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बढ़ती महंगाई पर अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगें मणिपुर के मुख्यमंत्री: कांग्रेस

पेट्रोल-डीज़ल के रिकॉर्ड तोड़ दामों को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा था कि मोदी सरकार अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के साथ लोगों को मुफ़्त चावल और कोविड टीके देने के लिए बहुत कुछ कर रही है. इसकी एक क़ीमत है. मुफ़्त मदद आसमान से नहीं गिरती है. इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल के बढ़ते दामों पर कहा था कि केंद्र सरकार लाभकारी योजनाओं के लिए धन बचा रही है.

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

इम्फाल: मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने कीमतों में वृद्धि और लोगों को सरकारी सहायता पर टिप्पणी को महामारी से प्रभावित लोगों का मजाक करार देने के लिए मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से ‘बिना शर्त सार्वजनिक माफी’ की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, बीते शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा पेट्रोल-डीजल की रिकॉर्डतोड़ कीमतों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि मोदी सरकार अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ लोगों को मुफ्त चावल और मुफ्त कोविड के टीके उपलब्ध कराने के मामले में बहुत कुछ कर रही है और इसकी एक कीमत है क्योंकि मुफ्त सहायता बारिश की तरह आसमान से नहीं गिरती है.

एमपीसीसी प्रमुख गोविंददास कोंथौजम ने मंगलवार को कहा कि बीरेन सिंह की गरीबों के प्रति असंवेदनशीलता और उनका सार्वजनिक मजाक बनाना दिखाता है कि राज्य की भाजपा सरकार उनके लिए कोई सम्मान नहीं रखती है.

कोंथौजम ने कहा, ‘मुख्यमंत्री पूछ रहे थे कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने 15 साल में राज्य के लिए क्या किया. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह इबोबी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री नहीं थे?’

उन्होंने आगे कहा कि बीरेन ने कांग्रेस सरकार के प्रवक्ता के रूप में भी काम किया था.

उन्होंने दावा किया कि 2017 में केंद्र सरकार के पीपीएसी आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के सत्ता में आने के बाद से मणिपुर के लोगों ने राज्य के खजाने को पेट्रोल खरीदने में 702 करोड़ रुपये राज्य के कर के रूप में दिए हैं.

उन्होंने दावा किया कि महामारी के दौरान भी वित्तीय वर्ष 2020-21 में मणिपुर के लोगों ने राज्य के कर संग्रह के माध्यम से 167 करोड़ रुपये दिए. कोंथौजम ने सवाल किया कि राज्य सरकार ने महामारी के दौरान लोगों को कितने करोड़ वापस किए.

उन्होंने कहा, ‘गरीबों को आर्थिक पैकेज देने के बजाय सीएम ने महामारी के दौरान लोगों की जेब से पेट्रोल के माध्यम से 167 करोड़ रुपये क्यों लिए?’

इससे पहले पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीते 13 जून को माना था कि पेट्रोलियम ईंधन के दामों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं को तकलीफ हो रही है पर उन्होंने यह भी कहा था कि चूंकि कोविड राहत उपायों के कारण सरकारी खर्च बढ़ रहे हैं इसलिए केंद्र कल्याणकारी योजनाओं (गरीबों को मुफ्त राशन और मुफ्त टीकाकरण) पर खर्च करने के लिए पैसे बचा रहा है.

पत्रकारों से बातचीत में पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था, ‘मैं स्वीकार करता हूं कि ईंधन की कीमतें उपभोक्ताओं को परेशान कर रही हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन एक साल में कोविड के टीकों पर 35,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. गरीबों को आठ महीने का राशन उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. पीएम किसान के तहत कुछ हजार करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में भी ट्रांसफर किए गए हैं. ऐसे कठिन समय में हम कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए पैसे बचा रहे हैं.’