नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरीः नगालैंड में देश की पहली विपक्ष रहित सरकार, विपक्ष सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में नगालैंड, मणिपुर,अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, मिज़ोरम और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक वाईएम योलो कोन्याक मंत्री पद की शपथ लेते हुए. (फोटो साभारः ट्विटर/@Hillsnaga)

इम्फाल/अगरतला/गुवाहाटी/शिलॉन्ग/आइजॉल/कोहिमाः नगालैंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां विधानसभा में कोई विपक्ष नहीं है.

द सेंटिनल की रिपोर्ट के मुताबिक, नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) विधायक वाईएम योलो कोन्यक के नौ फरवरी को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेते ही राज्य में सर्वदलीय सरकार बन गई.

इस तरह राज्य में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने एकजुट होकर देश की पहली विपक्ष रहित सरकार बनाई ताकि केंद्र, नगा संगठनों और विभिन्न समूहों के बीच नगा राजनीतिक मुद्दों को आगे बढ़ाया जा सके.

असम और नगालैंड के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी ने कोहिमा में राजभवन में एक सादे समारोह में कोन्याक को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई.

शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, उनकी कैबिनेट के सहयोगी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक अलायंस के अध्यक्ष टीआर जेलियांग और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

अक्टूबर 2020 में सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री सीएम चांग के निधन के बाद कैबिनेट में एक पद खाली पड़ा था.

नगालैंड में एनपीएफ एकमात्र विपक्षी दल था और पिछले साल सितंबर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एनपीएफ ने सत्तारूढ़ एनडीपीपी और उसकी सहयोगी भाजपा और दो निर्दलीय विधायकों के साथ गठबंध कर यूडीए का गठन किया.

इस बीच एनपीएफ विधायक दल के नेता जेलियांग को रियो की जगह नवगठित यूडीए का नया अध्यक्ष बनाया गया. नगालैंड सरकार के प्रवक्ता और संसदीय मामलों के मंत्री नीबा क्रोनू ने कहा कि जेलियांग को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा.

नगालैंड की 60 सदस्यीय विधानसभा में एनडीपीपी के 21, एनपीएफ के 25, भाजपा के 12 विधायक हैं जबकि दो निर्दलीय विधायक हैं. एनडीपीपी और भाजपा का 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले से ही गठबंधन है.

मणिपुरः भाजपा ने अपने प्रवक्ता को पार्टी से निष्कासित किया

भाजपा की मणिपुर इकाई ने अपने मुख्य प्रवक्ता चोंगथम बिजॉय सिंह को पार्टी नियमों के उल्लंघन के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है.

उनके निष्कासन का फैसला भाजपा की सहयोगी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कुछ दिनों के भीतर किया गया है.

दरअसल बिजॉय सिंह ने एनपीपी को दीमक कहकर संबोधित किया था, जो पिछले पांच साल में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक संकट ही साबित हुई है.

पार्टी से निष्कासन के बाद सिंह ने कहा कि राज्य विधानसभा के चुनाव में वह उरीपोक सीट से जनता दल (यू) के उम्मीदवार केएच सुरेश का समर्थन करेंगे, क्योंकि वह खुद उस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें उस सीट से पार्टी का उम्मीदवार इसलिए नहीं बनाया क्योंकि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं.

उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा था, ‘मुझे पार्टी का टिकट देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलता हूं. मुझे कारण बताओ नोटिस जारी किये बिना निष्कासित कर दिया गया है. मेरा निष्कासन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के निहित स्वार्थों के कारण हुआ है. मैं उरीपोक सीट से जनता दल (यू) के उम्मीदवार को समर्थन दूंगा.’

भाजपा ने इस सीट से सेवानिवृत्त नौकरशाह एल. रघुमणि को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सिंह को पार्टी नियमों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है.

अरुणाचल प्रदेशः हिजाब विवाद के बीच राज्य के स्कूलों में पारंपरिक पोशाक पहनने को मंजूरी

कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर यूनिफॉर्म संबंधी नियमों को लेकर उठे विवाद के बीच अरुणाचल प्रदेश के निजी स्कूलों ने छात्रों को पारंपरिक पोशाक पहनने देने की अनुमति देने का फैसला किया है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-2023 शैक्षणिक सत्र में विभिन्न जनजातियों और समुदायों के छात्र अब हर सोमवार को अपने पारंपरिक पोशाक पहनकर शैक्षणिक संस्थान जा सकेंगे.

यह फैसला अरुणाचल प्रदेश के निजी स्कूलों और बाल कल्याण संघों ने एक बैठक में लिया, जहां 180 से अधिक स्कूलों के प्रतिनिधि मौजूद थे.

संघ के उपाध्यक्ष तार झोनी ने शुक्रवार को बताया, ‘अरुणाचल में 100 से अधिक जनजाति और उपजनजाति हैं. हमने फैसला किया है कि गैर आदिवासियों सहित छात्र हर सोमवार को अपने पारंपरिक पोशाक में स्कूल जा सकेंगे. यह सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगा.’

झोनी ने कहा, ‘छात्रों को उनके समुदायों से इतर उनकी पारंपरिक पोशाक पहनने की स्वतंत्रता होगी. अगर कोई न्यीशी है तो वह न्यीशी पोशाक पहनेगा. गालोस अपनी पारंपरिक पोशाक पहनेंगे. ठीक इसी तरह गैर आदिवासियों को भी उनकी पारंपरिक पोशाक पहनने की स्वतंत्रता होगी.’

उन्होंने कहा कि न्यीशी छात्रसंघ ने राज्य सरकार के समक्ष पहले भी इस मामले को उठाया था और कई माता-पिता भी इसे लागू करवाना चाहते थे.

मेघालयः सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हुए कांग्रेस विधायकों के सामने निलंबन का संकट

मेघालय में भाजपा समर्थित सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हुए कांग्रेस के पांच विधायकों के निलंबन और कारण बताओ नोटिस का सामना करने की संभावना है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

इस बीच, प्रदेश भाजपा प्रभारी चुबा एओ ने कहा कि पार्टी का कांग्रेस मुक्त अभियान राज्य के लिए वैध है और इसलिए मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से स्पष्टीकरण मांगेगी.

बता दें कि कांग्रेस के पांच विधायक पिछले हफ्ते मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) में शामिल हो गये थे.

प्रदेश कांग्रेस प्रमुख विंसेट एच. पाला ने कहा, मैं आपसे कह सकता हूं कि पार्टी आलाकमान विधायकों के एमडीए में शामिल होने के पक्ष में नहीं है. इस विषय पर चर्चा की जा रही है. मुझे लगता है कि उन्हें निलंबित किया जाएगा. स्पष्टीकरण भी मांगा जाएगा कि उन्हें उनके इस कृत्य के लिए क्यों नहीं निष्कासित किया जाए.

पाला ने कहा कि दिन में यहां पार्टी की कार्यकारिणी की एक तत्काल बैठक बुलाई गई. उन्होंने कहा, ‘हम कांग्रेस पार्टी के नियमों एवं संविधान का सख्ती से पालन करेंगे.’

वहीं, दिन में भाजपा कार्यकारिणी की एक बैठक में मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला लिया गया.

प्रदेश भाजपा प्रमुख अर्नेस्ट मावरी ने कहा, ‘एमडीए का घटक दल होने के बावजूद हमें इस घटनाक्रम (कांग्रेस विधायकों के शामिल होने) के बारे में सूचना नहीं दी गई. हमने फैसला किया है कि हम मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एमडीए सरकार में कांग्रेस विधायकों के शामिल होने पर स्पष्टीकरण मांगेंगे.’

एमडीए सरकार में कांग्रेस के शामिल होने से कोई दिक्कत नहींः मेघालय भाजपा

वहीं, इस परिवर्तन के बाद मेघालय भाजपा का कहना है कि एमडीए में कांग्रेस के शामिल होने से उन्हें कोई समस्या नहीं है. मेघालय देश का पहला और एकमात्र राज्य है, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों एमडीए सरकार में भागीदार हैं.

बता दें कि आठ फरवरी को मेघालय कांग्रेस के पांच विधायक राज्य में एनपीपी के नेतृत्व वाली एमडीए सरकार में शामिल हो गए थे.

नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुबा एओ ने कहा कि मेघालय वास्तव में कांग्रेस मुक्त का रास्ता दिखा रहा है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार में कांगेस के आने से भाजपा इससे अलग नहीं होगी. उन्होंने कहा, ‘मेघालय में अब कांग्रेस नहीं है. कांग्रेस मुक्त मेघालय प्रक्रिया में है.’

हालांकि, एओ ने राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर भाजपा को सूचित नहीं करने के लिए मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉनराड संगमा की आलोचना की.

असम: मिजोरम सीमा पर हिरासत में मौत को लेकर तनाव बढ़ा

मिजोरम की आइजॉल सेंट्रल जेल में नौ फरवरी को हत्या के आरोपी की हिरासत में मौत को लेकर सीमावर्ती आइजॉल, सिल्चर राजमार्ग पर तनाव बढ़ गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के कछार के धोलाई इलाके में बवाल हुआ. उपद्रवियों ने 10 फरवरी को मेघालय में आपूर्ति करने वाले ट्रकों पर पथराव और तोड़फोड़ की.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कछार जिले के धोलाई के मेतेई समुदाय ने सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया लेकिन इलाके में तनाव जारी है.

उन्होंने कहा, ‘हमने तेल टैकंरों को असम की ओर नहीं जाने की सलाह दी है क्योंकि स्थिति अस्थिर है.’

बता दें कि पेशे से तेल टैंकर का चालक कछार जिले के धोलाई रामप्रसादपुर का रहने वाला के रॉबिन सिंह (48) पिछले महीने पुलिस अधिकारियों को मिजोरम के लेंगपुई गांव के पास खून से लथपथ मिला था.

पुलिस को  फोन कर इसकी सूचना दी गई थी. इसके बाद उसे आइजॉल सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कछार के धोलाई के रहने वाले नृपेन सिंह (50) और मृतक के हेल्पर को गिरफ्तार किया. यह संदिग्ध लगभग 12 घंटे से फरार थे.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी से सेरंग पुलिस ने पूछताछ की, जिसके दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने बाइचुलीपुल पर वाहन में ही छुरे से रॉबिन सिंह पर हमला किया था क्योंकि उसने नशे की हालत में उसकी बेइज्जती की थी और खाने के लिए पैसे देने से भी इनकार कर दिया था.

आरोपी को आइजॉल की न्यायिक अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, उसका बयान दर्ज किया गया उसे एक फरवरी को आइजॉल के पास तनरिल की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, नृपेन ने जेल के भीतर फांसी से लटककर आत्महत्या कर ली. नौ फरवरी को जेल के वॉर्डन को वह मृत अवस्था में मिला.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एक फरवरी को जेल आने पर उसे पहले 7 वॉर्ड डी में रखा गया था लेकिन बाद में उसे पनिशमेंट सेल-बी में ट्रांसफर किया गया क्योंकि दो फरवरी की रात को उसकी सेल में मौजूद दो साथी कैदियों ने उस पर ईंट से हमला किया था.’

आइजॉल के सिविल अस्पताल में उसकी ऑटोप्सी की गई, जिसके बाद शव को परिवार को सौंप दिया गया लेकिन नृपेन के परिवार ने शुरुआत में यह कहकर शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि हिरासत में उसकी मौत हुई है.

हालांकि, बाद में शुक्रवार दोपहर को उसका अंतिम संस्कार किया गया. असम पेट्रोलियम मजदूर संघ का आरोप है कि नृपेन पर हमले के बाद पुलिस हिरासत में उसकी मौत हुई है.

त्रिपुराः भाजपा के दो विधायक कांग्रेस में शामिल

भाजपा से इस्तीफा दे चुके त्रिपुरा के दो वरिष्ठ नेता सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा आठ फरवरी को कांग्रेस में शामिल हो गए.

इन दो विधायकों ने सात फरवरी को त्रिपुरा विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. दोनों विधायकों ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था.

त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती ने भाजपा के इन दो बागी विधायकों सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है.

भाजपा पूर्वोत्तर राज्य में सत्तारूढ़ है और यहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

चक्रवर्ती ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, विधायक सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा के इस्तीफे पत्र सभी कानूनी विकल्पों की जांच करने के बाद स्वीकार कर लिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि वे सात फरवरी की दोपहर से पूर्व विधायक माने जाएंगे. बर्मन और साहा अगरतला तथा बोर्डोवोली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इंडिजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) नेता बृशकेतू देबबर्मा को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 14 फरवरी को विधानसभा प्राधिकारियों के समक्ष पेश होने को कहा गया है.

देबबर्मा ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

चक्रवर्ती ने कहा, ‘बृशकेतू देबबर्मा के इस्तीफे में खामी है, क्योंकि उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र मुझे डाक से भेजा है, जो स्वीकार्य नहीं है.’

उन्होंने कहा कि विधानसभा की इन तीन खाली सीटों पर उपचुनाव कराने की मांग करते हुए एक गजट अधिसूचना जारी की जाएगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)