राजनीति

कश्मीर गए बाहर के लोगों को जान-बूझकर निशाना बनाया जाना चिंता का विषय: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जम्मू कश्मीर में बिहार के मज़दूरों की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि हमें भरोसा है कि प्रशासन बिहार के लोगों की सुरक्षा का इंतज़ाम करेगा, ताकि आतंकी इस तरह की घटना को अंजाम न दे सके. बीते 17 अक्टूबर को आतंकवादियों ने बिहार के दो मज़दूरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस महीने आतंकियों द्वारा नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar speaks to the media during Lok Samvad programme, in Patna, Monday, Jan. 7, 2019. (PTI Photo) (PTI1_7_2019_000059B)

नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जम्मू कश्मीर में बिहार के मजदूरों की हत्या की निंदा करते हुए सोमवार को कहा कि निशाना बनाकर हाल में की गईं हत्या की वारदातों से निश्चित रूप से वहां डर का माहौल कायम हुआ है.

जनता दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा बिहार के मजदूरों की हत्या को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमार ने कहा, ‘हम लोग काफी दुखी हैं.’

मुख्यमंत्री बीते 17 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर में बिहार के मजदूरों के साथ तीसरी आतंकवादी घटना का जिक्र कर रहे थे जिसमें दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है और एक घायल मजदूर का इलाज अस्पताल में चल रहा है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी बिहार के दो मजदूरों की हत्या कर दी गई थी.

कुमार ने कहा कि कल (17 अक्टूबर) शाम को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात की और और हत्या पर अपनी गंभीर चिंता जताई और कहा, ‘बिहार के मजदूरों के साथ यह तीसरी घटना है, इसको लेकर हम लोग काफी चिंतित हैं.’

उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन इसको लेकर पूरी तरह से गंभीर है, घटना के दोषियों पर कार्रवाई होगी.

उन्होंने कहा कि काम के सिलसिले में कश्मीर गए बाहर के लोगों को जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है.

कुमार ने कहा, ‘इस तरह की घटना को लेकर बिहार सरकार पूरी तरह से अलर्ट है और जम्मू कश्मीर के प्रशासन को भी हमने अलर्ट कर दिया है. हमने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ भी इस घटना को लेकर चर्चा की है.’

कुमार ने कहा, ‘हमें भरोसा है कि जम्मू कश्मीर प्रशासन बिहार के लोगों की सुरक्षा का इंतजाम करेगा ताकि आतंकी इस तरह की घटना को अंजाम न दे सके.’

उन्होंने कहा, ‘मृतकों के आश्रितों को बिहार सरकार की ओर से हरसंभव मदद की जाएगी. मजदूरों के पार्थिव शरीर को बिहार लाने का इंतजाम किया जा रहा है. इसको लेकर बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी जम्मू कश्मीर के अधिकारियों के निरंतर संपर्क में हैं.’

उन्होंने कहा, ‘बाहर से बिहार लौटे लोगों ने पश्चिमी चंपारण में काफी अच्छा काम शुरू किया था. हम तो चाहते हैं कि बिहार के लोग यहीं रहकर काम करें, लेकिन हर किसी को कहीं भी जाकर काम करने की स्वतंत्रता है. किसी भी प्रदेश का आदमी किसी दूसरे प्रदेश में जाकर काम कर सकता है, ये उसका अधिकार है.’

नीतीश ने कहा, ‘हमारा शुरू से प्रयास रहा है कि कोई मजबूरी में बिहार से बाहर न जाए, अगर अपनी इच्छा से कोई जाना चाहता है तो यह अलग बात है.’

उन्होंने कहा कि लोगों के रोजगार को लेकर बिहार में कई प्रकार के प्रबंध किए गए हैं. केंद्र सरकार ने भी इसमें सहयोग किया है.

आतंकवादियों के द्वारा बाहर के लोगों को कश्मीर छोड़ देने का अल्टीमेटम दिए जाने के सवाल पर कुमार ने कहा, ‘ऐसा अल्टीमेटम देने का किसी को भी अधिकार नहीं है. पूरा देश एक है. जम्मू कश्मीर भी देश का अंग है. ऐसे अल्टीमेटम देने वाले आतंकवादियों के खिलाफ जम्मू कश्मीर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी, ताकि आगे से ऐसा काम कोई नहीं कर पाए.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बीते 17 अक्टूबर को हुईं दो हत्याओं के बाद सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने सोमवार की सुबह कश्मीर छोड़ दिया. उनमें से कई को रविवार के हमले के तुरंत बाद जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा सुरक्षित आवास में रखा गया था.

नीतीश कुमार ने आतंकवादियों द्वारा मारे गए बिहार के मजदूरों के परिजनों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की और आशा व्यक्त की कि प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा.

बता दें कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में बीते 17 अक्टूबर को आतंकवादियों ने बिहार के दो मजदूरों की उनके किराये के मकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी और एक अन्य को घायल कर दिया था.

मृतकों की पहचान राजा ऋषिदेव और योगेंद्र ऋषिदेव के रूप में हुई थी. वहीं एक अन्य व्यक्ति चुनचुन ऋषिदेव गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

जम्मू कश्मीर में 24 घंटे से भी कम समय में गैर-स्थानीय मजदूरों पर यह तीसरा हमला था. बिहार के एक रेहड़ी-पटरी वाले और उत्तर प्रदेश के एक बढ़ई की बीते 16 अक्टूबर को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इस महीने अब तक नागरिकों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी में 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें से 10 आतंकियों द्वारा और एक व्यक्ति की ‘कथित गलती से’ सीआरपीएफ की गोली से मौत हुई है.

जम्मू कश्मीर में बीते हफ्ते छह दिनों में सात नागरिकों की हत्या हुई है, जिनमें से छह श्रीनगर में हुईं. मृतकों में से चार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.

बीते सात अक्टूबर को श्रीनगर में प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की हत्या कर दी गई.

इससे पहले बीते पांच अक्टूबर को आतंकियों ने कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रसिद्ध केमिस्ट माखन लाल बिंद्रू, बिहार के निवासी विक्रेता वीरेंद्र पासवान और बांदीपोरा में एक टैक्सी स्टैंड एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद शफी लोन की हत्या कर दी थी.

इनके अलावा बीते दो अक्टूबर को श्रीनगर में माजिद अहमद गोजरी और बटमालू में मोहम्मद शफी डार की भी हत्या आतंकियों द्वारा कर दी गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)