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खुले विचारों वाले नागरिकों से लोकतंत्र मज़बूत होता है: अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

भारतीय नेतृत्व के साथ बैठकों से पहले नागरिक संस्थाओं के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के सार्वजनिक कार्यक्रम में किसानों के प्रदर्शन, प्रेस की स्वतंत्रता, सीएए, अल्पसंख्यकों के अधिकार और चीन की आक्रमकता को लेकर चिंता व्यक्त की और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दे उठाए गए.

नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ एस. जयशंकर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को कहा कि सभी लोगों को अपनी सरकार में राय देने का हक है और चाहे वे जो भी हों, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए. साथ ही, उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी मानवीय गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता सहित मौलिक स्वतंत्रताओं में यकीन रखते हैं.

यहां पहुंचने के बाद और भारतीय नेतृत्व के साथ बैठकों से पहले अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को संबोधित करते हुए, ब्लिंकन ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता को साझा करते हैं और कहा कि यह प्रतिबद्धता द्विपक्षीय संबंधों के आधार का एक हिस्सा है.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि सफल लोकतांत्रिक देशों में ‘जीवंत’ नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतंत्रों को, ‘अधिक खुला, ज्यादा समावेशी, ज्यादा लचीला और अधिक समतामूलक बनाने’ के लिए उनकी जरूरत होती है.’

कार्यक्रम के एक प्रतिभागी के मुताबिक, किसानों का प्रदर्शन, प्रेस की स्वतंत्रता, संशोधित नागरिकता अधिनियम(सीएए), अल्पसंख्यकों के अधिकार और चीन की आक्रमकता को लेकर चिंताएं तथा अफगानिस्तान की स्थिति उन मुद्दे में शामिल थे जो गोलमेज वार्ता ‘समतामूलक, समावेशी और सतत वृद्धि एवं विकास’ के दौरान उठाये गये.

इसमें तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के एक प्रतिनिधि सहित नागरिक समाज के सात सदस्य शामिल हुए. प्रतिभागी ने बताया कि बातचीत के दौरान हर सदस्य ने भारत और क्षेत्र में चिंता के गंभीर मुद्दों पर संक्षिप्त रूप से अपनी बात रखी.

समझा जाता है कि ब्लिंकन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत वार्ता के दौरान कुछ चिंताओं का जिक्र किया.

रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं को हथियार की श्रेणी वाले स्वायवेयर पेगासस से संभावित जासूसी के खुलासे और संवैधानिक लोकतंत्र पर पड़ने वाले उसके असर कोई शीर्ष अमेरिकी राजनयिक के सामने लाया गया.

इंटर-फेथ फाउंडेशन के संस्थापक इफ्तिखार अहमद ने बताया कि उन्होंने अंतरधार्मिक सौहार्द्र के बारे में बात की, जो भारत और विश्व में प्रासंगिक है, तथा विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया.

अहमद ने द वायर  से बात करते हुए कहा, ‘हमारे समाज में गांधीवादी विचार, धर्मनिरपेक्षता और हिंदुत्व जैसी प्रबल विचारधाराएं प्रचलित हैं जो इस देश से संबंधित हैं. ये विचारधाराएं एक-दूसरे के विरोध में नहीं बल्कि संवाद में हैं.’

बता दें कि उनकी किताब द मीटिंग्स ऑफ माइंड्स को इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने लॉन्च किया था.

ब्लिंकन ने अपनी टिप्पणी में लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता को बढ़ते वैश्विक खतरों का हवाला देते हुए ‘लोकतांत्रिक मंदी’ के बारे में बात की और जिक्र किया कि भारत और अमेरिका के लिए इन आदर्शों के समर्थन में साथ खड़ा रहना जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘जब आप सभी चीजों को एक साथ रखते हैं, तो हमारे देशों के बीच संबंध दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक हैं. और मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि जब हमारी सरकारें आपस में काम कर रही होती हैं तो यह न केवल सरकारों के बीच का संबंध होता है, बल्कि मुख्य रूप से यह भारतीय और अमेरिकी लोगों के बीच संबंधों के माध्यम से होता है’

उन्होंने कहा, ‘हमारे लोकतंत्र विकास कर रहे हैं और मित्रों के तौर पर हम इस बारे में बात करते हैं क्योंकि लोकतंत्र को मजबूत करने और हमारे आदर्शों को वास्तविक बनाने का कठिन कार्य अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है.’

ब्लिंकन ने कारोबारी सहयोग, शैक्षणिक कार्यक्रम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक संबंधों तथा लाखों परिवारों के बीच संबंधों को समूचे संबंध का प्रमुख स्तंभ बताया.

उन्होंने कहा, ‘संभवत: सबसे अहम है कि हम साझा मूल्यों और साझा आकांक्षाओं से जुड़े हुए हैं जो हमारे लोगों के बीच समान हैं. भारत के लोग और अमेरिका के लोग मानवीय गरिमा, अवसरों में समानता, कानून के शासन, धार्मिक एवं मान्यताओं की स्वतंत्रता समेत मौलिक स्वतंत्रताओं में भरोसा रखते हैं.’

ब्लिंकन ने कहा, ‘हम मानते हैं कि सभी लोग अपनी सरकार में आवाज उठाने के हकदार हैं और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, चाहे वे कोई भी हों. यह हम जैसे लोकतंत्रों के मौलिक सिद्धांत हैं और हमारा मकसद इन शब्दों को असल अर्थ देना और इन आदर्शों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को लगातार बढ़ाते रहना है.’

उनके संबोधन का मजमून अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जारी किया. ब्लिंकन ने कहा, ‘हम जानते हैं कि अमेरिका में, अपने संस्थापकों के शब्दों में, एक अधिक परिपूर्ण संघ बनने की आकांक्षा रखते हैं. हमारा देश पहले दिन से स्वीकार करता रहा है कि एक अर्थ में हम हमेशा अपने लक्ष्य से कम होंगे, लेकिन प्रगति करने का तरीका यह है कि उन आदर्शों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा.’

उन्होंने कहा कि कई बार यह प्रक्रिया, ‘दर्द भरी होती है, कई बार कुरूप’ लेकिन लोकतंत्र की ताकत को इसे अपनाना है.

उन्होंने कहा, ‘इस समय, हम अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं. यहां भारत में, जिसमें मुक्त मीडिया, स्वतंत्र अदालतें, एक जीवंत और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली शामिल है – जो दुनिया में कहीं भी नागरिकों द्वारा स्वतंत्र राजनीतिक इच्छा की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है.’

ब्लिंकन ने कहा, ‘लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए बढ़ते वैश्विक खतरों के समय – हम लोकतांत्रिक मंदी के बारे में बात करते हैं – यह महत्वपूर्ण है कि हम विश्व के दो अग्रणी लोकतंत्र इन आदर्शों के समर्थन में एक साथ खड़े रहें.’

ब्लिंकन ने कहा कि सफल लोकतंत्रों में उन्नतिशील नागरिक समाज शामिल है और इस तरह नागरिक अपने समुदायों के जीवन में पूरी तरह से व्यस्त हो जाते हैं.

मंगलवार शाम को यहां पहुंचे ब्लिंकन ने कहा कि वह संबंधों के महत्व को रेखांकित करने के लिए और संबंधों एवं सहयोग को घनिष्ठ बनाने के लिए भारत में हैं.

बाद में ब्लिंकन ने ट्वीट किया, ‘नागरिक संस्थाओं के नेताओं से आज मुलाकात करने की प्रसन्नता है. भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता साझा करते हैं, यह हमारे संबंधों के आधार का हिस्सा है और भारत के बहुलवादी समाज और सद्भाव के इतिहास को दर्शाता है. नागरिक संस्थाएं इन मूल्यों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं.’

अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखेगा भारत: ब्लिंकन

अमेरिका ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान के संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और इस क्षेत्र में एक नेता एवं अमेरिका के अहम सहयोगी के तौर पर भारत अफगानिस्तान की स्थिरता व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखेगा.

अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से उभरने के बीच वहां उत्पन्न हो रही स्थिति और अन्य मुद्दों पर दोनों पक्षों में व्यापक चर्चा के बाद अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने यह स्पष्ट दावा किया.

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा परिदृश्य के बीच मंगलवार शाम को भारत पहुंचे ब्लिंकन इस साल भारत आने वाले बाइडन प्रशासन के तीसरे वरिष्ठ सदस्य हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अंतत: अफगान के नेतृत्व और अफगानिस्तान के स्वामित्व वाली शांति प्रक्रिया वहां होनी चाहिए. भारत इस स्थिति का पिछले कई वर्षों से पक्षधर रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के बीच इस बात पर दृढ़ सहमति है कि अफगानिस्तान में भविष्य में बनने वाली किसी भी सरकार को समावेशी होना चाहिए और उसमें अफगान लोगों का पूर्ण प्रतिनिधित्व होना चाहिए.

ब्लिंकन ने तालिबान द्वारा हिंसा के जरिये नए इलाकों को अपने कब्जे में लिए जाने के संदर्भ में कहा, ‘ताकत के जरिये देश को नियंत्रण में लेना एव लोगों के अधिकारों को कुचलना उस लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता नहीं है. सिर्फ एक रास्ता है और वह है वार्ता की मेज पर आना और शांतिपूर्ण तरीके से विवाद का समाधान करना.’

ब्लिंकन ने कहा कि भारत और अमेरिका इस संकल्पना के प्रति कटिबद्ध हैं कि उस देश में संघर्ष का कोई सैन्य हल नहीं है. उन्होंने कहा, ‘ हम काफी हद तक अफगानिस्तान को एक ही तरीके से देखते हैं. दोनों इस संकल्पना के प्रति कटिबद्ध हैं कि उस देश में संघर्ष का कोई सैन्य हल नहीं है. ’

उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि तालिबान जबरन देश को अपने नियंत्रण में ले लेता है और महिलाओं समेत अपने लोगों के अधिकारों को कुचल देता है तो वह अलग-थलग पड़ सकता है.

जशंकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि सभी पक्ष शांति वार्ताओं को गंभीरता से लें. उन्होंने कहा, ‘दुनिया एक स्वतंत्र, संप्रभु,लोकतांत्रिक और स्थिर अफगानिस्तान देखना चाहती है… जो खुद शांत हो और पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्वक रहे लेकिन उसकी स्वतंत्रता व संप्रभुता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब वह दुर्भावनापूर्ण प्रभावों से मुक्त होगा.’

उन्होंने कहा, ‘ इसी तरह किसी भी पक्ष द्वारा मनमाने तरीके से एकतरफा अपनी मर्जी थोपना लोकतांत्रिक नहीं होगा और उससे स्थायित्व नहीं आ सकती है और न ही ऐसे प्रयासों को वैधता मिल सकती है.’

भारत के कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लिए ढाई करोड़ डॉलर की अमेरिकी सहायता 

कोविड-19 महामारी और उसके प्रभावों से निपटने के लिए सहयोग और बढ़ाने पर दोनों पक्षों के बीच व्यापक चर्चा के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में सहयोग के वास्ते 2.5 करोड़ डॉलर देगा.

ब्लिंकन ने एक ट्वीट में बताया, ‘ आज, मुझे भारत के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम को सहयोग पहुंचाने के लिए यूएसएड के माध्यम से अमेरिकी सरकार की तरफ से अतिरिक्त 2.5 करोड़ डॉलर की घोषणा करने की खुशी है. अमेरिका के सहयोग से भारत में टीका आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करके जिंदगियां बचाने में मदद मिलेगी. ’

प्रधानमंत्री मोदी से मिले ब्लिंकन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की प्रतिबद्धता का स्वागत किया.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक बयान के अनुसार , प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत के समाज लोकतंत्र, स्वतंत्रता और उदारता के मूल्यों के लिए एक गहरी प्रतिबद्धता साझा करते हैं, वहीं अमेरिका में प्रवासी भारतीयों ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने में खासा योगदान किया है.

बैठक में मोदी ने राष्ट्रपति बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को अपनी तरफ से शुभकामनाएं दीं. साथ ही, क्वाड (अमेरिका, भारत, आस्ट्रेलिया और जापान के समूह), कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन से संबंधित पहलों के लिए राष्ट्रपति बाइडन की सराहना की.

बयान में कहा गया है, ‘प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के चलते पैदा चुनौतियों, वैश्विक आर्थिक सुधार और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक भागीदारी का व्यापक वैश्विक महत्व होगा.’

इसमें कहा गया है कि ब्लिंकन ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर तालमेल बढ़ने और इस तालमेल के ठोस व व्यावहारिक सहयोग में तब्दील करने के लिए दोनों सहयोगियों की प्रतिबद्धता की सराहना की.

बयान में कहा गया है, ‘ब्लिंकन ने राष्ट्रपति बाइडन और उपराष्ट्रपति हैरिस की तरफ से प्रधानमंत्री का अभिवादन किया.’

ब्लिंकन दो दिनों की यात्रा पर मंगलवार शाम भारत पहुंचे थे. अमेरिकी विदेश मंत्री नियुक्त होने के बाद उनकी भारत की यह प्रथम यात्रा है.

चीन ने ब्लिंकन के ‘लोकतंत्र खतरे में हैं’ बयान को लेकर उनकी आलोचना की

चीन ने बुधवार को परोक्ष रूप से उसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताने वाले बयान को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र होने का दावा करने वाले देशों को नस्लीय भेदभाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

नई दिल्ली पहुंचने के बाद बुधवार को अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को संबोधित करते हुए ब्लिंकन ने लोकतंत्र के लिए बढ़ते वैश्विक खतरों को लेकर आगाह किया.

ब्लिंकन ने चीन का जिक्र किए बिना कहा, ‘लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए बढ़ते वैश्विक खतरों के समय में हम एक लोकतांत्रिक मंदी के बारे में बात करते हैं. यह महत्त्वपूर्ण है कि हम विश्व के दो प्रमुख लोकतंत्र इन आदर्शों के समर्थन में एक साथ खड़े रहें.’

ब्लिंकन की टिप्पणी पर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लोकतंत्र मानवता का एक साझा मूल्य है. यह किसी देश का पेटेंट नहीं है.’ उन्होंने कहा कि एक निश्चित पैटर्न के बिना लोकतंत्र को साकार करने का तरीका विविध है.

झाओ ने कहा, ‘एक बहुदलीय राजनीतिक संरचना लोकतंत्र का एकमात्र रूप नहीं है और लोकतंत्र का इस्तेमाल टकराव पैदा करने के लिए नहीं किया जा सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘कौन सा देश लोकतांत्रिक है और कौन सा निरंकुश है, यह तय करने का तरीका किसी एक देश द्वारा तय नहीं किया जाना चाहिए. खुद को श्रेष्ठ बताते हुए दूसरों को कमजोर समझना लोकतांत्रिक नहीं है.’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘कुछ देश खुद को लोकतांत्रिक होने का दावा करते हैं, लेकिन वे नस्लीय भेदभाव, राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्याओं का सामना कर रहे हैं.’

झाओ ने अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की टिप्पणियों को लेकर भी उनपर निशाना साधा कि जब उसके हितों को खतरा होगा तो अमेरिका कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.

ऑस्टिन ने सिंगापुर में ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ में दिए एक भाषण में कहा, ‘जब हमारे हितों को खतरा होगा तो हम पीछे नहीं हटेंगे. फिर भी हम टकराव नहीं चाहते हैं.’

ऑस्टिन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, झाओ ने कहा, ‘प्रासंगिक टिप्पणियां तथ्यों के विपरीत हैं.’ उन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य चीन को बदनाम करना और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना और क्षेत्रीय देशों के बीच कलह पैदा करना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)