पेटेंट धारकों के अधिकारों से ज़्यादा प्रबल जीवन का अधिकार होना चाहिए: एनएचआरसी प्रमुख

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा मानवाधिकार परिषद की एक डिजिटल वैश्विक बैठक में कहा कि जीवन का अधिकार प्रबल होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में कोविड से संबंधित जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की कमी दूर हो. इसके अलावा निर्धन लोगों को दवाएं और टीके किफ़ायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकें.

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जस्टिस अरुण मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा मानवाधिकार परिषद की एक डिजिटल वैश्विक बैठक में कहा कि जीवन का अधिकार प्रबल होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में कोविड से संबंधित जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की कमी दूर हो. इसके अलावा निर्धन लोगों को दवाएं और टीके किफ़ायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकें.

जस्टिस अरुण मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)
जस्टिस अरुण मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि पेटेंट धारकों के अधिकारों की अपेक्षा जीवन का अधिकार प्रबल होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में कोविड से संबंधित जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की कमी दूर हो. इसके अलावा निर्धन लोगों को दवाएं और टीके किफायती मूल्य पर उपलब्ध हो सकें.

एनएचआरसी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, जस्टिस मिश्रा मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) की एक डिजिटल वैश्विक बैठक को संबोधित कर रहे थे. वह कोविड-19 महामारी को लेकर राज्यों की प्रतिक्रिया से जुड़े एक सत्र में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के कारण दुनिया को भारी नुकसान हुआ है. समाज में हाशिये पर रहने वाले तबकों के जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा हुई हैं, शिक्षा को नुकसान हुआ है, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है, परिवार बेसहारा हो गए हैं और बच्चे अनाथ हुए हैं.’

उन्होंने एनएचआरसी के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयोग परामर्श सहित अपने विभिन्न कदमों के जरिये इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए शासन की प्रणालियों को संवेदनशील बनाने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा कि एनएचआरसी मृतकों की गरिमा का भी ख्याल रखता है.

मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ने अपने संक्षिप्त भाषण में कई मुद्दों का जिक्र किया और चिंता जताई कि ये मानव अधिकारों को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों का भी उल्लेख किया.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मिश्रा ने साइबर स्पेस की स्वतंत्रता पर आगाह करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों को नष्ट करने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे मानव अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं. मिश्रा ने कहा, ‘हमें अगली पीढ़ी के लिए पृथ्वी ग्रह की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा. हम असफल होने, रुकने या डरने का जोखिम नहीं उठा सकते. हमें अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए एक नई चुनौतियों को हल करना होगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)