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सिद्दीक़ कप्पन की गिरफ़्तारी का एक साल पूरा होने पर पत्रकारों ने की रिहाई की मांग, प्रदर्शन

5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न पत्रकार संघों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप मनमाने हैं.

पत्रकारों ने सिद्दीक कप्पन की गिरफ़्तारी के विरोध में दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन किया. (फोटो: डीयूजे)

नई दिल्ली: केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न पत्रकार संघों के सदस्यों ने मंगलवार को यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) के बाहर प्रदर्शन किया.

पीसीआई अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा ने कहा, ‘आज हमने इस कार्यक्रम का आयोजन कप्पन के जेल में रहने के एक साल पूरे होने पर किया है. उन्हें मौके पर जाने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था. आज तक वह सलाखों के पीछे हैं. हम स्वतंत्र मीडिया के लिए लड़ रहे हैं. इस पर कोई अंकुश नहीं होना चाहिए. अगर कोई रिपोर्टिंग के लिए मौके पर जा रहा है तो मीडिया पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘खोजी पत्रकारिता दिन-ब-दिन खत्म हो रही है. हम देश की सर्वोच्च न्यायपालिका से कप्पन को रिहा करने और उनके खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने की अपील कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि यूएपीए और अन्य कानूनों के तहत कप्पन के खिलाफ आरोप मनमाना थे. पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था और अनिवार्य 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में असमर्थ थी. इसके बावजूद कप्पन को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (केयूडब्ल्यूजे), पीसीआई और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (डीयूजे) के तत्वावधान में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में अनेक पत्रकार शामिल हुए.

मालूम हो कि कप्पन और तीन अन्य को पिछले साल 5 अक्टूबर को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब ये लोग हाथरस में एक युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उसके गांव जा रहे थे.

उनकी गिरफ्तारी के दो दिन बाद यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह और यूएपीए के तहत विभिन्न आरोपों में अन्य मामला दर्ज किया था.

यूएपीए के तहत दर्ज मामले में आरोप लगाया गया था कि कप्पन और उनके सह-यात्री हाथरस सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले के मद्देनजर सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे. कप्पन न्यायिक हिरासत में है.

बाद में मथुरा की स्थानीय अदालत ने केरल के कप्पन और तीन अन्य लोगों को शांति भंग करने के आरोप से बीते 15 जून को मुक्त कर दिया था, क्योंकि पुलिस इस मामले की जांच तय छह महीने में पूरी नहीं कर पाई. बीते जुलाई महीने में एक निचली अदालत ने कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

डीयूजे की महासचिव सुजाता मधोक ने कहा, ‘हम आज यहां इसलिए एकत्रित हुए हैं क्योंकि कप्पन और उनके साथ गए अन्य लोगों को जेल में बंद हुए एक साल हो गया है. न्यायपालिका को कदम उठाना करनी चाहिए. आप लोगों को अनिश्चित काल के लिए जेल में नहीं रख सकते.’

सुजाता मधोक ने विनोद दुआ के मामले का हवाला देते हुए कहा कि मामले जानबूझकर दूर के शहरों में दर्ज किए जाते हैं और पुलिस अन्य राज्यों से दिल्ली के पत्रकारों को गिरफ्तार करने के लिए आती है.

उन्होंने कहा कि ट्वीट और रीट्वीट के लिए भी मामले दर्ज किए जाते हैं, जैसा कि पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे और अन्य के साथ हुआ.

मधोक ने यह भी कहा कि पत्रकार सुप्रिया शर्मा के खिलाफ केवल वाराणसी के पास एक गांव में भूख पर स्टोरी करने के लिए मामला दर्ज किया गया था. नेहा दीक्षित के खिलाफ बाल तस्करी पर स्टोरी करने के लिए कई मामले दर्ज हैं, राना अय्यूब के खिलाफ कोविड 19 लॉकडाउन के दौरान राशन वितरण को लेकर मामले दर्ज हैं.

डीयूजे के जिगीश एएम ने कहा कि कप्पन गंभीर रूप से मधुमेह के रोगी हैं, उन्हें जेल में रहने के दौरान दो बार कोविड ​​​​-19 हो चुका है और उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति ज्ञात नहीं है.

उन्होंने कहा कि विरोध कर रहे किसानों और श्रमिकों ने भी कप्पन के लिए न्याय की लड़ाई में पत्रकारों के साथ एकजुटता व्यक्त की थी.

केयूडब्ल्यूजे के बीनू बेसिल, जो कप्पन की अदालतों में कानूनी लड़ाई में सहायता कर रहे हैं, ने कप्पन की तत्काल रिहाई और उसके खिलाफ झूठे मामलों को वापस लेने का आग्रह किया.

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने आरोप लगाया कि चारों आरोपियों के खिलाफ दर्ज आरोप मनगढ़ंत हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं इन लोगों के साथ एकजुटता के लिए साथ आया हूं, जिन्हें हाथरस जाने के दौरान गिरफ्तार किया गया था और पूरी तरह से मनगढ़ंत तरीके से बहुत ही अन्यायपूर्ण तरीके से आरोप लगाया गया था. वे एक साल से जेलों में बंद हैं. उन्हें जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि हम जल्द सुनवाई नहीं देख रहे हैं.’

कप्पन के साथ गिरफ्तार किए गए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के अतीकुर्रहमान के परिवार के सदस्य और दोस्त भी चारों की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.

रहमान की पत्नी संजीदा रहमान ने कहा कि उनके पति को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘उनकी हालत ठीक नहीं है. उन्हें चिकित्सकीय सहायता के लिए एम्स जाना है. मेरे बच्चे मुझसे पूछते हैं कि हमारे पिता कहां हैं? मैं उनसे क्या कह सकती हूं? कृपया मुझे न्याय दिलाने और उसे जेल से रिहा करने में मदद करें.’

राज्यसभा सांसद एल. हनुमंतैया ने कहा, ‘मैं यहां बेंगलुरु से उन लोगों के समर्थन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने आया हूं, जो देशद्रोह के मामलों में गिरफ्तार किए गए हैं और एक साल बाद भी बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं. मैं चाहता हूं कि सभी लोगों जमानत दी जाए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)