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त्रिपुरा: अभिषेक बनर्जी के दौरे से पहले टीएमसी नेता हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ़्तार

तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की युवा शाखा की सचिव सायानी घोष को पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के दौरे से पहले हिरासत में लेने के बाद गिरफ़्तार किया गया. टीएमसी का कहना है कि राज्य में आगामी निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है.

पश्चिम बंगाल इकाई की युवा शाखा की सचिव सायानी घोष. (फोटो साभार: ट्विटर/@sayani06)

अगरतला/नई दिल्ली: त्रिपुरा पुलिस ने रविवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की नेता सायानी घोष को हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया. एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि घोष पर शनिवार रात को मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब की एक नुक्कड़ सभा के दौरान उन्हें धमकी देने का आरोप है.

तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की युवा शाखा की सचिव सायानी घोष को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के दौरे से 24 घंटे पहले हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार किया गया. घोष को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था.

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर) रमेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों के आरोप में सायानी घोष के खिलाफ भादंसं की धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 153ए (दो समूहों के बीच वैमन्स्य को बढ़ावा देना) के तहत गिरफ्तार किया गया है.

यादव ने कहा कि घोष और उनके साथ पहुंचे कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री की सभा के दौरान कथित तौर पर पथराव किया.

एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि भाजपा के एक कार्यकर्ता ने घोष पर शनिवार रात को मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब की एक नुक्कड़ सभा को बाधित करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि घोष ने बैठक स्थल पर पहुंचकर ‘खेला होबे’ के नारे लगाए.

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्वी अगरतला महिला पुलिस थाने के बाहर उनके कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा समर्थकों ने धक्का-मुक्की की. हालांकि, भाजपा ने आरोप को खारिज किया है.

बनर्जी ने ट्वीट कर त्रिपुरा की भाजपा सरकार पर राजनीतिक दलों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों पर उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया.

बनर्जी ने रविवार सुबह को किए गए कथित हमले का वीडियो ट्विटर पर साझा किया और मुख्यमंत्री बिप्लब देब पर निशाना साधते हुए कहा, ‘वह हमारे समर्थकों और महिला उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय हमला करने के लिए लगातार गुंडे भेज रहे हैं. त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा लोकतंत्र का मजाक बना रही है.’

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में त्रिपुरा पुलिस को निर्देश दिया था कि वह यह सुनिश्चित करे कि किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाए.

पुलिस ने कहा कि घोष से पूछताछ के दौरान थाने के बाहर एकत्र लोगों के समूह पर कुछ अज्ञात उपद्रवियों ने हमला किया. हालांकि, हमले में किसी को चोट नहीं आयी.

तृणमूल कांग्रेस की नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देब ने पत्रकारों से कहा, ‘हमारे उम्मीदवारों को पीटा गया, उनके घरों में तोड़-फोड़ की गई और शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई. पुलिस यहां एकतरफा तरीके से काम कर रही है.’

तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा, ‘त्रिपुरा में जिस तरह का लोकतंत्र है तो हम अपने नेताओं से पश्चिम बंगाल में (भाजपा के साथ) भी ऐसा ही करने को कहेंगे.’

वहीं, भाजपा की त्रिपुरा इकाई के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कभी भी तृणमूल कांग्रेस के किसी समर्थक पर हमला नहीं किया, क्योंकि पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती.

द क्विंट के मुताबिक, सोशल मीडिया सामने आए घटना के एक वीडियो में घोष को एक कार से ‘खेला होबे’ ​​कहते हुए देखा जा सकता है जब वह एक सभा को पार कर रहीं थीं, जिसे कथित तौर पर बिप्लब देब द्वारा संबोधित किया जा रहा था.

इससे पहले उपमंडल पुलिस अधिकारी, सदर, रमेश यादव ने कहा कि भाजपा और टीएमसी दोनों को शहर में बढ़ते तनाव को देखते हुए सोमवार, 22 नवंबर को अगरतला में रैलियां करने की अनुमति नहीं दी गई है.

उन्होंने कहा, ‘अगरतला में भाजपा या टीएमसी को रोड शो/रैली की अनुमति नहीं है. दोनों को नुक्कड़ सभा की अनुमति दी गई है. टीएमसी ने हमें नुक्कड़ सभा आयोजित करने के समय की सूचना नहीं दी है.’

पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस घोष के साथ कार में सवार चार लोगों को भी गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है.

पुलिस ने पुष्टि की कि घोष वाहन नहीं चला रही थीं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उसने किसी की हत्या करने का प्रयास कैसे किया.

‘पुलिस की बर्बरता’ को लेकर टीएमसी के 16 सांसदों ने गृह मंत्रालय के बाहर धरना दिया

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, त्रिपुरा पुलिस द्वारा तृणमूल कांग्रेस नेता सायानी घोष को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद पार्टी सांसदों ने सोमवार को गृह मंत्रालय (एमएचए) भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और पूर्वोत्तर राज्य में पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया.

डेरेक ओ’ब्रायन, सुखेंदु शेखर रॉय, शांतनु सेन और माला रॉय सहित 16 टीएमसी सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की मांग को लेकर धरना दिया.

प्रतिनिधिमंडल ने 25 नवंबर को त्रिपुरा में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले टीएमसी सदस्यों को डराने के लिए भाजपा पर हमला किया.

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने विरोध के दौरान कहा, ‘लोकतंत्र पर यह हमला पिछले चार महीनों से चल रहा है. भाजपा चाहती है कि गुंडों और पुलिस की मदद से टीएमसी के कार्यक्रम बंद हो जाएं, लेकिन हम लड़ाई जारी रखेंगे. वे डरते हैं कि त्रिपुरा उनके पैरों के नीचे से जमीन फिसल रहा है.’

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट तृणमूल कांग्रेस सदस्यों की उस याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है जिसमें त्रिपुरा में भाजपा द्वारा उनकी पार्टी के सहयोगियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है.

अदालत त्रिपुरा सरकार के खिलाफ़ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी की उस याचिका पर 23 नवंबर को सुनवाई करने के लिए सहमति जताई, जिसमें आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले विपक्षी दलों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को रोकने में विफल रहने के लिए त्रिपुरा सरकार और अन्य के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की जाएगी.

इससे पहले, टीएमसी की तरफ से पेश अधिवक्ता अमर दवे ने कहा कि न्यायालय के 11 नवंबर के आदेश के बावजूद राज्य में स्थिति बिगड़ती जा रही है.

उन्होंने कहा, ‘रविवार को एक घटना हुई थी. राज्य में स्थिति बहुत अस्थिर है और यह बद से बदतर होती चली गई है. स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही है.’

उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं और उनके सदस्यों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए अवमानना कार्रवाई की याचिका दायर की गई है.

पीठ के यह पूछने पर कि क्या याचिका दायर की गई है, दवे ने कहा कि यह दायर किए जाने की प्रक्रिया में है और एक बार सूची में दर्ज हो जाए, वह इसे अदालत को प्रदान करेंगे.

इसने कहा, ‘ठीक है, हम मंगलवार को इसपर सुनवाई करेंगे. एक बार याचिका सूची में दर्ज हो जाए, आप इसके ब्योरे कोर्ट मास्टर को दे दें.’

शीर्ष अदालत ने 11 नवंबर को त्रिपुरा सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए टीएमसी सहित किसा भी राजनीतिक दल को कानून के अनुसार चुनावी अधिकारों का इस्तेमाल करने और शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से प्रचार करने से नहीं रोका जाएगा.

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नगर निगम चुनावों में राजनीतिक भागीदारी के निर्बाध अधिकार के लिए कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया था.

इसने टीएमसी और उसकी राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों के खिलाफ व्यापक स्तर पर हिंसा का आरोप लगाते हुए सुरक्षा का अनुरोध किया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)