राजनीति

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को निष्कासित किया

उत्तराखंड सरकार में वन और पर्यावरण, श्रम, रोजगार तथा कौशल विकास मंत्री हरक सिंह रावत को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिपरिषद से भी बर्खास्त कर दिया है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि पौड़ी गढ़वाल ज़िले की कोटद्वार विधानसभा सीट से विधायक रावत अपनी सीट बदलने के साथ ही अपनी पुत्रवधू अनुकृति के लिए भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे.

हरक सिंह रावत. (फोटो साभार: फेसबुक)

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को भाजपा ने रविवार को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.

पिछले महीने वन और पर्यावरण, श्रम, रोजगार तथा कौशल विकास मंत्री रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान पद से इस्तीफा देने की धमकी दी थी.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश पार्टी अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर रावत को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है.

कौशिक के हवाले से उन्होंने बताया कि अनुशासनहीनता के चलते रावत को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रावत को मंत्रिपरिषद से भी बर्खास्त कर दिया है. अब धामी के पास रावत को दिए गए सभी मंत्रालयों और विभागों (वन और पर्यावरण, श्रम, रोजगार, कौशल विकास और ऊर्जा) का अतिरिक्त प्रभार होगा.

भाजपा नेताओं का आरोप है कि पौड़ी गढ़वाल जिले की कोटद्वार विधानसभा सीट से विधायक रावत अपनी सीट बदलने के साथ ही अपनी पुत्रवधू अनुकृति के लिए भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे.

समझा जाता है कि इन मुद्दों पर भाजपा के राजी न होने पर उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

इधर दिल्ली में मीडिया से बातचीत में हरक सिंह रावत ने इस बात की पुष्टि कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से अपनी पुत्रवधू को लैंसडाउन से टिकट देने पर विचार करने को कहा था. उन्होंने दावा किया उत्तराखंड में अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी और वह कांग्रेस के लिए काम करेंगे.

रावत पहले कई वर्षों तक कांग्रेस में थे. पिछले विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे.

हर​क सिंह रावत कांग्रेस के उन नौ बागी विधायकों में से एक थे, जिन्होंने 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ अपनी ही सरकार को हटाने के लिए भाजपा से हाथ मिला लिया था. यह तब हुआ था जब पीडब्ल्यूडी और बिजली जैसे विभाग देने के लिए उनके लगातार अनुरोध को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रावत राज्य सरकार द्वारा कोटद्वार क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूरी नहीं मिलने से नाराज थे, जहां से वह विधायक हैं. अतीत में कई मौकों पर रावत ने सुझाव दिया था कि वह क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण सुनिश्चित करेंगे और इसे पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे.

उत्तराखंड में एक चरण में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा: मुख्यमंत्री

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को भाजपा से निष्कासित किए जाने के बाद सोमवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दावा किया कि वह अपने और परिवार के लिए टिकट का दबाव बना रहे थे.

धामी के अनुसार, पार्टी ने तय किया है कि एक परिवार से एक व्यक्ति को ही टिकट दिया जाएगा.

राजधानी दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा में धामी ने यह भी कहा कि रावत पहले भी कई मौकों पर पार्टी को असहज करते रहे थे, इसके बावजूद उन्होंने हमेशा उन्हें साथ लेकर चलने की कोशिश की.

उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी विकासवाद और राष्ट्रवाद पर चलने वाली पार्टी है, वंशवाद से दूर रहने वाली पार्टी है. हम ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं.’

धामी ने कहा कि रावत की बातों से कई बार पार्टी असहज हुई है.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन फिर भी… चूंकि हमारी बड़ी पार्टी है… हमारा बड़ा परिवार है, हमने हमेशा उनको साथ लेकर चलने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियां ऐसी हो गई थीं… वह अपने समेत अपने परिवार के और अन्य लोगों के लिए टिकट का दबाव बना रहे थे.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए पार्टी ने यह फैसला (उन्हें निष्कासित करने का) किया. हमने तय किया है कि एक परिवार से एक व्यक्ति को ही टिकट दिया जाएगा. किसी भी परिवार को हम दो या तीन टिकट नहीं देंगे. क्योंकि हमारी पार्टी हमेशा इसके खिलाफ रही है.’

इधर, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल करने को लेकर फैसला जल्द हो सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘पार्टी ने फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है. लेकिन सोमवार को दोपहर या शाम तक कोई न कोई फैसला हो सकता है.’

उधर, इस बारे में पूछे जाने पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा, ‘हरक सिंह रावत को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है. पार्टी में आगे जो भी फैसला होगा, वह सामूहिक होगा.’

सूत्रों के मुताबिक, हरक सिंह रावत पिछले कुछ समय से कांग्रेस के कुछ नेताओं के लगातार संपर्क में हैं और वह अपने अलावा अपने कुछ समर्थकों के लिए भी टिकट चाहते हैं.

कांग्रेस के एक सूत्र ने बताया, ‘हरक सिंह रावत अपने एक या दो समर्थक विधायकों और पुत्रवधू के लिए टिकट चाहते हैं. लेकिन पार्टी उत्तराखंड की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावना के अनुसार ही कोई फैसला करेगी.’

साल 2012 में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रावत, विजय बहुगुणा से हार गए थे और उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 1991 में पौड़ी से भाजपा के टिकट पर अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था और अविभाजित उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री के रूप में कार्य किया था.

बाद में वह बसपा में शामिल हो गए. 1998 में बसपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद रावत कांग्रेस में चले गए और 2002 और 2007 में लैंसडाउन से विधायक के रूप में चुने गए. वह 2007 से 2012 तक राज्य में विपक्ष के नेता थे.

हाल ही में उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा में संभावित गुटबाजी को उजागर करते हुए पार्टी विधायक दिलीप सिंह रावत ने मुख्यमंत्री धामी को पत्र लिखकर रावत द्वारा संचालित मंत्रालयों पर उनके लैंसडाउन निर्वाचन क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)