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केरलः बलात्कार के आरोपी बिशप का विरोध करने वाली सिस्टर लूसी से कॉन्वेंट छोड़ने को कहा गया

एक नन ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उनके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था. बिशप फ्रेंको मुलक्कल की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाली केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को बीते अगस्त में चर्च से निष्कासित कर दिया गया था.

केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा. (फोटो: एएनआई)

केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा. (फोटो: एएनआई)

नई दिल्लीः केरल में बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाली सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को अपना कॉन्वेंट खाली करने का आदेश दिया गया है.

यह कदम अनुशासनात्मक आधार पर उनकी बर्खास्तगी के खिलाफ कैथोलिक चर्च में कानूनी फोरम पर उनकी अपील खारिज होने के बाद आया है.

एनडीटीवी के मुताबिक, केरल में फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कांग्रेगेशन (एफसीसी) के सुपीरियर जनरल ने पत्र में कहा, ‘आपकी बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए कैथोलिक कानूनी प्रणाली के भीतर आपके लिए कोई और कानूनी उपाय उपलब्ध नहीं है. एफसीसी के सदस्य के रूप में बने रहने का आपका अधिकार अब निश्चित रूप से समाप्त हो गया है.’

इस पत्र में कहा गया, ‘अब आपके लिए किसी भी फ्रांसिस्कन क्लेरिस्ट कॉन्वेंट में रहना गैर कानूनी है.’

इससे पहले बताया गया था कि एफसीसी द्वारा सिस्टर को निष्कासित करने के फैसले के विरोध में उसकी एक और अपील को वैटिकन ने खारिज कर दिया था.

चर्च के आंतरिक कम्युनिकेशन के मुताबिक, कैथोलिक चर्च में सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण अपोस्टलिका सिग्नेटुरा ने सदियों पुराने कांग्रेगेशन से निष्कासित करने की नन की तीसरी अपील भी खारिज कर दी थी.

कांग्रेगेशन की ओर से कहा गया, ‘लूसी कलाप्पुरा की अपील को अपोस्टलिका सिग्नेटुरा ने खारिज कर दिया और बर्खास्तगी की पुष्टि की.’

बता दें कि जनवरी 2019 में कलाप्पुरा ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच एक साथी नन का बलात्कार करने का आरोप है.

अक्टूबर 2019 में एफसीसी ने उन्हें इस आधार पर बर्खास्त किया कि ‘वह अपनी जीवनशैली में नन के रूप में अपनी प्रतिज्ञा का उल्लंघन’ कर रही थीं. उस समय एफसीसी की रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें वाहन चलाने, कविताएं लिखने और उन्हें प्रकाशित कराने और रोमन कैथोलिक बिशप मुलक्कल पर लगातार बलात्कार और उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली नन का समर्थन करने सहित कई कारणों के लिए बर्खास्त किया गया.

भारत और वैटिकन में कैथोलिक चर्च में उनकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली उनकी कई अपीलों को बाद में खारिज कर दिया गया था. उनकी अपील खारिज होने के बाद कलाप्पुरा ने कहा था कि वह कॉन्वेंट नहीं छोड़ेंगी और इसका फैसला अदालत करेगी.’

कॉन्वेंट खाली करने के हालिया निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय से वंचित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने सच बोला था.

उन्होंने कहा, ‘किसी भी शख्स को इस तरह न्याय से वंचित नहीं रखा गया.’

उन्होंने कॉन्वेंट खाली करने के हालिया निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें न्याय से वंचित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने सच बोला था. ‘ये लोग जो न्याय से विमुख हो रहे हैं, ये वही लोग हैं जो सिखाते हैं कि सच बोलना चाहिए. लोग मेरे साथ हैं.’

एसोसिएशन ऑफ कंसर्नड कैथोलिक (एसीसी) ने एफसीसी के आदेश पर अपने जवाब में इसे भारत में कैथोलिक चर्च का दुखद दिन बताया है.

एसीसी की ओर से अधिवक्ता एएम सोद्दार ने कहा, ‘क्या यह ईसाईयत है? सुपीरियर जनरल सिस्टर लूसी की बर्खास्तगी से खुश हैं. बेहतर होगा कि ऐसे लोग नन न हों, सुपीरियर जनरल बनना तो भूल जाएं. दूसरा, वेटिकन के पत्र को उस भाषा में क्यों नहीं लिखा गया जिसे एक व्यक्ति समझ सकता है और पत्र भी जारी होने के सालभर बाद सामने आया है.’

बिशप मुलक्कल के खिलाफ कोट्टायम अदालत में बलात्कार का मामला चल रहा है. उन पर बलात्कार, गलत तरीके से कैद करने, अप्राकृतिक अपराध और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगे हैं. फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं.

मलूम हो कि एक नन ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उसके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया है. यह घटना जालंधर डायोसीस द्वारा कोट्टयम जिले में संचालित कॉन्वेंट के बिशप के दौरे के दौरान हुई.

नन से बलात्कार के आरोप में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को 21 सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था.  इसके बाद 15 अक्टूबर को उन्हें अदालत से सशर्त जमानत मिल गई थी. जमानत पर रिहा होने के बाद जालंधर में उनका फूल-माला से स्वागत हुआ.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)