आईटी नियम: दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र को जवाब देने का निर्देश

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए आईटी नियमों के ख़िलाफ़ द वायर, द न्यूज़ मिनट, द क्विंट आदि समाचार वेबसाइट ने अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें नियमों का पालन नहीं करने के लिए सरकारी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है.

/
(फाइल फोटो: पीटीआई)

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए आईटी नियमों के ख़िलाफ़ द वायर, द न्यूज़ मिनट, द क्विंट आदि समाचार वेबसाइट ने अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें नियमों का पालन नहीं करने के लिए सरकारी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को द वायर और अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफार्मों की एक याचिका को सुनवाई के लिए 20 अगस्त को सूचीबद्ध किया है, जिसमें नए आईटी नियमों का पालन नहीं करने के लिए सरकारी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इसको साथ ही केंद्र को उस तारीख तक नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

बता दें कि, द वायर ने 9 मार्च, 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने नोटिस जारी किया था, प्रतिवादी के रूप में केंद्र सरकार ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है.

बुधवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान द क्विंट, द वायर और ऑल्ट न्यूज की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ को याद दिलाया कि उन्होंने मौखिक आश्वासन दिया था कि याचिकाकर्ता सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की स्थिति में अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि उसके बाद सरकार ने याचिकाकर्ताओं को पत्र लिखकर मांग की कि वे आईटी नियमों के लिए आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करें या गैर-अनुपालन के दंडात्मक परिणामों का सामना करें.

उन्होंने कहा, ‘नियमों पर नोटिस चला गया है और उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया है. अब वे मुझे उन्हें रिपोर्ट करने के लिए कह रहे हैं. अनुशासन (सरकार द्वारा सामग्री के नियमन के) को प्रस्तुत करने में यह पहला कदम है. कृपया मेरे स्टे आवेदन को सुनें और मुझे सुरक्षा प्रदान करें.’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का आचरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है कि मीडिया की सामग्री का सरकारी विनियमन अस्वीकार्य है.

इसके जवाब में अतिरिक्त सॉलिसीटर चेतन शर्मा ने कहा, ‘1700 डिजिटल मीडिया आईटी नियमों के अनुरूप जानकारी पहले ही दे चुके हैं.’

इस पर रामकृष्णन ने कहा, ‘यह ध्वनिमत का मामला नहीं है.’ उन्होंने दावा किया कि अदालत के समक्ष डिजिटल मीडिया पोर्टल्स ने नए आईटी नियमों को चुनौती देना पसंद किया है.

जबकि जस्टिस पटेल ने रामकृष्णन के अनुरोध का जवाब नहीं दिया कि सरकार की कार्रवाई को सुनवाई की अगली तारीख तक रोक दिया जाए, उन्होंने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मूल याचिकाओं पर उसका जवाब 20 अगस्त तक प्रस्तुत किया जाए.

साथ ही बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने समाचार एजेंसी पीटीआई की एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन कहा कि वह खुद को सरकार को नोटिस जारी करने तक सीमित रखेगी और सुनवाई की अगली तारीख 20 अगस्त को भी दलीलों पर विचार करेगी.

पीटीआई के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि आईटी नियमों को चुनौती देने वाले मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए केंद्र द्वारा एक याचिका दायर की गई है.

बता दें कि याचिकाएं आईटी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देती हैं जिसमें विशेष रूप से नियमों के भाग III को चुनौती दी गई है, जो डिजिटल मीडिया प्रकाशनों को विनियमित करना चाहता है.

याचिकाओं का तर्क है, नियमों का भाग III आईटी अधिनियम (जिसके तहत नियमों को फ्रेम किया गया है) द्वारा निर्धारित अधिकार क्षेत्र से परे है और यह संविधान के विपरीत भी है.

कई व्यक्तियों और संगठनों – जिनमें द वायर, द न्यूज मिनट की धन्या राजेंद्रन, द वायर के एमके वेणु, द क्विंट, प्रतिध्वनि और लाइव लॉ अपने-अपने राज्यों में विशेष रूप से महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली और तमिलनाडु के उच्च न्यायालयों का रुख कर चुके हैं.

वहीं, डिजिटल न्यूज में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले 13 परंपरागत अखबार और टेलीविजन मीडिया की कंपनियों ने भी डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के तहत मद्रास हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करते हुए इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 को संविधान विरोधी, अवैध और संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19 (1) क और अनुच्छेद 19 (1) छ का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की है.

मद्रास हाईकोर्ट ने 23 जून को याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

कर्नाटक संगीतकार, लेखक और कार्यकर्ता टीएम कृष्णा ने भी आईटी नियमों के खिलाफ एक याचिका के साथ मद्रास हाईकोर्ट का भी रुख किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)