भाजपा सरकार को हिस्सा बनने जा रही है. विधानसभा चुनाव में उसने छह सीटें जीतकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

इससे पहले पुदुचेरी की विधानसभा में भाजपा का प्रतिनिधि 1990 में पहुंचा था.

कांग्रेस ने यहां की 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उनमें से दो (माहे और लॉसपेट) ही जीत का स्वाद चख सके. कांग्रेस के सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम को छह सीटों पर जीत मिली.

छह निर्दलीय उम्मीदवारों को भी चुनाव में जीत हासिल हुई है. केंद्र शासित प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब छह निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की.

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके अलावा ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस ने आठ, एआईएडीएमके को चार और डीएमके को दो सीटें मिली थीं.

हालांकि यहां की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी. ऐन चुनाव से पहले इस साल 21 फरवरी को विधायकों के लगातार इस्तीफा देने के चलते 30 सदस्यीय पुदुचेरी विधानसभा में सत्ताधारी कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के विधायकों की संख्या घटकर 11 हो गई थी, जबकि विपक्षी दलों के 14 विधायक थे.

इसके बाद विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान से पहले मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने इस्तीफा दे दिया था और केंद्र शासित प्रदेश की कांग्रेस नीत सरकार गिर गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)