यूपी: भाई की नियुक्ति के बाद अब ज़मीन ख़रीद को लेकर विवादों में बेसिक शिक्षा मंत्री

राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ईडब्ल्यूएस कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भाई की नियुक्ति संबंधी आरोपों के बाद अब 1.26 करोड़ मूल्य की ज़मीन को 20 लाख रुपये में खरीदने के विवाद में घिर गए हैं. विपक्ष ने उनकी संपत्ति की जांच करवाते हुए उन्हें कैबिनेट से बर्ख़ास्त करने की मांग की है.

/
बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी. (फोटो साभार :फेसबुक/@Dr.satishchandradwivedibjp)

राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ईडब्ल्यूएस कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भाई की नियुक्ति संबंधी आरोपों के बाद अब 1.26 करोड़ मूल्य की ज़मीन को 20 लाख रुपये में खरीदने के विवाद में घिर गए हैं. विपक्ष ने उनकी संपत्ति की जांच करवाते हुए उन्हें कैबिनेट से बर्ख़ास्त करने की मांग की है.

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी. (फोटो साभार :फेसबुक/@Dr.satishchandradwivedibjp)
बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी. (फोटो साभार :फेसबुक/@Dr.satishchandradwivedibjp)

गोरखपुर: सिद्धार्थनगर जिले के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ईडब्ल्यूएस कोटे से भाई के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के विवाद के बाद अब खुद बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी 1.26 करोड़ मूल्य की जमीन को सिर्फ 20 लाख रुपये में खरीदने के विवाद में घिर गए हैं.

मंत्री बनने के बाद उनकी मां के नाम खरीदी गई तीन और जमीन पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के अलावा सपा और कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को उठाते हुए मंत्री की संपत्ति की जांच कराने और उन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने की मांग की है.

उल्लेखनीय है कि सतीश द्विवेदी के भाई अरुण कुमार ने अपनी नियुक्ति पर सवाल उठने के बाद 26 मई को इस्तीफा दे दिया लेकिन इससे मामला शांत नहीं हुआ है.

विपक्षी दलों के नेता मंत्री के भाई के ईडब्ल्यूएस के सर्टिफिकेट के साथ-साथ मंत्री और उनके परिजनों द्वारा दो वर्षों में दो करोड़ से अधिक मूल्य की जमीन खरीदने का मामले की जांच की मांग कर रहे हैं. विपक्षी दलों के नेता सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मंत्री को इतने पैसे कहां से मिले, जो उन्होंने करोड़ों की जमीन खरीदी.

विपक्षी दलों के नेताओं ने बेसिक शिक्षा मंत्री और उनकी मां द्वारा दो वर्ष में तीन कृषि और एक आवासीय भूमि की खरीद के बैनामे के कागजात जारी किए गए हैं. बैनामे के ये कागजात दो दिन से सोशल मीडिया में तैर रहे हैं.

बैनामे के इन कागजात के अनुसार, सतीश द्विवेदी ने 16 नवंबर 2019 को 20 लाख में 0.784 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसका बाजार मूल्य उस समय 1.26 करोड़ रुपये था. इसी तरह उनकी मां कालिंदी देवी ने दीपा पत्नी अर्जुन के साथ संयुक्त रूप से कमदा लालपुर में 350 वर्ग मीटर की आवासीय भूमि 16 दिसंबर 2019 को 12 लाख रुपये में खरीदी, जिसका बाजार मूल्य उस वक्त 65.45 लाख था.

इसके अलावा उन्होंने 18 नवंबर 2020 को 0.0362 हेक्टेयर भूमि 20 लाख में खरीदी, जिसका बाजार मूल्य उस समय 22.01 लाख रुपये था. उन्होंने एक और जमीन जिसका रकबा 0.281 हेक्टेयर था, दो जनवरी 2021 को आठ लाख रुपये में खरीदी जिसका बाजार मूल्य उस समय 23.61 लाख रुपये था.

इस तरह मंत्री और उनकी मां ने नवंबर 2019 से तीन कृषि और एक आवासीय भूमि की खरीद की. इन चारों जमीन का बाजार भाव खरीदे जाने के समय 2.37 करोड़ रुपये थे लेकिन इन्हें सिर्फ 60 लाख रुपये में खरीदा गया.

ये सभी जमीन डॉ. सतीश द्विवेदी के मंत्री बनने के बाद खरीदे गए हैं. द्विवेदी ने अपने नाम से जिस जमीन का बैनामा लिया है, वह तो मंत्री बनने के दो माह बाद ही खरीदी गई थी.

सतीश द्विवेदी योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में 21 अगस्त 2019 को बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए थे. सिद्धार्थनगर जिले के इटवा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने डॉ. सतीश द्विवेदी को मंत्री बनाया जाना उस समय भाजपा नेताओं को भी चौंका गया था.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठनकर्ता रहे द्विवेदी वर्ष 2017 में विधायक बनने के समय सिर्फ 38 वर्ष के थे. वह विधायक बनने के पहले कुशीनगर जिले के बुद्ध पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर थे.

विधानसभा चुनाव लड़ने के दौरान सतीश द्विवेदी द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्र के अनुसार उनकी और उनकी पत्नी की कुल चल और अचल संपत्ति 1.12 करोड़ की थी.

शपथ पत्र के अनुसार, विधायक बनने के पहले द्विवेदी के पास अपने गांव शनिचरा में 35 लाख की लागत का दो एकड़ कृषि भूमि, लखनऊ में आठ लाख की एक हजार वर्ग फीट की गैर कृषि भूमि तथा पांच लाख का दो हजार वर्ग फीट का आवासीय भवन शनिचरा बजार में था.

उनकी पत्नी के पास गोरखपुर के महादेव झारखंडी में 30 लाख की 3,000 वर्ग फीट की गैर कृषि भूमि थी. मंत्री ने वर्ष 2016-17 में दाखिल आयकर रिटर्न में अपनी आय 17,44,040 और पत्नी की आय 7,00,878 दिखाई थी.

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा है कि बेसिक शिक्षा मंत्री द्वारा मंत्री बनने के बाद करोड़ों की जमीन खरीदने की जांच तुरंत करवाई जानी चाहिए और पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए.

सिंह ने जमीन के बैनामे के कागजात मीडिया में जारी करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में वह इस तरह के कई और सबूत सार्वजनिक करेंगे.

उन्होंने सवाल किया कि आखिर फर्जी सर्टिफिकेट पर भाई को नौकरी दिलाने के मामले में अभी तक मंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अशोक सिंह ने गुरुवार को बयान जारी कर बेसिक शिक्षा मंत्री और उनके परिवार द्वारा कम समय में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जांच ईडी और हाईकोर्ट के वर्तमान जज से कराने तथा उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘बेसिक शिक्षा मंत्री ने अपने भाई को असिस्टेंट प्रोफेसर बनवाने के लिए फर्जीवाड़ा किया और सत्ता का दुरूपयोग किया. मंत्री को बताना चाहिए कि मंत्री बनते ही उन्होंने करोड़ों की संपत्ति कैसे और कहां से अर्जित की.’

जमीन खरीद में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर  सतीश द्विवेदी ने कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं.

द्विवेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा कि वे और उनकी पत्नी पिछले 20 साल से प्रोफेसर हैं और अपनी आय के आधार पर उन्होंने जमीन खरीद का भुगतान अपने बैंक खातों से किया है. अगर उनके पास आयकर का या कहीं और से कोई नोटिस आता है तो वह जांच के लिए तैयार हैं.

इसी बीच अरुण कुमार द्विवेदी के ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के बारे में नया खुलासा हुआ है. ऐसा सामने आया है कि इसके लिए किए गए आवेदन के 24 घंटे के अंदर ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया था. लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने अपनी जांच आख्या आवेदक द्वारा दिए गए शपथ पत्र पर ही दे दी और तहसीलदार ने बिना जांच-पड़ताल किए सर्टिफिकेट जारी कर दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने सर्टिफिकेट के लिए दिए गए आवेदन, लेखपाल की रिपोर्ट और तहसीलदार के आदेश की काॅपी सोशल मीडिया पर साझा की है.

उन्होंने लिखा है, ‘1 दिन लगता है यूपी में आय प्रमाणपत्र जारी होने में! मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई ने 29.11.2019 को प्रार्थना पत्र दिया, तहसीलदार व आरआई ने ने तत्काल रिपोर्ट मांगी, लेखपाल व आरआई ने तत्काल रिपोर्ट दी, तहसीलदार ने तत्क्षण आदेश किया व 29.11.2019 को ही प्रमाणपत्र जारी. यह है योगी सरकार की रफ्तार ! अब ये मत कह देना कि ये मंत्री जी का मामला था!’

(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)

pkv games bandarqq dominoqq pkv games parlay judi bola bandarqq pkv games slot77 poker qq dominoqq slot depo 5k slot depo 10k bonus new member judi bola euro ayahqq bandarqq poker qq pkv games poker qq dominoqq bandarqq bandarqq dominoqq pkv games poker qq slot77 sakong pkv games bandarqq gaple dominoqq slot77 slot depo 5k pkv games bandarqq dominoqq depo 25 bonus 25