भूख से मौत: झारखंड हाईकोर्ट ने कहा, हम लोगों के साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं

झारखंड में कथित तौर पर भूख से मौत के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती इलाके में आज भी लोग आदिम युग में जी रहे हैं. राशन लेने के लिए उन्हें आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. इन्हें स्वास्थ्य की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. पीने का शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो रहा है. जंगलों में रहने वाले इन लोगों की ज़मीन से ही सरकार खनिज निकाल रही है और ये लोग आज भी पत्ते और कंद-मूल खाकर जीवनयापन कर रहे हैं.

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(इलस्ट्रेशन: द वायर)

झारखंड में कथित तौर पर भूख से मौत के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती इलाके में आज भी लोग आदिम युग में जी रहे हैं. राशन लेने के लिए उन्हें आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. इन्हें स्वास्थ्य की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. पीने का शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो रहा है. जंगलों में रहने वाले इन लोगों की ज़मीन से ही सरकार खनिज निकाल रही है और ये लोग आज भी पत्ते और कंद-मूल खाकर जीवनयापन कर रहे हैं.

झारखंड हाईकोर्ट. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में कथित तौर पर भूख से मौत के मामले की सुनवाई के दौरान बृहस्पतिवार (दो सितंबर) को राज्य सरकार को फटकार लगाई और कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती इलाके में आज भी लोग आदिम युग में जी रहे हैं, आज भी एक महिला पेड़ पर दिन गुजार रही है, यह सभ्य समाज के लिए कितनी शर्म की बात है.

राज्य में कथित तौर पर भूख से मौत के मामले में सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन एवं जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जेएचएलएसए) की रिपोर्ट देखने के बाद यह तल्ख टिप्पणी की.

बोकारो जिले के कसमार ब्लॉक के शंकरडीह गांव निवासी भूखल घासी की 2020 में कथित तौर पर भूख से मौत हो गई थी. इसके छह महीने बाद उनकी बेटी और बेटे की भी मौत इसी तरह से हो गई थी.

छह महीने के भीतर एक ही परिवार के तीन लोगों की कथित तौर पर  भूख से मौत की खबर मीडिया में आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था.

उस वक्त कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब देने को कहा था और झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (जेएचएलएसए) को सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर रिपोर्ट सौंपने को कहा था.

जेएचएलएसए की रिपोर्ट में पूर्वी सिंहभूम जिले के बोरम ब्लॉक की एक महिला के बारे में भी बताया गया है जो अपने दिन एक पेड़ पर बिता रही है.

इसे शर्म की बात बताते हुए पीठ ने कहा, ‘आज भी राज्य में किसी स्थान पर एक महिला पेड़ पर दिन गुजार रही है, यह कितनी शर्म की बात है. हम उनके साथ मानव नहीं जंगली की तरह बर्ताव कर रहे हैं, जबकि उनका ही जंगल है, जहां से खनिज निकाला जा रहा है. खनिज निकालने के बाद हम उन्हें कुछ भी नहीं दे रहे हैं. उनके हाल पर छोड़ दे रहे हैं.’

अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, ‘राज्य के सुदूरवर्ती इलाके में आज भी लोग आदिम युग में जी रहे हैं. राशन लेने के लिए उन्हें आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. इन लोगों को स्वास्थ्य की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. पीने का शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो रहा है.’

हाईकोर्ट ने आगे कहा, ‘सरकार की योजनाएं कागज में ही सीमित हैं. जंगलों में रहने वाले इन लोगों की जमीन से ही सरकार खनिज निकाल रही है और ये लोग आज भी पत्ते और वन के कंद-मूल खाकर जीवनयापन कर रहे हैं.’

मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन ने कहा, ‘सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिलता, इसलिए नक्सलवाद बढ़ता है.’

अदालत ने सरकार को इस मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. साथ ही समाज कल्याण सचिव को मामले की सुनवाई की अगली तिथि 16 सितंबर को पीठ के समक्ष स्वयं हाजिर होने का निर्देश दिया.

पीठ ने कहा, ‘राशन (पीडीएस) की दुकान इतनी दूर है कि गरीब वहां पहुंच ही नहीं पाता है. स्कूल में पीने का शुद्ध पानी नहीं है. गांव में चिकित्सा की सुविधा नहीं है. आठ किलोमीटर की दूरी पर स्कूल हैं. बच्चों के बदन पर कपड़े नहीं हैं. ऐसा लग रहा है हम आदिम युग में जी रहे हैं.’

पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि गांव के लोगों को जंगल से सूखी लकड़ी बाजार में बेचकर जीवनयापन करना पड़ रहा है, जबकि ऐसे लोगों के लिए केंद्र की कई योजनाएं हैं, जिन्हें उन तक पहुंचाना राज्य सरकार का काम है.

पीठ ने सवाल करते हुए कहा कि इसके जिम्मेदार सीओ और बीडीओ क्या कर रहे हैं?

अदालत ने कहा, ‘सरकार के सिर्फ आंख मूंद लेने से कुछ नहीं होगा. आप रटते रहें कि हम कल्याणकारी राज्य हैं, जबकि हकीकत यही है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज पर चल रही हैं. धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है. सरकार को इस पर सोचना होगा.’

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया, ‘भूख से राज्य में किसी की मौत नहीं हुई है.’

सरकार की ओर से कहा गया कि मौत की वजह बीमारी है और मौत की सूचना आने के बाद प्रशासन की टीम मृतक के घर गई थी, मृतक के घर में अनाज मिला था. राज्य में भूख से एक भी मौत नहीं हुई है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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