उत्तर प्रदेश: दलित बच्चों के साथ भेदभाव के मामले में प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी ज़िले के संग्रामपुर विकासखंड के बनपुरवा सरकारी स्कूल का है. भोजन परोसने के दौरान कथित तौर पर दलित बच्चों की अलग पंक्ति बनाने के आरोप में स्कूल की प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. जांच के बाद उन्हें निलंबित भी कर दिया गया है.

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(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी ज़िले के संग्रामपुर विकासखंड के बनपुरवा सरकारी स्कूल का है. भोजन परोसने के दौरान कथित तौर पर दलित बच्चों की अलग पंक्ति बनाने के आरोप में स्कूल की प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. जांच के बाद उन्हें निलंबित भी कर दिया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

अमेठी: उत्तर प्रदेश में मैनपुरी के शासकीय विद्यालय में दलित बच्चों के साथ भेदभाव का मामला सामने आने के बाद ऐसी ही एक सूचना अमेठी जिले से आई है.

जिले के विकासखंड संग्रामपुर की ग्राम पंचायत गडेरी के प्राथमिक विद्यालय बनपुरवा की प्रिंसिपल कुसुम सोनी द्वारा विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भोजन परोसने के दौरान कथित तौर पर दलित बच्चों की अलग पंक्ति बनाने, सामाजिक भेदभाव करने की शिकायत पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

जिलाधिकारी अमेठी अरुण कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर तत्काल प्रकरण की जांच करने तथा प्रिंसिपल के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए गए.

उन्होंने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा उक्त प्रकरण की जांच की गई तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रिंसिपल को तत्काल निलंबित कर दिया गया.

जिलाधिकारी ने बताया कि संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ संग्रामपुर थाने में मामला दर्ज किया गया है.

मालूम हो कि हाल ही में मैनपुरी जिले के एक सरकारी स्कूल में दलित बच्चों से भेदभाव का मामला सामने आया था. मैनपुरी में बेवर ब्लॉक के दौदापुर शासकीय प्राथमिक विद्यालय में अनुसूचित जाति के बच्चों को मिड-डे मील के लिए इस्तेमाल की गई थाली को खुद ही धुलकर रसोईघर में अलग रखना पड़ रहा था.

इस मामले में प्रिंसिपल गरिमा राजपूत को 24 सितंबर को निलंबित कर दिया गया था. दो रसोइयों को भी काम पर से हटा दिया गया, क्योंकि उन्होंने कहा था कि वे अनुसूचित जाति के छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों को ‘छू नहीं सकते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)