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हरियाणा: गुड़गांव में लगातार चौथे हफ़्ते खुले में नमाज़ का विरोध

हरियाणा के गुड़गांव सेक्टर 47 में 15 अक्टूबर को खुले में नमाज़ अदा करने वाले मुस्लिमों का कुछ लोगों ने विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस को इलाके की घेराबंदी करनी पड़ी. यह लगातार चौथा हफ़्ता है, जब क्षेत्र में जुमे की नमाज़ को निशाना बनाया गया. साल 2018 में भी गुड़गांव में खुले में नमाज़ अदा कर रहे मुस्लिमों पर हमले हुए थे.

गुड़गांव में खुले में नमाज का विरोध करते स्थानीय लोग (फोटो साभारः ट्विटर)

नई दिल्लीः हरियाणा के गुड़गांव शहर के सेक्टर-47 में 15 अक्टूबर को खुले में नमाज अदा करने वाले मुस्लिमों का कुछ लोगों ने विरोध किया. इन लोगों ने नमाज स्थल पर पहुंचने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस को इलाके की घेराबंदी करनी पड़ी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगातार चौथा हफ्ता है, जब क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज को निशाना बनाया गया.

खुले में नमाज के विरोधस्वरूप 15 अक्टूबर को दोपहर 12:40 बजे 70 से 80 लोगों ने उस स्थान की ओर जाने का प्रयास किया, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हुए थे.

इन प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक स्थानों और सरकारी जमीनों पर नमाज अदा करने से नहीं रोकने के लिए सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की.

बता दें कि गुड़गांव का सेक्टर 47 उन 37 निर्धारित स्थानों की सूची में शामिल है, जहां खुले में नमाज अदा की जा सकती है.

मालूम हो कि 2018 में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच इसी तरह के गतिरोध को लेकर हुए समझौते के बाद खुले में नमाज अदा करने के लिए स्थानों की सूची बनाई गई थी.

हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि इस तरह की व्यवस्था स्थायी नहीं थी.

पुलिस ने शुक्रवार (15 अक्टूबर) को गतिरोध को भांपते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों से दोनों समुदायों के बीच किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए उन्हें सुभाष चौक की तरफ से नमाज स्थल पर पहुंचने को कहा था.

एसीपी सदर अमन यादव ने कहा, ‘नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की जा रही थी. बीते हफ्ते हमने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की और हम इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं.’

बीते तीन सालों से नमाज स्थल पर आकर नमाज अदा कर रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों के मुताबिक, ये विवाद उन कुछ लोगों की वजह से हुआ है, जो नमाज में व्यवधान पैदा कर राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं.

शुरुआती कुछ हफ्तों में विरोध को देखते हुए पुलिस ने उन्हें (मुस्लिमों) नमाज के मूल स्थान से 100 मीटर दूर जाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं माने.

गुड़गांव के सेक्टर 47 में नियमित तौर पर नमाज अदा करने आ रहे तौफीक ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘बीते कुछ हफ्तों से ही यह मुद्दा बना है. कुछ लोग इससे राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं और इसलिए वे हंगामा कर रहे हैं.’

नमाज विरोधी अभियान के पीछे हिंदुत्ववादी संगठन

द वायर  ने पहले भी बताया है कि हिंदुत्ववादी संगठन ‘भारत माता वाहिनी’ के एक नेता दिनेश भारती इन विरोधों के केंद्र में हैं. उन्हें जुमे की नमाज में बाधा डालने के लिए पहले भी गिरफ्तार किया गया था.

भारती ने कहा था, ‘यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है. वे लव जिहाद, भूमि जिहाद की साजिश के तहत नमाज अदा कर रहे हैं. अगर हमने अपनी आवाज नहीं उठाई तो वे यहां मस्जिद बनाएंगे.’

बीते 24 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने अपने फॉलोअर्स से खुले में नमाज अदा कर रहे मुस्लिमों को तितर-बितर करने को कहा था.

इस वीडियो में वह कह कह रहे थे, ‘अगर सरकार ने इसे नहीं रोका तो हम यहां गोशाला या गुरुकुल खोलेंगे और यहां हनुमान मंदिर बनाएंगे.’

29 सितंबर को एक और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक स्थानीय नागरिक को सरकारी जमीन पर जुमे की नमाज अदा कर रहे मुस्लिमों का विरोध करते देखा जा सकता था.

इस वीडियो में शख्स ने कहा कि स्थानीय स्तर पर मुस्लिमों की मौजूदगी की वजह से महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं.

द वायर ने एक रिपोर्ट में बताया था, आठ अक्टूबर 2021 तक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. दर्जनभर लोग हाथों में प्लेकार्ड लेकर और नारेबाजी कर जुमे की नमाज का विरोध किया. तभी से दक्षिणपंथी समूह लगातार इस मुद्दे को तूल दे रहा है.

मालूम हो कि 2018 में गुड़गांव में खुले में नमाज अदा कर रहे मुस्लिमों पर लगातार हमले हुए थे. कुछ लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा कर रहे मुस्लिमों पर हमला किया था और उनसे कथित तौर पर जय श्रीराम के नारे लगवाए थे.

इस हमले के बाद यति नरसिंहानंद जैसे हिंदुत्ववादी नेताओं ने हरियाणा में मुस्लिम युवकों के खिलाफ भूमि जिहाद के आरोप भी लगाए गए थे. खुले स्थानों पर नमाज को राज्य की मंजूरी बताते हुए नरसिंहानंद ने कहा था, ‘यह गुड़गांव को नष्ट करने की साजिश है, क्योंकि यह एक नया आर्थिक केंद्र है.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)