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दिल्ली: एनजीओ ने जनवरी में ठंड से 106 लोगों की मौत का दावा किया, अधिकारियों का इनकार

एनजीओ सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ने यह दावा किया है कि एक जनवरी से 19 जनवरी तक दिल्ली में ठंड के कारण 106 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर बेघर थे. अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि ठंड की वजह से ये मौतें हुई हैं. हालांकि, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बेघरों की मौत का आंकड़ा सर्दियों के मौसम में बढ़ जाता है.

(फोटो: एएनआई)

नई दिल्ली: दिल्ली में इस महीने ठंड की वजह से कम से कम 106 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर बेघर थे. गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ने यह दावा किया है.

एनजीओ ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे सर्दियों के मौसम में ऐसे लोगों के लिए उपयुक्त इंतजाम करने का अनुरोध किया है.

हालांकि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि ठंड की वजह से ये मौतें हुई हैं. वहीं दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बेघरों की मौत का आंकड़ा सर्दियों के मौसम में बढ़ जाता है.

बोर्ड के एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘ठंड की वजह से कोई मौत नहीं हुई. हालांकि हादसों, बीमारियों, शराब एवं मादक पदार्थों के सेवन जैसे अन्य कारणों से बेघरों की मौतें होती हैं, लेकिन डीयूएसआईबी ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखता है.’

एनजीओ की रिपोर्ट के अनुसार, एक जनवरी से 19 जनवरी तक दिल्ली में ठंड के कारण 106 लोगों की जान चली गई. उत्तरी दिल्ली में 13 तथा दक्षिण पश्चिम और मध्य दिल्ली में नौ-नौ लोगों ने ठंड से मौत हो गई. पश्चिमी दिल्ली और नई दिल्ली में इस दौरान आठ-आठ लोगों की ठंड से मौत हो गई.

गैर सरकारी संगठन के सुनील कुमार अलीदिया ने कहा, ‘ये लोग बेघर थे, जो सड़क किनारे या दुकानों के बाहर खुले में रात गुजारते थे. इस महीने ज्यादातर मौतें ठंड के कारण हुईं.’

डीयूएसआईबी के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 308 रैन बसेरे हैं. वहीं, नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, करीब 8,200 बेघर लोग इन रैनबसेरों में रातें गुजार रहे हैं.

मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, दिल्ली में जनवरी में इस साल सबसे लंबा सर्द मौसम रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (सीएचडी) में वकील, नीति शोधकर्ता और स्वयंसेवक शामिल हैं, जो सक्रिय रूप से सरकारी नीतियों का विश्लेषण करते हैं और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए स्थिति का आकलन करने के लिए जमीनी रिपोर्ट तैयार करते हैं.

एनजीओ ने केजरीवाल को लिखे अपने पत्र में दावा किया, ‘2014 में एक डीयूएसआईबी सर्वेक्षण ने दिल्ली में 16,760 बेघर लोगों की पहचान की थी. हालांकि, सड़क के किनारे सोने वाले बेघर लोगों की वास्तविक संख्या एक लाख से अधिक है.’

अलीदिया ने कहा कि सीएचडी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कश्मीरी गेट, यमुना पुस्ता, निगम बोध घाट, जमुना बाजार, चांदनी चौक, दिल्ली गेट, आसफ अली रोड, जामा मस्जिद, आजादपुर, ओखला, बादली, किंग्सवे कैंप, निजामुद्दीन और सराय काले खां और उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग खुले में सो रहे हैं.

एक अधिकारी ने कहा, ‘आश्रय गृहों की उपलब्धता और अन्य पहलों के बावजूद ठंड के कारण बेघर लोगों की मौत से इनकार नहीं किया जा सकता. लेकिन ये वे हैं जो रेलवे ट्रैक, गाड़ियां, सड़क के किनारे, दुकानों के बाहर सोते हैं. ऐसे लोगों को बचाने के लिए एजेंसियां ​​मिलकर काम कर रही हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)