कोविड-19

गुजरात: सरकारी आंकड़ों में कोविड से दस हज़ार मौतें, मुआवज़े के लिए आए 90 हज़ार आवेदन

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने कोरोना पीड़ितों द्वारा मुआवज़े संबंधी 68,370 दावों को मंज़ूरी दी है, हालांकि अपने आधिकारिक आंकड़ों में सरकार ने कोविड-19 से हुई मौतों की संख्या 10,094 ही बताई है.

अप्रैल 2021 में सूरत के एक शवदाह गृह में कोविड से जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के बाद अस्थि कलश रखते एक वॉलंटियर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गुजरात सरकार ने 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने कोविड-19 पीड़ितों के लिए अनुग्रह राशि (मुआवजे) के 68,370 दावों को मंजूरी दी है, जबकि राज्य में आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या उस समय तक केवल 10,094 थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, गुजरात सरकार द्वारा शीर्ष अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में उसने लिखा है कि उसे कोविड-19 पीड़ितों के परिवारों से मुआवजे की मांग वाले कुल 89,633 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसमें से उसने 68,370 को मंजूरी दी, जबकि 4,234 को खारिज कर दिया. 17,000 से अधिक आवेदनों की अभी जांच की जा रही है.

बता दें कि राज्य बीमारी से जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50,000 रुपये मुआवजा देता है. सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक मुआवजा उन कोविड-19 पीड़ितों के परिजनों को दिया जाता है, जिनकी संक्रमण के चलते मौत हुई थी.

गुजरात में सरकार द्वारा कोविड-19 से जान गंवाने वालों की जो आधिकारिक संख्या बताई जाती है, मुआवजे के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या उससे करीब 9 गुना अधिक है, फिर भी राज्य सरकार ने कोविड मृत्यु के आधिकारिक आंकड़ों में सुधार नहीं किया है.

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का इस संबंध में कहना है कि सरकार ने कोविड मृत्यु की पहचान में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशानिर्देशों का पालन किया है, जिनके मुताबिक जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी थी या उम्र संबंधी जटिलताएं थीं, उन्हें कोविड मृत्यु के मामलों में शामिल नहीं किया गया है. जो लोग आईसीएमआर के मानदंडों पर खरे उतरते हैं, उनकी ही मृत्यु महामारी से होना बताई गई है.

बहरहाल, एक साइंस जर्नल के हालिया शोध के मुताबिक, गुजरात में 2018-19 की अपेक्षा 2021 में मरने वालों की संख्या में 230 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी, जो सर्वे के मुताबिक किसी भी भारतीय राज्य में सर्वाधिक वृद्धि थी.

बहरहाल, द वायर साइंस  ने भी इस संबंध में एक रिपोर्ट में बताया था कि अगर एक मरीज को कोरोना संक्रमण है तो उसकी मौत का कारण उसकी अन्य बीमारियों को बताना बेहद मुश्किल है. इसका एक कारण यह है कि कोविड-19 मौजूदा बीमारियों को जानलेवा बना सकता है, जैसा कि अधिकांश संक्रामक रोग करते हैं. फिर भी इस मानदंड के चलते देश में कोविड-19 से हुई मौतों की संख्या में कई मौतों को कोविड के तहत नहीं गिना गया.

हाल ही में, महामारी विशेषज्ञ प्रभात झा ने द वायर  को बताया था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भारत के कोविड-19 मौतों संबंधी आंकड़ों पर भरोसा नहीं करता है क्योंकि भारत में अन्य देशों की तुलना में मौतों की संख्या को कम गिना गया है.

झा ने 6 जनवरी 2022 को प्रकाशित एक अध्ययन का भी हवाला दिया, जिसमें अनुमान लगाया गया था कि कोविड-19 के कारण भारत में मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से छह गुना अधिक हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि 2020 से ही ऐसी आशंकाएं हैं कि भारत में महामारी से मौतों को कम करके दिखाया गया है. अगस्त 2021 में द वायर  पर प्रकाशित रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक खोजी रिपोर्ट में राज्य के मृत्यु रजिस्टर के डेटा के हवाले से बताया गया था कि उस समय तक राज्य में कोविड से मौत का आधिकारिक आंकड़ा रजिस्टर से मिले डेटा से 27 गुना कम था.

इसी तरह, कोविड-19 से हुई मौतों को कम दिखाने के गुजरात के प्रयासों का पिछले साल भी उस समय खुलासा हुआ था जब कई रिपोर्ट में सामने आया था कि एक ओर सरकार ने गांधीनगर में अप्रैल माह में कोई भी मौत न होने का दावा किया, तो वहीं दूसरी ओर शमशानों में कोविड-19 से जान गंवाने वालों के शवों की लाइन लगी हुई थी.