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गुजरातः शिक्षा विभाग से जुड़े सात करोड़ के फ़र्ज़ी बिल मामले में अधिकारी निलंबित

इसके अलावा गुजरात सरकार ने भावनगर में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के फ़र्ज़ी जीएसटी बिलों से जुड़े एक मामले में डिप्टी स्टेट टैक्स कमिश्नर समेत 36 अधिकारियों का तबादला कर दिया. इस मामले में पिछले एक महीने में 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल. (फोटो: पीटीआई)

अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने अहमदाबाद जिला पंचायत के प्रथम श्रेणी लेखा अधिकारी को सात करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के घोटाले में कथित भूमिका के लिए शुक्रवार को निलंबित कर दिया. यह कथित घोटाला अहमदाबाद जिले के शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.

उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने एक बयान में कहा कि एक अन्य मामले में भावनगर जीएसटी कार्यालय में कार्यरत उपायुक्त से लेकर एक वरिष्ठ लिपिक समेत 36 अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है, ताकि पहले से जारी जांच प्रभावित न हो.

उन्होंने कहा कि राज्य के माल एवं सेवा कर कार्यालय ने फर्जी बिलों से जुड़े कर चोरी के एक रैकेट का खुलासा किया, जिसके बाद ये तबादले किए गए हैं.

अहमदाबाद जिले के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कथित घोटाले के संबंध में पटेल ने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए फर्जी बिल जमा करके कथित तौर पर 7 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में अहमदाबाद जिला पंचायत के प्रथम श्रेणी लेखा अधिकारी हार्दिक प्रजापति को निलंबित कर दिया गया है और आगे की जांच के आदेश दिए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अहमदाबाद जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) अनिल धमेलिया ने कहा कि इस प्रकरण में एक उप लेखा अधिकारी को पहले ही निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ तीन अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं. इस सिलसिले में दो तालुका प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया है.

धमेलिया के मुताबिक, कथित घोटाला करीब 8 करोड़ रुपये का है, जिसमें संबंधित अधिकारियों पर सेवानिवृत्ति के समय शिक्षकों को मिले अवकाश का फर्जी बिल बनाने का आरोप है.

वहीं, प्रकरण में जिन आरोपियों का नाम लिया गया है, उन पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 25 फीसदी छात्रों के प्रवेश से संबंधित सरकारी अनुदान को संबंधित स्कूलों के बजाय किसी तीसरे पक्ष के खातों में जमा करने का आरोप है.

साल 2015 से 2021 के बीच कुल 53 ऐसे लेन-देन के मामले जिला अधिकारियों के संज्ञान में आए थे.

धमेलिया ने कहा, ‘हमने उप लेखा अधिकारी के खिलाफ तीन तालुकों में (धोखाधड़ी, विश्वासघात के धाराओं के तहत) तीन प्राथमिकियां दर्ज की हैं और प्रजापति को निलंबित कर दिया गया है. क्योंकि यह उनके अनुभाग में हुआ है और एक ही व्यक्ति ने इसे तीन अलग-अलग तालुकों में अंजाम दिया है. उनकी आगे की जांच सरकार द्वारा शुरू की जाएगी.’

एक हज़ार करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी बिल मामले में 36 अधिकारियों का तबादला

गुजरात के भावनगर में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) बिलों से जुड़े एक मामले में गुजरात सरकार ने शुक्रवार को भावनगर से डिप्टी स्टेट टैक्स कमिश्नर समेत 36 अधिकारियों का तबादला कर दिया.

यह कदम उस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है जहां पिछले एक महीने में 11 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘ये तबादले एक ताजा मामले का हिस्सा हैं, जिसका पता लगभग एक महीने पहले चला था, जहां विभाग द्वारा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के नकली बिलिंग रैकेट का पता चला था.’

अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने फर्जी बिल बनाने के लिए फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया और उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया, इस तरह राज्य सरकार को धोखा दिया.’

भावनगर से 36 वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों को स्थानांतरित करने के सरकार के कदम के बारे में बात करते हुए, अधिकारी ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मामले से संबंधित दस्तावेजों के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए और निष्पक्ष जांच हो सके.

अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद निष्पक्ष जांच करना और यह देखना है कि इसमें किसी अधिकारी की संलिप्तता तो नहीं है.

विभाग के स्थानीय अधिकारियों को बिना बताए राज्य के जीएसटी विभाग ने करीब एक महीने पहले भावनगर में छापेमारी की थी. अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट के 80 अधिकारियों ने भावनगर में माधव कॉपर लिमिटेड सहित 60 अलग-अलग जगहों पर छापे मारे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)