कोविड-19

कमी के बावजूद रेमडेसिविर इंजेक्शन फिल्म कलाकारों और नेताओं को कैसे मिल जा रहा है: हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट में दाख़िल याचिका में कहा गया है कि लोगों और राजनेताओं आदि का एक समूह है जो मनमाने ढंग से मरीज़ों को रेमडेसिविर वितरित कर रहा है. ट्वीट करने के कुछ घंटों के भीतर लोगों तक इंजेक्शन पहुंच जा रहे हैं. इस पर पीठ ने सरकार से पूछा कि उनके आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जाता है?

रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)

रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)

मुंबई: रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह यह स्पष्ट करने को कहा है कि अगर इसकी कमी है तो फिल्म स्टार और राजनेता इस एंटी वायरल दवा को खरीदकर जरूरतमंदों में कैसे बांट रहे हैं?

बता दें कि रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है और कोविड-19 परीक्षणों में सुधार दिखाने वाला उपचार है. कोविड-19 के खिलाफ एंटीवायरल ड्रग की प्रभावकारिता साबित नहीं हुई है, लेकिन कोविड-19 के मामलों में देश में वृद्धि होने से इस दवा की मांग काफी बढ़ गई है, ऐसे में भारत ने बीते 11 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

कोरोना वायरस से जुड़े हालात को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है. हालांकि इस आदेश को बृहस्पतिवार को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है.

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और तमाम उच्च न्यायालयों के पहले के आदेशों के अनुसार सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित किया जाना था.

याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील एडवोकेट राजेश इनामदार ने कहा कि जब अस्पतालों में रेमडेसिविर और टोसीलिजुमाब जैसी प्रमुख दवाएं नहीं है, तब फिल्मी हस्तियों और राजनेता इन्हें आसानी से खरीद और वितरित कर रहे हैं.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, वकील ने कहा, ‘यह जानकारी पानी में हिमखंड का सिर्फ छोटा सा हिस्सा है, हम नहीं जानते कि पानी के नीचे क्या है. हम यहां कानून के अनुसार न्याय करने आए हैं, ऐसा नहीं जो कानून के अनुरूप न हो.’

उन्होंने अभिनेता सोनू सूद और राकांपा नेता के जीशान सिद्दीकी के कई ट्वीट की ओर इशारा किया जिसमें मांग के कुछ घंटों के भीतर ही रेमेडिसविर इंजेक्शन का वितरण किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे और भी उदाहरण हैं.

अदालत ने कहा कि वह कोविड-19 रोगियों की मदद करने वालों के रास्ते में नहीं आना चाहती, लेकिन उसे कानून के अनुसार आदेश पारित करना होगा.

जस्टिस कुलकर्णी ने तब पूछा कि क्या यह कालाबाजारी का परिणाम होगा? क्या यह जमाखोरी, अवैध स्टॉकिंग और अवैध वितरण का परिणाम होगा?

पीठ ने तब राज्यों से इन आरोपों के संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा है.

इनामदार ने बताया कि मुंबई के अस्पतालों में भी ऐसे बोर्ड लगे हैं कि उनके पास कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए रेमडेसिविर/टोसीलिजुबाम का कोई स्टॉक नहीं है और डॉक्टर मरीज के रिश्तेदारों पर बाहर से दवा खरीदने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘लोगों और राजनेताओं आदि का एक समूह है जो मनमाने ढंग से मरीजों को रेमडेसिविर वितरित कर रहा है. वे इसे कैसे खरीद रहे हैं?’

पीठ ने तब सरकार से पूछा कि उनके आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जाता है और मरीजों को स्वतंत्र रूप से रेमडेसिविर खरीदने के लिए कहा जाता है?

इनामदार ने अपनी याचिका में कहा कि ट्वीट करने के कुछ घंटों के भीतर लोगों तक इंजेक्शन पहुंच जा रहे हैं.

मालूम हो कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर भाजपा नेता भी लगातार विवादों में हैं.

बीते दिनों महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कथित जमाखोरी को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा एक फार्मा कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ पर भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस आदि ने आपत्ति जताई थी. इसे लेकर शिवसेना के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और भाजपा आमने-सामने आ गए थे.

इससे पहले गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल भी इन इंजेक्शनों को मुफ्त में बांटने को लेकर विवादों के केंद्र में आ गए थे.

इसके अलावा महाराष्ट्र की अहमदनगर सीट से भाजपा सांसद सुजय विखे पाटिल द्वारा कथित तौर पर दिल्ली से अनाधिकारिक रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदकर अपने लोकसभा क्षेत्र में बांटने का मामला सामने आया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा था कि हम केवल यह जानना चाहते हैं कि भाजपा सांसद पाटिल ने कैसे अनाधिकारिक तौर पर और चुपके से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद लिए थे?

दिल्ली से अवैध तरीके से रेमडेसिविर टीके की 10,000 शीशियां खरीदने और अहमदनगर में वितरित किए जाने के आरोप में चार कृषि विशेषज्ञों द्वारा पाटिल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर अदालत में याचिका दाखिल की गई है.