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केरल: कैथोलिक चर्च और भाजपा ने बिशप के ‘नारकोटिक जिहाद’ संबंधी बयान का बचाव किया

बिशप जोसेफ कल्लारंगत ने हाल में कहा था कि केरल में ईसाई लड़कियां लव और नारकोटिक जिहाद का शिकार हो रही हैं. भाजपा ने माकपा और कांग्रेस पर जिहादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है. वहीं, माकपा और कांग्रेस ने ईसाई-मुस्लिम सद्भावना को नष्ट करने की कथित ‘संघ परिवार के एजेंडे’ को लेकर चेतावनी दी है.

पाला के बिशप जोसेफ कल्लारंगत. (फोटो: फेसबुक)

तिरुवनंतपुरम/कोच्चि: पाला ईसाई धर्म प्रदेश (डायसीस) के बिशप जोसेफ कल्लारंगत की विवादित ‘लव और नारकोटिक (मादक पदार्थ) जिहाद’ टिप्पणी पर केरल में सियासी जंग जारी है. जहां एक ओर भाजपा ने माकपा और कांग्रेस पर जिहादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है. वहीं, माकपा और कांग्रेस ने राज्य में ईसाई-मुस्लिम सद्भावना को नष्ट करने की कथित ‘संघ परिवार के एजेंडे’ को लेकर चेतावनी दी है.

साइरो-मालाबार चर्च से संबंधित बिशप जोसेफ कल्लारंगत ने बीते नौ सितंबर कहा था कि केरल में ईसाई लड़कियां ‘लव और नारकोटिक जिहाद’ का शिकार बन रही हैं तथा जहां भी हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वहां दूसरे धर्मों के युवाओं को बर्बाद करने के लिए चरमपंथी ऐसे तरीके अपना रहे हैं.

बिशप ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ के तहत गैर मुस्लिम, विशेषकर ईसाई समुदाय की लड़कियों को बड़े स्तर पर प्रेम संबंध में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और आतंकवाद जैसे कृत्यों के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

इस बीच टिप्पणी पर बढ़ते विवाद को देखते हुए पाला ईसाई धर्म प्रदेश (डायसीस) ने सफाई दी और कहा है कि बिशप की मंशा अपनी टिप्पणी से किसी की भावना को आहत करने की नहीं थी और यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं थी. बता दें कि इस संगठन में साइरो-मालाबार चर्च का प्रभुत्व है.

डायसीस के ऑक्सलरी बिशप मार जैकब मुरिकेन ने एक बयान में कहा, ‘वह केवल समाज पर बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दे रहे थे.’

उन्होंने सभी समुदायों से आह्वान किया कि वे उन कट्टरपंथियों की गतिविधियों को गंभीरता से लें जो कट्टरता और समाज विरोधी गतिविधियों के लिए धार्मिक नाम और प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं. डायसीस ने सभी भ्रामक दुष्प्रचार से निपटने के लिए मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वहीं कैथोलिक संगठन चर्च के मुखपत्र दीपिका और कई साथी बिशप ने शनिवार को उनके बयान का समर्थन किया.

केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि बिशप के शब्द किसी समुदाय के लिए नहीं थे और वह समुदाय की चिंताओं को साझा कर रहे थे. इसे विवादास्पद नहीं बनाया जाना चाहिए, इसके बजाय गंभीरता से बहस की जानी चाहिए.

केसीबीसी ने कहा कि सरकार को नारकोटिक माफिया की जांच के लिए तैयार रहना चाहिए और सभी समुदायों को इस खतरे के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ना चाहिए.

इस बीच, पलाई स्थित बिशप के आवास पर मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों द्वारा एक प्रोटेस्ट मार्च निकालने के बाद विभिन्न कैथोलिक समूहों ने उनका समर्थन करते हुए उनके घर तक एक रैली निकाली.

बिशप की आलोचना करने पर राज्य में सत्तारूढ़ माकपा और विपक्षी कांग्रेस की निंदा करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने कहा कि राज्य की मुख्यधारा की पार्टियों को ‘कड़वा सच’ कहने वालों पर हमला करने और उन्हें चुप कराने की परिपाटी रोकनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि मार्क्सवादी पार्टी और कांग्रेस के जो नेता बिशप के बयान का विरोध कर रहे हैं, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे आईएसआईएस (आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट) और जिहादियों के प्रवक्ता हैं.

केंद्रीय मंत्री ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘जो लोग कैथोलिक धार्मिक नेता पर केरल में इस्लामिक स्टेट का एजेंट मौजूद होने की टिप्पणी करने के लिए हमला कर रहे हैं, वास्तव में वे गैर मुस्लिमों का अस्तित्व मिटाने की जिहादियों की विचारधारा को प्रायोजित कर रहे हैं.’

कल्लारंगत का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि बिशप ने किसी विशेष समुदाय पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि धर्म के भीतर मौजूद कट्टरपंथियों के खिलाफ रुख लिया.

मुरलीधरन ने कहा,‘ सर्वज्ञात तथ्य है कि मादक पदार्थों की तस्करी इस्लामिक स्टेट सहित दुनिया के कई आतंकवादी समूहों के आय का मुख्य स्रोत है. उसकी मौजूदगी केरल में होने की बात करने में क्या गलत है?’ उन्होंने मुस्लिम समुदाय से आह्वान किया कि घोषित करें कि वे जिहादियों के साथ नहीं हैं.

भाजपा नेता ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की भी उनके बयान के लिए निंदा की, जिसमें कहा गया था कि पहली बार वह ‘नारकोटिक जिहाद’ के बारे में सुन रहे है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को और गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है.

हालांकि, केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने ईसाई और मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे भड़काऊ बयान देने से बचें. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाला बिशप के बयान को लेकर फर्जी अकाउंट से दोनों धार्मिक समुदायों में संघर्ष भड़काने की कोशिश की जा रही है.

कोच्चि में संवाददाताओं से बातचीत में सतीशन ने कहा, ‘इनमें से कई हैंडल (अकाउंट) संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के हैं. ईसाई और मुस्लिम समुदायों को संघ के एजेंडे के जाल में नहीं फंसना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिशप के घर के सामने उनके बयान के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं और इसका भी विरोध किया जाना चाहिए.

कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की कि वह बिशप की शिकायत को गंभीरता से ले और जांच के बाद मामले को सुलझाए.

बिशप के बयान को लेकर शुरू हुई सियासी लड़ाई के बीच मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि जो लोग जिम्मेदार पदों पर हैं, उन्हें समाज में विभाजन पैदा करने वाले बयानों से बचना चाहिए.

मुख्यमंत्री विजयन ने कहा था कि नारकोटिक (मादक पदार्थ) की समस्या का कोई धार्मिक पहलू नहीं है. इसका कोई पहलू है तो वो है समाज-विरोधी. कोई भी धर्म ड्रग्स की बिक्री और इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देता.

कांग्रेस ने कहा था कि बिशप से अपनी सीमा लांघी है. वहीं भाजपा ने उनका समर्थन किया और समाज से उनके बयान पर चर्चा करने का आह्वान किया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)