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मणिपुरः ड्रग्स मामले के आरोपी के बरी होने पर पदक लौटाने वाली अधिकारी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी

मणिपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टी. बृंदा ने 2018 के ड्रग्स मामले के एक मुख्य आरोपी लुखाउसी जू को अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद राज्य के पुलिस वीरता पदक को लौटा दिया था. उन्होंने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर लुखाउसी को बचाने का आरोप लगाया था. वे राज्य के नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ बॉर्डर ब्यूरो की पहली अधिकारी थीं, जिन्हें राज्य वीरता पुरस्कार दिया गया था.

टी. बृंदा. (फोटो साभार: फेसबुक)

इम्फालः मणिपुर की पुलिस अधिकारी थोउनाओजम बृंदा (टी. बृंदा) का कहना है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव इम्फाल के यास्कुल निर्वाचन क्षेत्र से लड़ेंगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि उन्होंने अभी यह घोषणा नहीं की है कि वह किस पार्टी में शामिल हो रही हैं. ऐसी अफवाहें हैं कि वह भाजपा में शामिल हो सकती हैं.

बृंदा ने कहा कि उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को बदलने के लिए राजनीति में जाने का फैसला किया है.

बृंदा ने कहा, ‘मैं लगातार हो रहे राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से सही तरीके से अपना काम नहीं कर पा रही हूं मेरा विजन युवाओं और गरीब लोगों के लिए काम कर उनका उत्थान करना है.’

गौरतलब है कि बृंदा ने अभी तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है. मालूम हो कि रविवार को बृंदा के समर्थन में एक चुनावी रैली को पुलिस द्वारा रोकने के बाद यास्कुल में उनके आवास के पास झड़प हुई थी.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि रैली के लिए मिली आवश्यक मंजूरी के कागजात दिखाने में असफल रहने पर यह हुआ.

बता दें कि वह राज्य के नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ बॉर्डर ब्यूरो (एनएबी) की पहली अधिकारी थीं, जिन्हें राज्य वीरता पुरस्कार दिया गया था.

सीमावर्ती राज्य में ड्रग्स की तस्करी और बिक्री के खिलाफ उनके निरंतर प्रयास के लिए अगस्त 2018 में भाजपा शासित राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया था और उन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर भी पदोन्नत किया गया था.

हालांकि, 2018 के हाईप्रोफाइल ड्रग्स मामले में एडीसी के पूर्व अध्यक्ष चंदेल लुखाउसी जू को मणिपुर की विशेष नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) अदालत द्वारा बरी करने के बाद विरोधस्वरूप बृंदा ने यह वीरता पदक लौटा दिया था.

बृंदा द्वारा 18 दिसंबर को राज्य पुलिस का वीरता पुरस्कार वापस किए जाने से एक दिन पहले इम्फाल में विशेष नारकोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएसए) अदालत ने उस शख्स (चंदेल ऑटोनॉमस जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष लुखाउसी जू) को रिहा कर दिया, जिसे बचाने का आरोप उन्होंने मुख्यमंत्री पर लगाया था.

जब उन्होंने चंदेल में लुखाउसी जू को 20 जून, 2018 को उनके आधिकारिक आवास पर छह अन्य लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में 27 करोड़ रुपये की कीमत के ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था, तब वह भाजपा के सदस्य थे.

हालांकि, इस मामले के संबंध में बृंदा ने मणिपुर हाईकोर्ट में दाखिल किए गए 16 पेज के हलफनामे का हिस्सा रहे दस्तावेजों में कहा था कि खासतौर पर लुखाउसी को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया था.

राज्य पुलिस द्वारा चार्जशीट दायर किए जाने के चार दिन बाद लुखाउसी को एनडीपीएस अदालत ने जमानत दे दी, जिसके बाद वह फरार हो गया. हालांकि, पिछले साल फरवरी में उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन एनडीपीएसए अदालत ने 21 मई को फिर से जमानत दे दी.