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आंध्र प्रदेश: तीन राजधानियां बनाने का क़ानून निरस्त, मुख्यमंत्री ने कहा- बेहतर विधेयक लाएंगे

जनवरी 2020 में विपक्ष के विरोध के बीच आंध्र प्रदेश विधानसभा ने विकेंद्रीकृत विकास के उद्देश्य का दावा करते हुए राज्य में तीन राजधानियां- विशाखापत्तनम, कर्नूल और अमरावती बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से यह विचार रखा गया, इसे लेकर ग़लतफ़हमी और क़ानूनी बाधाएं पैदा की गईं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी. (फोटो साभार: फेसबुक)

अमरावती: आंध्र प्रदेश में वाई एस जगन मोहन के नेतृत्व वाली सरकार ने विवादास्पद ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों के समावेशी विकास कानून, 2020’ को निरस्त करने के लिए सोमवार को विधानसभा में एक विधेयक पारित किया. साल 2020 के कानून का उद्देश्य राज्य के लिए तीन राजधानियां स्थापित करना था.

हालांकि, मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने विधानसभा को बताया कि उनकी सरकार विकेंद्रीकृत विकास के लिए एक ‘व्यापक, पूर्ण और बेहतर’ विकेंद्रीकरण विधेयक लाएगी.

उन्होंने दावा किया कि लोगों के व्यापक हितों की रक्षा के लिए 2020 के कानून को निरस्त किया गया है.

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में एक बार भी अमरावती का जिक्र नहीं किया और केवल इस क्षेत्र के रूप में इसका संदर्भ दिया.

जगन ने दावा किया, ‘पिछले डेढ़ से दो वर्षों में जब से हम विकेंद्रीकृत विकास (तीन राजधानियों की स्थापना) के विचार के साथ आए, इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, गलतफहमी पैदा की गई, कानूनी बाधाएं पैदा की गईं. पिछले दो वर्षों में यह तर्क देकर दुष्प्रचार किया गया कि इससे (तीन राजधानियों से) कुछ वर्ग के साथ अन्याय होगा.’

उन्होंने दावा किया कि चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार का राज्य की राजधानी इस क्षेत्र में स्थापित करने का निर्णय विवादास्पद था. जगन ने कहा, ‘उसने हर तरह से श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट का उल्लंघन किया. इसके बावजूद चंद्रबाबू ने यहां 50,000 एकड़ में राजधानी बनाने का फैसला किया.’

रक्षात्मक रुख अपनाते हुए जगन ने कहा कि उनका इस क्षेत्र के प्रति कोई विरोध नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मेरा यहां एक मकान है और मैं इस क्षेत्र से प्यार करता हूं.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से सड़क और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे को भी बनाने के लिए कम से कम एक लाख करोड़ रुपये की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘यह आज की दरों के अनुसार है. हमें नहीं पता कि एक लाख करोड़ रुपये जुटाने में दस साल या उससे अधिक समय लगता है और तब तक (विकास) लागत छह लाख करोड़ रुपये या सात लाख करोड़ रुपये हो सकती है.’

जगन ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘हम ऐसी स्थिति में हैं जहां हमारे पास सड़क, नाली बनाने या बिजली की आपूर्ति के लिए भी पैसा नहीं है. तो क्या यहां राजधानी नाम की काल्पनिक तस्वीर संभव है?’

मुख्यमंत्री ने कहा कि विशाखापत्तनम राज्य का सबसे बड़ा शहर है. उन्होंने कहा, ‘वहां सड़कें, जल निकासी की व्यवस्था, बिजली और सभी बुनियादी सुविधाएं हैं. अगर हम कुछ मूल्यवर्धन करते हैं तो विशाखापत्तनम पांच या दस वर्षों में हैदराबाद जैसे महानगरों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक प्रमुख शहर के रूप में विकसित होगा.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए, हम लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विशाखापत्तनम में कार्यकारी राजधानी, यहां (अमरावती) विधायी राजधानी और कुर्नूल में न्यायिक राजधानी स्थापित करना चाहते थे.’

जगन ने दावा किया कि 2019 के आम चुनाव परिणाम ‘केंद्रीकरण की प्रवृत्ति’ के लिए लोगों के विरोध को दर्शाते हैं.

इससे पहले, वित्त मंत्री बुगना राजेंद्रनाथ ने निरस्त करने वाला विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया.

मालूम हो कि जनवरी 2020 में विपक्ष के विरोध के बीच आंध्र प्रदेश विधानसभा ने विकेंद्रीकृत विकास करने के उद्देश्य से राज्य में तीन राजधानियां बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. ये तीन राजधानियां विशाखापत्तनम, कर्नूल और अमरावती थीं.

इस बीच, उच्च न्यायालय ने विकेंद्रीकरण कानून को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर सुनवाई अगले सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, महाधिवक्ता सुब्रह्मण्यम श्रीराम ने एक हलफनामे में सरकार के फैसले के बारे में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को सूचित किया था.

वाईएसआरसीपी के पास 175 सदस्यीय आंध्र विधानसभा में 151 का भारी बहुमत है, जिसमें टीडीपी 23 सीटों पर जीती है और एक सीट 2019 के चुनावों में जन सेना को मिली है.

सरकार बनाने के बाद वाईएसआरसीपी ने विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच अमरावती में राजधानी बनाने के पिछली सरकार के फैसले को उलटने का फैसला किया था.

सोमवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री रेड्डी ने अमरावती को चुनने के लिए पिछली सरकार को दोषी ठहराया और कहा कि इस स्थान पर सड़कों और जल निकासी जैसे बुनियादी ढांचे का अभाव है.

वहीं, टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने सोमवार को राज्य की राजधानी के लिए पिछली सरकार के दृष्टिकोण के बारे में झूठ और आधा सच फैलाने के लिए सरकार को दोषी ठहराया.

लोकेश ने आरोप लगाया कि जगन 2019 के चुनावों में अमरावती को विकसित करने के वादे के साथ आए थे और अब लोगों के साथ ‘दिमागी खेल’ खेल रहे हैं. प्रतिबद्धता या जिम्मेदारी की भावना के बिना अभिनय कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री राज्य की राजधानी और राज्य के समग्र विकास के लिए अपनी योजना पर स्पष्ट रुख नहीं बता पाए.

भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सोमू वीरराजू ने कहा कि सरकार ने उच्च न्यायालय के प्रतिकूल आदेशों के डर से कानूनों को निरस्त कर दिया है.

उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और विकेंद्रीकरण पर कोई भी निर्णय लेने से पहले जनता की राय लेने को कहा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)