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पत्रकार निकायों ने मंत्री को पत्र लिखकर पीआईबी मान्यता के नए दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, भारतीय महिला प्रेस कोर समेत कई पत्रकार संगठनों ने सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर कहा है कि उनके मंत्रालय ने भारतीय प्रेस परिषद के मौजूदा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पत्रकारों को मान्यता देने के दिशानिर्देशों में बदलाव के लिए एकतरफा और अनुचित निर्णय लिया है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर. (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली: विभिन्न पत्रकार संगठनों ने शुक्रवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा मीडियाकर्मियों की मान्यता के लिए हाल ही में जारी किए गए नए दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई.

पीआईबी ठाकुर के मंत्रालय के अधीन आता है. मंत्री को लिखे अपने पत्र में पत्रकारों के निकायों ने कहा कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित एक बैठक में नए मान्यता दिशानिर्देशों पर चर्चा की गई.

पत्रकारों के संगठनों ने कहा कि चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारतीय प्रेस परिषद के मौजूदा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए मान्यता के लिए दिशानिर्देशों में बदलाव के लिए एकतरफा और अनुचित निर्णय लिया है.

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, भारतीय महिला प्रेस कोर, प्रेस एसोसिएशन, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और वर्किंग न्यूज कैमरामेन एसोसिएशन के अध्यक्ष शामिल हैं.

मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के तत्वावधान में विभिन्न पत्रकार संगठनों, संघों और यूनियनों ने आज एक बैठक की और नए पीआईबी मान्यता दिशानिर्देशों पर चर्चा की.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि दिशानिर्देश और केंद्रीय मीडिया मान्यता समिति (सीएमएसी) दोनों शीर्ष मीडिया निकाय प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए मौजूदा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं.

सरकार ने सीएमएसी का पुनर्गठन किया था, जो यह निर्णय लेने वाली संस्था है कि पीआईबी मान्यता किसे मिलेगी है.

प्रेस सूचना ब्यूरो के प्रधान महानिदेशक जयदीप भटनागर की अध्यक्षता में इसमें वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन, प्रेस एसोसिएशन, ऑल इंडिया न्यूजपेपर एडिटर्स कॉन्फ्रेंस, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन और 18 कामकाजी पत्रकार मनोनीत सदस्यों के रूप में शामिल हैं.

इस महीने की सात तारीख को घोषित केंद्रीय मीडिया मान्यता दिशानिर्देश-2022 के अनुसार, यदि कोई पत्रकार देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता, दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता के खिलाफ काम करता है या नैतिकता या अदालत की अवमानना, मानहानि या किसी अपराध के लिए उकसाने के संबंध में कार्य करता है, तो मान्यता वापस ली जाएगी या निलंबित कर दी जाएगी.

इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि ‘भारत सरकार केंद्रीय मीडिया मान्यता समिति (सीएमएसी) नामक एक समिति का गठन करेगी, जिसकी अध्यक्षता पत्र सूचना आयोग (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक करेंगे और इसमें भारत सरकार द्वारा नामित 25 सदस्य तक हो सकते हैं, जो इन दिशानिर्देशों के तहत निर्धारित कार्यों का निर्वहन करेंगे.’

सीएमएसी का कार्यकाल दो साल का होगा और वह तीन माह में एक बार या फिर जरूरत के मुताबिक बैठक करेगी.

दिशानिर्देशों में एक मान्यता प्राप्त पत्रकार की मान्यता निलंबित या रद्द करने के संबंध में दस क्लॉज दिए गए हैं. दिशानिर्देशों में यह भी उल्लेख है कि यदि कोई पत्रकार ‘गैर-पत्रकारीय गतिविधियों’ के लिए मान्यता का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता/जाती हैं या उन पर कोई ‘गंभीर संज्ञेय अपराध’ दर्ज होता है तो उनकी मान्यता को निलंबित या रद्द किया जा सकता है.

मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश चिंता बढ़ाने वाले इसलिए हैं क्योंकि इनमें ऐसा प्रावधान है कि पत्रकार की मान्यता निलंबित करने या रद्द करने संबंधी फैसला सरकार द्वारा नामित अधिकारी के विवेक पर निर्भर होगा. वह तय करेगा कि भारत की संप्रभुता या अखंडता के लिए क्या अपमानजनक या नुकसानदेह है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)