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छत्तीसगढ़: भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित आईपीएस अधिकारी पर राजद्रोह का मामला दर्ज

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 1994 बैच के आईपीएस के अधिकारी जीपी सिंह व उनके संबंधियों के ठिकानों पर इसी महीने छापे मारे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने सिंह को निलंबित कर दिया था. अब उन पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. वहीं सिंह ने हाईकोर्ट से सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग की है.

आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह. (फोटो साभार: एएनआई)

रायपुर: छत्तसीगढ़ के एक आईपीएस अधिकारी, जिन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा तलाशी के बाद निलंबित कर दिया गया था, पर छत्तीसगढ़ में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीसी) 1994 बैच के अधिकारी जीपी सिंह पहले एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) थे और उन्होंने रायपुर के महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में भी काम किया. पांच जुलाई को निलंबित होने से पहले वह पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के प्रमुख के पद पर तैनात थे.

जीपी सिंह के खिलाफ पुलिस ने गुरुवार रात रायपुर में राजद्रोह का मामला दर्ज किया है. प्राथमिकी में पुलिस ने कहा कि एसीबी ने सिंह के परिसरों में अपनी तलाशी के दौरान गंभीर संवेदनशील जानकारी और सरकार तथा उसकी नीतियों के खिलाफ भड़काऊ लेख वाले दस्तावेज बरामद किए थे. एसीबी ने एक से तीन जुलाई के बीच सिंह से जुड़े 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी.

एफआईआर में कहा है कि, सिंह के रायपुर स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी के दौरान पीछे की ओर से कुछ फटे कागज के टुकड़े बरामद किए गए. जब इन टुकड़ों को फिर से व्यवस्थित किया गया, तो गंभीर और संवेदनशील जानकारी लिखी मिली.

एसीबी अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है, ‘दस्तावेजों में विभिन्न जन प्रतिनिधियों और उम्मीदवारों का गुप्त विश्लेषण था. धार्मिक आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दस्तावेज भी मिले हैं. जांच करने पर यह पाया गया कि लेखन सांप्रदायिक और जातीय हिंसा पैदा करने और कानून द्वारा बनाई गई सरकार के प्रति नफरत पैदा करने के लिए प्रेरित थे.’

प्राथमिकी के अनुसार, सिंह और उनके सहयोगियों के घरों से समान जानकारी वाले 48 पृष्ठ के दस्तावेज बरामद किए गए.

प्राथमिकी में कहा गया है, ‘एक लिफाफे में पांच पन्ने थे जिस पर दोनों तरफ टाइप किया गया है. जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों, सरकार की नीतियों और योजनाओं पर प्रतिकूल टिप्पणियां पाई गई हैं.

सिंह पर आईपीसी की धारा 124ए (घृणा या अवमानना ​​लाने का प्रयास या सरकार के प्रति असंतोष या उत्तेजना पैदा करने का प्रयास), और 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत आरोप लगाया गया है.

जीपी सिंह, जो एक आयकर जांच का भी सामना कर रहे हैं, पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में 15 स्थानों पर कई बेनामी लेनदेन किए और आय से अधिक संपत्ति अर्जित की.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने छापे में देरी करने की कोशिश की.  इस बीच वे सबूत नष्ट कर रहे थे. हालांकि, छापे से जब्त किए गए दस्तावेज भ्रामक, आपत्तिजनक हैं और स्पष्ट रूप से असामंजस्य को भड़काने वाले हैं.’

उच्च न्यायालय पहुंचे जीपी सिंह, कहा- मामले की जांच सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी करे

उधर निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने एसीबी की आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने तथा मामले की जांच सीबीआई या अन्य किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने का अनुरोध करने वाली एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की है.

सिंह के अधिवक्ता किशोर भादुड़ी ने शुक्रवार को बताया कि निलंबित आईपीएस अधिकारी ने एसीबी की कार्रवाई तथा राजद्रोह का मामला दर्ज होने के बाद शुक्रवार को उच्च न्यायालय की शरण ली.

सिंह ने अदालत में याचिका दायर कर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच सीबीआई अथवा किसी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने का अनुरोध किया है.

अधिवक्ता ने बताया कि इस महीने की एक से तीन तारीख के बीच सिंह से 10 करोड़ रुपये   से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति मिलने का आरोप लगाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था.

याचिकाकर्ता सिंह ने इस पूरी कार्यवाही को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताते हुए शुक्रवार को अदालत में अर्जी दी.

भादुड़ी ने बताया कि एसीबी की कार्रवाई के बाद बृहस्पतिवार देर रात पुलिस ने सिंह के खिलाफ रायपुर के सिटी कोतवाली थाने में राजद्रोह का मामला दर्ज किया. राजद्रोह के आरोप को लेकर दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने के लिए सोमवार को अदालत में अलग से अर्जी दी जाएगी.

एसीबी ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1994 बैच के अधिकारी जीपी सिंह तथा उनके निकट संबंधियों के ठिकानों पर इस महीने की एक से तीन तारीख तक छापे की कार्रवाई की थी.

एसीबी के अनुसार छापे के दौरान सिंह और उनके संबंधियों के पास लगभग 10 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने की जानकारी मिली है.

एजेंसी की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार ने सिंह को निलंबित कर दिया. वहीं बृहस्पतिवार देर रात पुलिस ने सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक एसीबी ने जब सिंह के निवास और उनके निकट संबंधियों के परिसरों पर छापे की कार्रवाई की तब उन्हें वहां कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज मिले. जिसके आधार पर सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)