राजनीति

दूसरे चरण के लिए प्रचार का शोर थमा, 14 फरवरी को उत्तर प्रदेश की 55 सीटों पर मतदान

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: 14 फरवरी को ही उत्तराखंड की सभी 70 सीटों और गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं. चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात की ही तरह था उत्तर प्रदेश का हाल, भाजपा ने रोके दंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सत्ता में आए तो उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता बनाएंगे. पंजाब में घोषित अपराधी होने की जानकारी छिपाने पर दो उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज. चुनाव के बीच मणिपुर भाजपा ने अपने प्रवक्ता को पार्टी से निकाला.

उत्तर प्रदेश के रामपुर शहर में हुई सपा एक चुनावी सभा. (फोटो साभार: ट्विटर)

लखनऊ/नई दिल्ली/देहरादून/चंडीगढ़/इम्फाल: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 14 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए प्रचार का काम शनिवार शाम छह बजे थम गया.

इस चरण में राज्य के नौ जिलों- सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, सम्भल, रामपुर, अमरोहा, बदायूं, बरेली तथा शाहजहांपुर की 55 विधानसभा सीटों के लिए 14 फरवरी को मतदान होगा. इस चरण का चुनाव प्रचार शाम छह बजे समाप्त हो गया.

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ब्रह्मदेव राम तिवारी ने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की सुविधा और कोविड से सुरक्षा की विशेष व्यवस्था कराई गई हैं तथा मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए वहां पर समुचित एवं आवश्यक व्यवस्थाएं कराने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.

चुनाव आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में कुल 586 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इनमें प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना (शाहजहांपुर सदर), जल शक्ति राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख (बिलासपुर), नगर विकास राज्य मंत्री महेश चंद्र गुप्ता (बदायूं), माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी (चंदौसी), आयुष राज्यमंत्री रहे और अब सपा के प्रत्याशी धर्म सिंह सैनी (नकुड़), वरिष्ठ सपा नेता आजम खान (रामपुर सदर) और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम (स्वार) प्रमुख हैं.

दूसरे चरण में जिन क्षेत्रों में मतदान होने जा रहा है, वहां मुसलमानों की आबादी काफी ज्यादा है और इन्हें समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. हालांकि वर्ष 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 55 में से 38 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि सपा को 15 और कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं. कांग्रेस और सपा ने पिछला विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था. सपा को जो 15 सीटें मिली थीं, उनमें से 10 पर मुस्लिम प्रत्याशी जीते थे.

दूसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार में सभी राजनीतिक दलों ने अपना पूरा जोर लगाया. भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमुख रूप से मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर हमलावर रहे और उत्तर प्रदेश को दंगा मुक्त रखने के लिए भाजपा सरकार को जरूरी बताया.

मोदी ने सहारनपुर में तीन तलाक का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि उनकी सरकार ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के चंगुल से आजाद कराया है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं समेत विभिन्न स्थानों पर जाकर जनसभाएं की और विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किए.

दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की कमान संभाली. उन्होंने 100 से ज्यादा मुकदमों के मामले में करीब दो साल से जेल में बंद अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के पक्ष में रामपुर में वोट मांगे और कहा कि एक विश्वविद्यालय बनाने वाले आजम को जेल में डाल दिया गया और लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में किसानों को अपनी जीप तले रौंदने वाले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे को जमानत दे दी गई.

बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान सपा भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट-मुस्लिम भाईचारा समाप्त कर दिया.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूसरे चरण के तहत मतदान से गुजरने वाले विभिन्न जिलों के अनेक विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर प्रचार किया.

गुजरात की ही तरह था उत्तर प्रदेश का हाल, भाजपा ने रोके दंगे: मोदी

कन्नौज: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की तुलना गुजरात से करते हुए कहा कि एक समय गुजरात में भी दंगे हुआ करते थे, मगर भाजपा के सत्ता में आने पर गुजरात की ही तरह उत्तर प्रदेश में भी फसाद की घटनाएं बंद हो गईं.

नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

मोदी ने कन्नौज में एक चुनावी सभा के दौरान विपक्षी दलों पर दंगाइयों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘मुझे याद है. एक समय था जब गुजरात में भी ऐसी ही स्थिति थी. कांग्रेस के वर्षों के शासन में वहां ऐसी स्थितियां बना दी गई थीं कि न तो व्यापार फलता-फूलता था और न लोग सुरक्षित महसूस करते थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हर साल अनेक दंगे होते थे. वहां पर छोटी-छोटी बातों को लेकर दंगा हो जाया करता था. इसी तरह के दुष्चक्र में गुजरात लंबे अरसे तक फंसा हुआ था. गुजरात के लोगों ने जब भाजपा को मौका दिया तो स्थितियां बदलना शुरू हो गईं.’

उन्होंने कहा, ‘हमने सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को दी. इसी का नतीजा है कि पिछले दो दशकों से गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ. अब वहां हर वर्ग, हर संप्रदाय के लोग अपने और देश के विकास में जुटे हुए हैं. इसी तरह, उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी और माफिया शाही को बंद करने का काम योगी जी की सरकार ही कर सकती है. योगी के नेतृत्व में सरकार ने जिस तरह से दंगों को रोका है, हमें उसे स्थाई रूप देना है.’

मोदी ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘जिनकी राजनीतिक बुनियाद अपराध, गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर टिकी है वे कभी सुधर नहीं सकते. इन लोगों ने कैसे-कैसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है. इनके ज्यादातर उम्मीदवार हिस्ट्रीशीटर हैं और हालत ऐसी है कई लोग तो जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं.’

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया, ‘भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई गरीब कल्याण की योजनाएं घोर परिवार वादियों को खटक रही हैं. पहला मौका मिलते ही वे इन योजनाओं को गरीब तक पहुंचना बंद कर देंगे और उनकी माफिया कंपनी सब कुछ तबाह कर देगी.’

उन्होंने दावा किया, ‘अगर कोविड-19 महामारी वर्ष 2017 से पहले वाली सरकार के जमाने में आया होता तो उत्तर प्रदेश को बहुत बड़ी समस्या हो जाती. उन्होंने (सपा) ‘मेड इन इंडिया’ टीकों को भाजपा का टीका बताकर गरीबों के जीवन से बहुत बड़ा खिलवाड़ करने की कोशिश की.’

मोदी ने आरोप लगाया, ‘घोर परिवारवादी पार्टियों ने लोकतंत्र की ‘गवर्नमेंट ऑफ द पीपल, बाय द पीपल, फॉर द पीपल’ की भावना को ही बदल दिया है. इन लोगों का मंत्र ‘गवर्नमेंट ऑफ द फैमिली, बाय द फैमिली, फॉर द फैमिली’ बन गया है इसलिए उत्तर प्रदेश के लोगों ने फिर ठान लिया है कि उन्हें सिर्फ अपने परिवार के स्वार्थ के लिए काम करने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में नहीं चाहिए.’

इत्र के कारोबार के लिए मशहूर कन्नौज के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इन परिवारवादियों की खराब नीतियों का एक गवाह कन्नौज का इत्र कारोबार भी है. इन्होंने अपने काले कारनामों से यहां के इत्र कारोबार को भी बदनाम किया. इन्होंने इत्र को भ्रष्टाचार से जोड़ दिया.’

दूसरे चरण में सबसे धनी उम्मीदवार के पास 296 करोड़ रुपये की संपत्ति

नोएडा: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सबसे धनी उम्मीदवार के पास 296 करोड़ रुपये की संपत्ति है, वहीं एक निर्दलीय उम्मीदवार के पास 6,700 रुपये की संपत्ति है.

रामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार नवाब काज़िम अली ख़ान के लिए चुनाव प्रचार करतीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी. काज़िम दूसरे चरण के सबसे अमीर प्रत्याशी हैं. (फोटो: पीटीआई)

द उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने दूसरे चरण के 586 में से 584 उम्मीदवारों के हलफनामों का आकलन किया है.

रिपोर्ट के अनुसार, रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नवाब काजिम अली खान ने अपनी कुल संपत्ति 296 करोड़ रुपये बताई है और इस हिसाब से वह सबसे अमीर उम्मीदवार हैं.

उनके बाद बरेली कैंट सीट से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार सुप्रिया एरन के पास 157 करोड़ रुपये, नौगवां सीट से भाजपा के देवेंद्र नागपाल के पास 140 करोड़ रुपये की संपत्ति है. वहीं शाहजहांपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार संजय कुमार ने केवल 6,700 रुपये की संपत्ति घोषित की है.

रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी के विशाल कुमार (नेहताऊर सीट) के पास 13,500 रुपये और उस्माल मलिक (सहारनपुर नगर) के पास 15,000 रूपए की संपत्ति है.

प्रमुख दलों में, भाजपा के 53 उम्मीदवारों में से 52 (या 98 प्रतिशत), सपा के 52 उम्मीदवारों में से 48 (या 92 प्रतिशत), बसपा के 55 उम्मीदवारों में से 46 (या 84 प्रतिशत), रालोद के तीन उम्मीदवारों में से दो (या 67 प्रतिशत), कांग्रेस के 54 उम्मीदवारों में से 31 (या 57 प्रतिशत) और आम आदमी पार्टी के 49 में से 16 (या 33 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है.

यूपी के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची में ‘जी 23’ के किसी नेता का नाम नहीं

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और कई अन्य नेता उत्तर प्रदेश विधानसभा के पांचवें चरण के चुनाव के लिए स्टार प्रचारक बनाए गए हैं, हालांकि इसमें ‘जी 23’ समूह के किसी नेता को स्थान नहीं मिला है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को शुक्रवार को 30 स्टार प्रचारकों की सूची सौंपी है. इस सूची में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारण और कोविड महामारी के चलते दोनों नेता प्रचार के लिए उपलब्ध नहीं हो पाएंगे, जिस वजह से इनके नाम शामिल नहीं हैं.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम भी शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की पहले की सूचियों में पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का नाम शामिल था, हालांकि पांचवें चरण के लिए सूची में नहीं है.

गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के उन 23 प्रमुख नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अगस्त, 2020 में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस में संगठन चुनाव करवाने की मांग की थी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सात चरणों में होगा. पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को और सातवें एवं अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को होगा. मतगणना 10 मार्च को होगी.

पश्चिमी यूपी में विभाजनकारी, मुद्दा विहीन राजनीति के दिन समाप्त हुए: टिकैत

नोएडा: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘विभाजनकारी और मुद्दा विहीन’ राजनीति के दिन समाप्त हो गए हैं. साथ ही टिकैत ने बदलाव के लिए किसानों के प्रदर्शन को श्रेय दिया.

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी कहा कि निरंकुश सरकारों पर लगाम लगाने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रदर्शन जरूरी हैं.

संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल भाकियू के नेता टिकैत ने ट्वीट किया, ‘पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘विभाजनकारी और मुद्दा विहीन’ राजनीति के दिन समाप्त हो गए हैं. किसानों, कामगारों और ग्रामीणों ने घृणा को दरकिनार करते हुए मुद्दों पर मतदान किया है और हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे. यह आंदोलन (किसान) का परिणाम है. निरंकुश सरकारों पर लगाम लगाने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रदर्शन जरूरी हैं.’


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


सत्ता में आए तो उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता बनाएंगे: मुख्यमंत्री धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आई तो शपथ ग्रहण के तुरंत बाद एक समिति गठित कर समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी.

पुष्कर​ सिंह​ धामी. (फोटो: पीटीआई)

राज्य में 14 फरवरी को सभी 70 विधानसभा सीटों पर होने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार के आखिरी दिन देहरादून में यह घोषणा करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता धामी ने कहा कि इस मसौदे को तैयार करने के बाद सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनेगा, चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास करते हों.

धामी ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने वाली समिति में न्यायविदों, सेवानिवृत्त और समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों के साथ हितधारकों को भी शामिल किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस समान नागरिक संहिता के दायरे में विवाह, तलाक, जमीन जायदाद और उत्तराधिकार जैसे विषय शामिल होंगे.

धामी ने कहा, ‘यह समान नागरिक संहिता संविधान निर्माताओं के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम होगा और संविधान की भावना को मूर्तरूप देगा. यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की दिशा में भी एक प्रभावी कदम होगा जो देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की संकल्पना प्रस्तुत करता है.’

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी समय-समय पर इसे लागू करने पर ही जोर नहीं दिया बल्कि इस दिशा में कदम न उठाने पर नाराजगी भी वयक्त की है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार इस संबंध में गोवा से प्रेरणा लेगी जिसने समान नागरिक संहिता लागू कर देश के सामने एक उदाहरण स्थापित किया है.

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के साथ ही सामाजिक मेल-जोल और लैंगिक समानता को भी बढावा देगी.

उत्तराखंड में चुनाव प्रचार का शोर थमा

उत्तराखंड में सभी 70 सीटों पर एक चरण में 14 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार शाम चुनाव प्रचार थम गया, जहां आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ,कांग्रेस महा​सचिव प्रियंका गांधी जैसे भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों ने अपनी पार्टियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी.

राजधानी देहरादून स्थित चुनाव आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शाम छह बजे चुनाव प्रचार का शोर थम गया. हालांकि, प्रत्याशी अब भी अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर अपने लिए वोट मांग सकेंगे.

कोरोना वायरस महामारी के साए में हो रहे इस चुनाव में ज्यादातर समय बड़ी राजनीतिक रैलियों और सभाओं पर रोक लगी रही, जिसके कारण प्रत्याशियों का प्रचार मतदाताओं से सीधे संपर्क या बड़े नेताओं की वर्चुअल रैलियों तक ही सिमटा रहा.

हालांकि, आखिरी चरण में चुनावी रैलियों पर रोक हटने से प्रचार ने जोर पकड़ा और नरेंद्र मोदी, अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की बड़ी जनसभाओं से प्रदेश में चुनावी माहौल गरमा गया.

भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करतीं महिलाएं. (फोटो: पीटीआई)

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मोदी ने रुद्रद्रपुर, आदित्यनाथ ने टिहरी एवं कोटद्वार, राजनाथ सिंह ने कपकोट, सल्ट और रामनगर, अमित शाह ने धनोल्टी, सहसपुर और रायपुर में जनसभाएं करने के साथ ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साधा जबकि प्रियंका गांधी ने खटीमा और हल्द्वानी में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया.

रुद्रद्रपुर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य की जनता से चुनाव में कांग्रेस के ‘तुष्टिकरण के एजेंडा’ को सफल न होने देने की अपील की और कहा कि पहले ही देश के कई राज्यों से उखड चुकी कांग्रेस का पूरा सफाया करने का उन्हें मौका मिला है.

खटीमा और हल्द्वानी में अपनी रैलियों में प्रियंका गांधी वाड्रा ने महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के खराब हालात जैसे मुददे उठाए और कहा कि भाजपा के शासनकाल में जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है.

तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए वाड्रा ने कहा कि मोदी सरकार उन्हें किसानों की कीमत पर अपने अरबपति मित्रों की समृद्धि के लिए लाई थी, जिसे किसानों के दवाब में उसे वापस लेना पड़ा. उन्होंने भाजपा पर पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलने का आरोप भी लगाया. वाड्रा ने जनता से वादा किया कि सत्ता में आने पर उन पर महंगाई का बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा और कीमतों को नियंत्रण में रखा जाएगा.

यद्यपि आम आदमी पार्टी ने कई जगहों पर चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबला बनाने का प्रयास किया, लेकिन ज्यादातर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला देखा जा रहा है.

इस बार के चुनावों में खटीमा, लालकुआं और गंगोत्री सीटों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा से तीसरी बार जीतने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस महासचिव और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत लालकुआं से किस्मत आजमा रहे हैं. आप के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कर्नल अजय कोठियाल गंगोत्री से चुनावी मैदान में हैं.

प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या 82,37,913 हैं जिनके सोमवार को मताधिकार का प्रयोग करने की संभावना है .

चुनाव में छोटी सी चूक राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है: योगी आदित्यनाथ

नई टिहरी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने शनिवार को उत्तराखंड की जनता से विधानसभा चुनाव में कोई गलती न करने की अपील करते हुए कहा कि थोड़ी सी भी चूक देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/@MYogiAdityanath)

उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर 14 फरवरी को हो रहे मतदान से पहले टिहरी में भाजपा प्रत्याशी किशोर उपाध्याय के पक्ष में चुनाव प्रचार करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘अगर उत्तराखंड में भाजपा की सरकार नहीं होगी तो उत्तर प्रदेश से भागने वाले सभी अपराधी यहां शरण लेकर तबाही मचाएंगे.’

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक तो उनकी जन्मभूमि है और दूसरा सीमांत प्रदेश भी है. उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से इसका अपना महत्व है और उत्तर प्रदेश से सटा होने के कारण चिंता का विषय भी है. उत्तर प्रदेश में जब हम अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे तथा अगर यहां भाजपा की सरकार नहीं होगी तो वे सब यहां आकर शरण लेंगे और तबाही मचाएंगे.’

योगी ने कहा कि आजकल आ रहे सभी सर्वेक्षण और ओपिनियन पोल संकेत दे रहे हैं कि भाजपा उत्तर प्रदेश में वापस सत्ता में आ रही है. उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा को जितनी सीटें मिली थीं, 2022 में भी उतनी ही मिलेंगी.

उत्तराखंड जैसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के अभेद्य दुर्ग’ में छेद करने का प्रयास करने के​ लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए योगी ने कहा कि उसे यहीं रोक दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सही दिशा में जा रहा है और उसे उसी रास्ते पर चलते रहना चाहिए.

प्रदेश में मुस्लिम विश्वविद्यालय की बात करने के लिए कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि पार्टी के पास कोई नेतृत्व नहीं है. हिंदु को ‘सांप्रदायिक की बजाय सांस्कृतिक शब्द’ बताते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘स्वामी विवेकानंद ने वैश्विक मंच पर हमें गर्व से कहना सिखाया कि हम हिंदु है, लेकिन राहुलजी के पूर्वज कहते थे कि हम ‘एक्सीडेंटल हिंदु’ हैं.’

उन्होंने कहा कि जिसे खुद को हिंदु कहने में गौरव नहीं है, वह हिंदु शब्द को परिभाषित नहीं कर सकता और इसलिए उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है.

आप ने उत्तराखंड के लिए घोषणापत्र जारी किया

आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को उत्तराखंड के लिए अपना चुनावी घोषणा-पत्र जारी किया. इसमें उसने राज्य में भ्रष्टाचार खत्म करने, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, हर घर को नि:शुल्क 300 यूनिट बिजली देने, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और चावल-गेहूं तथा गन्ने का समर्थन मूल्य संशोधित कर उसे क्रमश: 2500 रुपये तथा 400 रुपये करने का वादा किया.

उन्होंने हर घर के एक नौजवान को नौकरी देने तथा रोजगार मिलने पर उन्हें पांच हजार रुपये सालाना देने का वादा भी किया.

उत्तरकाशी में अपनी पार्टी का ‘वचन पत्र’ जारी करते हुए आप के मुख्यमंत्री पद के दावेदार कर्नल अजय कोठियाल ने देहरादून में एक हलफनामे पर भी दस्तखत किए और वादा किया कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो वह ईमानदारी से काम करेगी.

उन्होंने लोगों से कहा कि अगर पार्टी अपना एक भी वादा पूरा नहीं करती तो वह उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.

घोषणा-पत्र में आप ने अगले पांच सालों में राज्य का बजट दोगुना करने, काशीपुर, रुड़की, कोटद्वार, डीडीहाट, रानीखेत और यमुनोत्री को जिला बनाने, 18 साल से उपर की महिला को हर महीने 1000 रुपये देने तथा महिलाओं के कल्याण के लिए अलग से बजट बनाने का भी वादा किया. आप ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करने का भी वादा किया.


पंजाब विधानसभा चुनाव


माफिया, नशीले पदार्थों से मुक्त होगा पंजाब, विकास का नया अध्याय लिखेंगे: नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन विधानसभा चुनाव जीतता है तो माफिया और नशीले पदार्थों से मुक्त एक ‘नया’ पंजाब बनाया जाएगा और राज्य को विकास के रास्ते पर लाया जाएगा.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा. (फोटो: पीटीआई)

उन्होंने दावा किया कि भाजपा के लिए सत्ता लोगों की सेवा का माध्यम है. बलाचौर और रूपनगर में चुनावी सभाओं के दौरान नड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि दंगों में कांग्रेस सदस्य शामिल थे.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘उनके हाथ खून से रंगे थे, उन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया. कांग्रेस ने स्वतंत्र भारत में ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जहां एक भाई दूसरे भाई के खिलाफ खड़ा हो गया.’

उन्होंने आरोप लगाया कि 30 साल तक कांग्रेस ने कुछ नहीं किया और 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद एक एसआईटी का गठन किया गया और ‘इन दंगों के दोषियों को सलाखों के पीछे डाल दिया गया.’ नड्डा ने कहा, ‘मैं सिख भाइयों से पूछना चाहता हूं कि आपका शुभचिंतक कौन है?’

उन्होंने कहा कि अगर समय की कसौटी पर खरी उतरी है तो वह भाजपा है और मतदाताओं से राज्य में भाजपा गठबंधन को सत्ता में लाने की अपील की, जहां 20 फरवरी को मतदान होना है.

भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव सिंह ढींडसा के शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है.

भाजपा प्रमुख ने कहा, ‘हम ‘नवा’ और सुरक्षित पंजाब बनाएंगे. हमें यह ध्यान रखना होगा कि पंजाब पाकिस्तान के साथ करीब 600 किलोमीटर की सीमा साझा करता है. पाकिस्तान के इरादे नेक नहीं हैं. हर दूसरे दिन वे ड्रोन और ड्रग्स भेजते रहते हैं.’

आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए नड्डा ने बलाचौर से भाजपा उम्मीदवार अशोक बाथ की एक टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें आप पर ‘चुनाव टिकट बेचने’ का आरोप लगाया गया था.

भाजपा प्रमुख ने सवाल किया, ‘‘उन्होंने (आप) ईमानदारी का मुखौटा पहन रखा है. देखिए, उन्होंने दिल्ली में क्या किया है. क्या आप ऐसे लोगों को यहां (सत्ता में) लाना चाहते हैं.’

पंजाब चुनाव में 25 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामला: रिपोर्ट

पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे 1276 उम्मीदवारों में से 25 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की है. ‘पंजाब इलेक्शन वॉच’ द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है .

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) से संबद्ध पंजाब इलेक्शन वॉच (पीईडब्ल्यू) ने 20 फरवरी को होने वाले चुनाव में कुल 1,304 उम्मीदवारों में से 1,276 उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया.

पीईडब्ल्यू ने कहा कि वह 28 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि उनका स्कैन ठीक तरीके से नहीं किया गया था अथवा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पूरा विवरण अपलोड नहीं किया गया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां तक उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता का सवाल है, उनमें से आधे से ज्यादा ने 12वीं तक पढ़ाई की है.

पीईडब्ल्यू के प्रदेश संयोजक जसकीरत सिंह ने इस रिपोर्ट को जारी किया.

रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के पास औसतन 4.31 करोड़ रुपये की संपत्ति है और 2017 में यह आंकड़ा 3.49 करोड़ था.

मोहाली से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलवंत सिंह ने सबसे अधिक 238 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. इसके बाद शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और कांग्रेस नेता करन कौर बराड़ का नंबर आता है, जिनके पास क्रमश: 202 और 155 करोड़ रुपये की संपत्ति है. बराड़ मुक्तसर से चुनाव मैदान में हैं .

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1276 उम्मीदवारों में से 315 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है जो 25 फीसदी है.

घोषित अपराधी होने की जानकारी छिपाई, दो उम्मीदवारों के खिलाफ मामला दर्ज

पंजाब में 20 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय भगोड़ा घोषित होने संबंधी जानकारी छिपाने के आरोप में दो उम्मीदवारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. करुणा राजू ने कहा कि पटियाला जिले के सनौर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार हरमीत सिंह पठानमाजरा उर्फ हरमीत सिंह ढिल्लों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पठानमाजरा आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं.

उन्होंने कहा कि सनौर के जुल्कन पुलिस थाने में जनप्रतिनिधित्व कानून और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

राजू ने कहा कि एक शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया कि पठानमाजरा को 2019 में बरनाला अदालत द्वारा भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया था.

चुनाव अधिकारी ने कहा कि नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी.

मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि इसी तरह मलेरकोटला से निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद शकील के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. शकील को मामले में गिरफ्तार किया गया है.

पंजाब में कांग्रेस विधायक लाडी दोबारा भाजपा में शामिल

कांग्रेस पार्टी के श्री हरगोबिंदपुर से मौजूदा विधायक बलविंदर सिंह लाडी पिछले महीने भगवा पार्टी से अलग होने के बाद शुक्रवार को दोबारा भाजपा में शामिल हो गए.

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने बटाला में लाडी को फिर से भाजपा में शामिल कराया . इस दौरान बटाला से भाजपा प्रत्याशी फतेहजंग बाजवा भी मौजूद थे.

लाडी बाजवा के साथ कांग्रेस छोड़ कर 28 दिसंबर को भाजपा में शामिल हो गये थे . बाजवा पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं .

हालांकि, भगवा पार्टी में शामिल होने के छह दिन बाद, लाडी कांग्रेस में वापस लौट आए थे . उन्होंने कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की उपस्थिति में सत्तारूढ़ दल का हाथ थामा था .

कांग्रेस ने लाडी को गुरदासपुर जिले के श्री हरगोबिंदपुर विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया और उनके बदले मनदीप सिंह को मैदान में उतारा है .


गोवा विधानसभा चुनाव


मैं पर्रिकर की विरासत खत्म कर रहा हूं, ऐसी अफवाह कुछ नाखुश नेता फैला रहे हैं: मुख्यमंत्री

संखालिम: गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शुक्रवार को कहा कि कुछ लोग जो एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के राज्य में शीर्ष पद पर पहुंचने से खुश नहीं हैं, वे अफवाह फैला रहे हैं कि वह दिवंगत मनोहर पर्रिकर की विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा के लोकप्रिय नेता पर्रिकर की 2019 में मृत्यु हो गई थी.

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत. (फोटो साभार: फेसबुक/@DrPramodPSawant)

संयोग से, भाजपा ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे उत्पल पर्रिकर को पणजी विधानसभा सीट से 14 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया.

सावंत ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई/भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘मैंने दिवंगत मनोहर पर्रिकर के मार्गदर्शन में राजनीति में प्रवेश किया. मैं विधायक के रूप में निर्वाचित हुआ और गोवा विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया.’

17 मार्च, 2019 को सीएम के रूप में पदभार संभालने वाले संखालिम से दो बार के विधायक सावंत ने कहा कि पर्रिकर राज्य में पार्टी के शीर्ष नेता थे.

उन्होंने दावा किया, ‘मेरे जैसे पार्टी कार्यकर्ता के इस पद पर पहुंचने से कुछ नेता खुश नहीं हैं. उन्हें लगता है कि केवल विशिष्ट लोगों को ही इस पद पर रहना चाहिए. यही कारण है कि वे इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं.’

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि पर्रिकर की मृत्यु के बाद से भाजपा बदल गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि ‘एक नेता के बदले जाने पर हमेशा बदलाव होता है.’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘भाजपा नहीं बदली है. कुछ नेता जो खुद को पार्टी से बड़ा समझते हैं, एक बदली हुई भाजपा के बारे में बोलते हैं.’

सावंत ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में जन-हितैषी विकास के कारण भाजपा 40 सदस्यीय सदन में 22 से अधिक सीटें जीतेगी और सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने की आवश्यकता नहीं होगी.

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के वोटों के बांटने की बात को खारिज कर दिया, जिससे सत्तारूढ़ भाजपा को मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा, ‘मुझे भाजपा और पार्टी कार्यकर्ताओं के काम पर भरोसा है. मुझे पार्टी द्वारा चुने गए उम्मीदवारों पर भरोसा है.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ तथाकथित बड़े नेता (भाजपा से नहीं) दूसरों से नामांकन वापस लेने के लिए “फिक्सिंग” (सौदेबाजी) में लिप्त थे.


मणिपुर विधानसभा चुनाव


मणिपुर भाजपा ने अपने प्रवक्ता को पार्टी से निकाला

भाजपा की मणिपुर इकाई ने अपने मुख्य प्रवक्ता चोंगथम बिजॉय सिंह को पार्टी नियमों के उल्लंघन के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है.

चोंगथम बिजॉय सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

उनके निष्कासन का फैसला भाजपा के घटक ‘एनपीपी’ के खिलाफ टिप्पणी करने के कुछ दिनों के भीतर ही किया गया है. गौरतलब है कि उन्होंने कहा था कि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) एक ‘परजीवी’ (पैरासाइट) है, जो पिछले पांच साल में सत्तारूढ गठबंधन के लिए एक संकट ही साबित हुई है.

पार्टी से निष्कासन के बाद सिंह ने कहा कि राज्य विधानसभा के चुनाव में वह उरीपोक सीट से जनता दल (यू) के उम्मीदवार केएच सुरेश का समर्थन करेंगे, क्योंकि वह खुद उस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें उस सीट से पार्टी का उम्मीदवार इसलिए नहीं बनाया, क्योंकि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं.

उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा था, ‘मुझे पार्टी का टिकट देने से इनकार कर दिया गया, क्योंकि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलता हूं. मुझे ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किये बिना निष्कासित कर दिया गया है. मेरा निष्कासन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के निहित स्वार्थों के कारण हुआ है. मैं उरीपोक सीट से जनता दल (यू) के उम्मीदवार को समर्थन दूंगा.’

भाजपा ने इस सीट से सेवानिवृत्त नौकरशाह एल. रघुमणि को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सिंह को पार्टी नियमों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)