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कश्मीर: वेबसाइट पर पुलवामा मुठभेड़ की ख़बर देने के बाद पत्रकार राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार

द कश्मीर वाला न्यूज़ पोर्टल के संपादक फहद शाह को गिरफ़्तार करते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस ने आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट ‘आतंकी गतिविधियों का महिमामंडन’ करते हैं और देश के ख़िलाफ़ ‘दुर्भावना व अंसतोष’ फैलाते हैं. पत्रकार संगठनों ने इसकी निंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है.

कश्मीर वाला के प्रधान संपादक फहद शाह. (फोटो साभार: फहद शाह/फेसबुक)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के एक युवा पत्रकार और संपादक को इस आरोप में गिरफ्तार किया है कि सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट ‘आतंकी गतिविधियों का महिमांडन’ कर रहे थे और ‘देश के खिलाफ असंतोष’ फैला रहे थे.

ऑनलाइन न्यूज पोर्टल द कश्मीर वाला के प्रधान संपादक फहद शाह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया. तीन दिन पहले ही उनसे व तीन अन्य पत्रकारों से पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में हुई मुठभेड़ की ‘गलत रिपोर्टिंग’ करने को लेकर पूछताछ की थी.

फहद की गिरफ्तारी की खबर से कश्मीर और उसके बाहर भारी आक्रोश फैल गया है. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संगठनों ने इसकी निंदा की है और इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए फहद की तत्काल रिहाई की मांग की है.

सूत्रों ने बताया कि फहद को गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13, भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह) और धारा 505 के तहत गिरफ्तार किया गया है.

फहद को शुक्रवार की दोपहर पुलवामा पुलिस थाने से फोन आया था और बयान देने के लिए तत्काल थाने बुलाया था. जब वह अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया है और उन्हें गिरफ्तार किया जाता है.

फहद के सहयोगी अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक साथी ने द वायर  को बताया कि यह सच की लड़ाई है और हमें उम्मीद है कि फहद जल्द ही हमारे साथ न्यूजरूम में होंगे.

बता दें कि न्यूज़ पोर्टल द कश्मीर वाला की शुरुआत फहद ने एक ब्लॉग के तौर पर तब की थी, जब वह छात्र थे.

सूत्रों ने बताया कि यह एक ओपन एफआईआर है. मामले में अभी और भी पत्रकारों से पूछताछ हो सकती है. यह मामले में पहली गिरफ्तारी है.

जम्मू कश्मीर पुलिस के एक प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है, ‘आरोपी पुलिस रिमांड पर है. मामले में जांच चल रही है.’

विवादित मुठभेड़

गिरफ्तारी विवादास्पद पुलवामा मुठभेड़ के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के एक शीर्ष कमांडर जाहिद वानी को उसके तीन सहयोगियों के साथ मार गिराया है. बताया गया है कि तीन में से एक संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी कफील उर्फ छोटू, दूसरा स्थानीय आतंकी वहीद अहमद रेशी और तीसरा इनायत अहमद मीर था, जो उस घर के मालिक का बेटा था, जिसमें मुठभेड़ हुई थी.

मुठभेड़ में एक अधिकारी समेत दो जवान घायल हो गए थे. जम्मू कश्मीर पुलिस ने बताया था कि 17 वर्षीय इनायत हाल ही में आतंकियों से जुड़ा था, लेकिन उसके परिवार ने पुलिस के दावे को नकारा है और कहा है कि उनका बेटा बेकुसूर था.

रविवार को उन्होंने श्रीनगर में प्रदर्शन करके इनायत के शव की मांग भी की थी, जिसे उत्तर कश्मीर में दफना दिया गया है.

ये सारे घटनाक्रम स्थानीय मीडिया के एक हिस्से ने कवर किए थे और इनसे संबंधित रिपोर्ट को सोशल मीडिया मे बड़ी तादाद में शेयर किया गया था.

हालांकि, एनकाउंटर के घंटों बाद इनायत की एक बहन का 58 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह परिवार के दावों को खारिज कर रही थीं.

वीडियो में करीब तीन-चार पुलिस अधिकारियों ने उन्हें घेर रखा था और उनसे 30 जनवरी को हुई मुठभेड़ के संबंध में सवाल किए जा रहे थे. इस दौरान उन्हें सकपकाते हुए भौचक्क-सी हालत में इधर-उधर देखते हुए देखा जा सकता है.

 

 

उनके खुलासे, जिसे द वायर द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका, के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस ने इनायत और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), शस्त्र अधिनियम और यूएपीए की धारा 16 (आतकी गतिविधियों में संलिप्तता), 18 (षड्यंत्र), 20 (आंतकी संगठनों का सदस्य होना), 38 (आतंकी संगठन की सदस्यता संबंधी अपराध) के तहत मामला दर्ज कर लिया था.

बता दें कि फहद कश्मीर मसले और विदेशी मामलों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों के लिए लिखते रहे हैं, जिसमें टाइम्स मैग्जीन भी शामिल है.

इस सप्ताह की शुरुआत में फहद को तीन अन्य पत्रकारों के साथ इनायत के परिवार के खिलाफ दर्ज केस में गवाही देने के लिए बुलाया गया था.

गौरतलब है कि फहद सालों से कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर हैं. एक समय जब नई दिल्ली द्वारा संचालित प्रशासन ने कश्मीर में स्थानीय मीडिया पर लगाम कस रखी थी, कश्मीर वाला तब भी मुखरता से अपनी बात रखता रहा और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मसलों पर लिखता रहा.

बीते वर्ष संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी भारत सरकार से अभिव्यक्ति की आजादी के संबंध में चार कश्मीरी पत्रकारों को लेकर चिंता जाहिर की थी, जिसमें फहद शाह, आकिब जावेद, सज्जाद गुल और क़ाजी शिबली शामिल थे.

पिछले महीने कश्मीर वाला के लिए ही काम करने वाले सज्जाद को भी अपनी रिपोर्ट के चलते जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) जैसे काले कानून के तहत गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था.

भारत सरकार को लिखे संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के पत्र के मुताबिक, जून 2017 से जनवरी 2021 के बीच फहद के खिलाफ छह मामले दर्ज किए गए. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कई मौकों पर उनकी जांच की गई है और पिछले साल उनके खिलाफ एक मामला भी दर्ज किया गया था, जब कश्मीर वाला ने इस संबंध में खुलासा किया कि दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के एक स्कूल के प्रबंधन ने अपने छात्रों को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए मजबूर किया था.

‘देश विरोधी’ सोशल मीडिया यूज़र

फहद की गिरफ्तारी के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस ने फहद की पहचान ऐसे सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के तौर पर की है जिनके पोस्ट ‘आतंकी गतिविधियों का महिमामंडन’ करते हैं और ‘क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों की छवि खराब करने’ का काम करते हैं, साथ ही लोगों के मन में देश के खिलाफ ‘दुर्भावना और अंसतोष’ फैलाते हैं.

हालांकि, जम्मू कश्मीर पुलिस ने मामले का विवरण नहीं दिया है, लेकिन प्रतीत होता है जिस देश विरोधी सामग्री के प्रकाशन की बात की गई है वह इनायत के परिवार के वह दावे संबंधी हो सकती है जिसमें परिवार ने इनायत को बेगुनाह बताया था.

कश्मीर के एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर द वायर  को बताया, ‘पत्रकारिता की कक्षा में हमें सिखाया जाता है कि हम अपनी खबर में दोनों पक्षों की बात सामने रखें. एक पक्ष की बात रखना जनसंपर्क या प्रोपेगेंडा होता है. इस तरह दर्ज किए जा रहे मामले और गिरफ्तारियां दूसरे पत्रकारों को यह संदेश देने के लिए हैं कि या तो हमारे मुताबिक चलो या फिर जेल जाओ.’

वाशिंगटन डीसी में सीपीजे के एशिया कार्यक्रम समन्वयक स्टीवन बल्टर ने कहा कि जम्मू कश्मीर में प्रशासन को फहद शाह और अन्य सभी पत्रकारों को तुरंत जेल से रिहा करना चाहिए, और पत्रकारों को अपना काम करने के लिए हिरासत में लेना और परेशान करना बंद कर देना चाहिए.

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया है, ‘सच के लिए खड़ा होना देशद्रोह प्रतीत होता है. असहिष्णु और तानाशाह सरकार को आईना दिखाना भी देशद्रोह है. फहद की पत्रकारिता स्वयं बोलती है और भारत सरकार को जमीनी हकीकत दिखाती है. आप कितने फहद गिरफ्तार करोगे?’

इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.