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यूपी पुलिस ने पत्रकार के ख़िलाफ़ गैंगस्टर एक्ट लगाने को सही ठहराया, कहा- तय प्रक्रिया का पालन हुआ

उत्तर प्रदेश की महराजगंज पुलिस का आरोप है कि ज़िले के सोनौली क़स्बे में नेपाल जा रहे ट्रक चालकों से रंगदारी वसूलने के चलते पत्रकार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. पत्रकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि चूंकि उन्होंने पुलिस द्वारा ट्रक ड्राइवरों से जबरन वसूली करते हुए उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था, इसलिए उन पर ये कार्रवाई हुई है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हलफनामा दायर तक महराजगंज पुलिस द्वारा एक पत्रकार और पांच अन्य के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत मामला दर्ज करने को सही ठहराया है.

इस केस को खारिज करने के लिए पत्रकार और उनके भाई द्वारा दायर की गई याचिका पर राज्य सरकार ने ये जवाब दाखिल किया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सरकारी वकील पतंजलि मिश्रा ने कहा, ‘शुक्रवार (23 जुलाई) को दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए दिशा-निर्देशों का पालन किया गया था.’

जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की है.

याचिकाकर्ता कृष्ण गुप्ता, जो एक समाचार चैनल में काम करने का दावा करते हैं, ने कहा कि अभियोजन पक्ष का दावा झूठा और मनगढ़ंत है तथा यह दुर्भावनापूर्ण इरादे और गलत मंशा पर आधारित है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वे न तो गैंगस्टर हैं और न ही किसी गिरोह के सदस्य हैं, जैसा कि पुलिस ने आरोप लगाया है.

महराजगंज पुलिस के मुताबिक, गुप्ता व अन्य के खिलाफ महराजगंज के सोनौली थाने में नेपाल जा रहे ट्रक चालकों से रंगदारी वसूलने का मामला दर्ज किया गया था.

सोनौली पुलिस थाने के थाना प्रभारी दिनेश तिवारी ने कहा कि गुप्ता और पांच अन्य के खिलाफ 31 जनवरी को एक ट्रक चालक की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है.

मार्च में पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत सभी छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. तिवारी ने कहा कि आरोपी फिलहाल जेल में हैं.

पुलिस ने कहा कि अन्य आरोपियों की पहचान कृष्ण के भाई अजय गुप्ता और चचेरे भाई गोविंद गुप्ता के रूप में हुई है और दो ट्रक ड्राइवर अरुण कुमार विश्वकर्मा और जालंधर साहनी रूप में हुई है.

याचिका के मुताबिक, घटना याचिकाकर्ता के घर के सामने हुई, जहां परिवार जनरल स्टोर और मोबाइल फोन की दुकान चलाता है. नेपाल सीमा की ओर जाने वाला बाईपास उनके घर के पास ही है. बॉर्डर चेक-पोस्ट के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा था. जिस दिन यह घटना हुई उस दिन स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद स्थानीय निवासियों और ट्रक चालकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी.

अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता नं. 1 (कृष्ण गुप्ता) एक समाचार चैनल में कैमरामैन के रूप में कार्यरत हैं और कथित घटना के दिन संबंधित पुलिसकर्मियों को पता चला था कि याचिकाकर्ता ने ट्रक ड्राइवरों से जबरन वसूली करते हुए उन्हें (पुलिस) अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया है. इसके बाद पुलिसकर्मियों ने याचिकाकर्ताओं, उनके परिवार के अन्य सदस्यों, एक रिश्तेदार और सहयोगी के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए.