केंद्र और राज्य के बीच रेमडेसिविर को लेकर समन्वय की कमी: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है. हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

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रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है. हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)
रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की आवश्यक मात्रा के आवंटन में केंद्र और राज्य सरकार के बीच ‘समन्वय की कमी’ प्रतीत होती है.

बता दें कि रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है और कोविड-19 परीक्षणों में सुधार दिखाने वाला उपचार है. कोविड-19 के खिलाफ एंटीवायरल ड्रग की प्रभावकारिता साबित नहीं हुई है, लेकिन कोविड-19 के मामलों में देश में वृद्धि होने से इस दवा की मांग काफी बढ़ गई है, ऐसे में भारत ने बीते 11 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

अदालत ने उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से गुजरात राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस भार्गव डी. त्रिवेदी की एक खंडपीठ ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सहायक सॉलिसिटर जनरल देवांग व्यास से पूछा कि गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है.

अदालत से सवाल किया, ‘उन रोगियों का क्या होगा, जिन्हें इस (इंजेक्शन) की आवश्यकता है? क्या सरकार को रोगियों को रेमडेसिविर के अभाव में मरने देना चाहिए?’

अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह राज्यों को कोविड-19 के गंभीर रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रेमेडिसविर के आवंटन के लिए नीति को रिकॉर्ड में रखे.

अदालत ने कहा कि उत्पादन पहले के 30,00,000 शीशी प्रति माह से बढ़कर एक करोड़ शीशी होने के बावजूद, गुजरात के लिए केंद्र का आवंटन 21 अप्रैल से लगभग 16,000 प्रतिदिन बना हुआ है.

अदालत कोविड-19 महामारी से संबंधित मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत को बताया कि 21 अप्रैल से 16 मई के बीच गुजरात को प्रतिदिन 16,115 शीशियों की दर से रेमेडिसविर की 419,000 शीशियां मिलीं, जबकि राज्य ने 25,000 से अधिक शीशियों की मांग की थी.

उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की 25,000 शीशियों की मांग अधिकतम थी.

अदालत ने कहा, ‘फिलहाल आपका (राज्य का) जीएमएससीएल (गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड) इसे (अस्पतालों को) गुजरात में आवश्यकताओं के अनुसार वितरित कर रहा है. फिर उन परिस्थितियों में जब अस्पतालों से जीएमएससीएल को मांग आती है और आप (सरकार) इसे केंद्र को भेजते हैं.’

अदालत ने कहा, ‘अब ऐसा लगता है कि केंद्र और राज्य के बीच पिछले एक महीने से शेष लगभग 10,000 रेमडेसिविर शीशियों की खरीद के लिए समन्वय की कमी है.’

अदालत ने कहा कि केंद्र को सोमवार से ही पर्याप्त कोटा देना चाहिए.

व्यास ने अदालत को बताया कि रेमडेसिविर को 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग और शीशियों की उपलब्धता के अनुसार आवंटित किया जा रहा था और ऐसा नहीं है कि केंद्र के पास असीमित आपूर्ति थी और वह इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रोक रहा था.

व्यास ने कहा कि 21 अप्रैल से 23 मई के बीच गुजरात को आपूर्ति बढ़कर 510,000 शीशी हो गई, जिससे यह देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे स्थान पर है.

अदालत की पीठ ने तब केंद्र से कहा कि वह मांग और आवंटन के बीच अंतर को जायज ठहराए और आवंटन के लिए अपनाई जा रही नीति को भी रिकॉर्ड में रखे.

मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी.

हाईकोर्ट ने गुजरात में ब्लैक फंगस पर चिंता जताई, सरकार से कार्रवाई योजना मांगी

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में ब्लैक फंगस यानी ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ नाम के एक फंगल इंफेक्शन के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से नई चुनौती के लिए तैयार रहने को कहा है.

अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि वह फंगल इंफेक्शन के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर कैसे निपटेगी और इस पर एक रोड-मैप रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया.

जस्टिस बेला त्रिवेदी तथा जस्टिस भार्गव डी. कारिया की खंड पीठ ने महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी से कहा कि वह निर्देश लें कि अगर निजी अस्पताल इस संक्रमण का उपचार करने के लिए जरूरी इंजेक्शन की मांग करते हैं तो गुजरात सरकार की इंजेक्शन की आपूर्ति करने की क्या योजना है.

अदालत को कमल त्रिवेदी ने सूचित किया था कि सरकार ने इस फंगल इंफेक्शन के उपचार के लिए जरूरी तीन इंजेक्शनों की 114,430 शीशियों का ऑर्डर सीधे निर्माताओं को दिया है, जिसके बाद पीठ ने उक्त सवाल पूछा था.

अदालत ने कोविड-19 महामारी से जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया है और इसी पर वह सुनवाई कर रही थी.

कमल त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि ब्लैग फंगस के इलाज के लिए इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन सरकार सरकारी अस्पतालों की मांगों को पूरा करने के लिए कुछ निर्माताओं से निजी तौर पर उन्हें खरीदने की कोशिश कर रही है. सरकारी अस्पतालों में संक्रमण के इलाज के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं.

महाधिवक्ता ने अपने अभिवेदन में कहा, ‘आज हम तैयार हैं, लेकिन एक बार फिर यह इस विशेष बीमारी की गतिशीलता पर निर्भर करता है.’

अदालत ने कहा, ‘यह एक नई चुनौती है जो मुख्य चुनौती से जुड़ी हुई है.’

कांग्रेस विधायक ग्यासउद्दीन शेख की ओर से स्वत: संज्ञान की कार्यवाही के हिस्से के तौर पर ब्लैक फंगस से संबंधित दीवानी आवेदन दायर करने वाले वकील आनंद याज्ञनिक ने कहा कि ऐसे रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को इंजेक्शन का एक निश्चित कोटा आवंटित करने के लिए एक तंत्र की आवश्यकता है.

बता दें कि ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ नाम के एक फंगल इंफेक्शन के कारण इस महीने की शुरुआत में गुजरात में सात लोगों की आंखों की रोशनी चली गई, जो कोविड-19 संक्रमण से ठीक हुए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल गुजरात के पांच शहरों के आठ प्रमुख अस्पतालों में कम से कम 1,163 मरीज इसका इलाज करा रहे हैं. वहीं अन्य राज्यों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है.

डॉक्टरों का फंगल इंफेक्शन की बीमारी के बारे में पहले से ही पता है, लेकिन इसके मामले कोविड-19 संबंधी जटिलताओं की वजह से बढ़ रहे हैं, जिसमें स्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल कई बार रक्त में शुगर का स्तर बढ़ा देता है और कुछ दवाओं का परिणाम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के रूप में निकलता है. काफी हद तक यह संक्रमण मधुमेह के मरीजों में होता है और सामान्य तौर पर गैर मधुमेह मरीजों में यह नहीं होता है.

म्यूकोरमाइकोसिस का लक्षण सिरदर्द, बुखार, आंखों के नीचे दर्द, नाक में जकड़न और आंशिक रूप से दृष्टि बाधित होना है.

बता दें कि इससे पहले पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने म्यूकोरमाइकोसिस के कारण कम से कम 12 मामले सामने आने और कम से कम छह मरीजों की आंख की रोशनी जाने की बात कही थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)