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त्रिपुरा: कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री ने कहा- भाजपा हर चुनाव पैसे से नहीं जीत सकती

भाजपा छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखे त्रिपुरा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बर्मन ने कहा कि भाजपा-आईपीएफटी सरकार 2023 में सत्ता में नहीं लौटेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के तहत कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी दावा किया कि जब से भाजपा सत्ता में आई है, उसके बाद के सभी चुनावों में धांधली की गई है.

सुदीप रॉय बर्मन (फोटो साभार: फेसबुक)

अगरतलाः भाजपा से इस हफ्ते कांग्रेस में शामिल हुए सुदीप रॉय बर्मन का कहना है कि भाजपा में लोकतंत्र नहीं है क्योंकि पार्टी में सब कुछ एक व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है.

वहीं भाजपा का कहना है कि उनकी (सुदीप) मंशा माकपा को सत्ता में वापस लाने में मदद करना है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखे त्रिपुरा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बर्मन ने शनिवार को कहा कि भाजपा-आईपीएफटी सरकार 2023 में सत्ता में नहीं लौटेगी और वह यह सुनिश्चित करेंगे पार्टी को ‘एक भी सीट न मिले’.

पांच बार के विधायक बर्मन और उनके निकट सहयोगी भाजपा विधायक आशीष कुमार साहा इस हफ्ते नई दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

बर्मन ने बिप्लब कुमार देब की कैबिनेट में बिताए 14 महीनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें चार विभाग सौंपे गए थे और उन्होंने लोगों के लिए अच्छा करने की कोशिश की थी.

उन्होंने कहा, ‘मेरा एक सपना था कि मैं हर तरह के इलाज की सुविधा देकर लोगों की मदद करूं. वे मुझसे ईर्ष्या करने लगे और मुझे कैबिनेट से निकाल दिया. उन्होंने बाद में मुझसे कैबिनेट में दोबारा शामिल होने का दो बार आग्रह किया था. मैंने सम्मानपूर्वक इससे इनकार कर दिया, क्योंकि उप-मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों के पास कोई प्रशासनिक शक्ति नहीं थी. कोई अधिकारी उनकी सुनता नहीं है. विधायकों की भी कोई नहीं सुनता.’

उन्होंने परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब का उल्लेख करते हुए कहा, ‘सब कुछ एक ही व्यक्ति और कुछ नौकरशाहों की इच्छा पर निर्भर करता है.’

उन्होंने कहा कि भाजपा शासन के तहत कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है. इसके साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि जब से भाजपा सत्ता में आई है, उसके बाद के सभी चुनावों में धांधली की गई है.

उन्होंने कहा, ‘उनका (भाजपा) लोगों में विश्वास नहीं है. उन्हें लगता है कि वे भारी धनराशि और बाहुबल से सभी चुनाव जीत सकते हैं और इसी तरह वे सत्ता में बना रहेंगे. क्या हम इस परिवर्तन के लिए भाजपा में गए थे.’

कांग्रेस के टिकट पर चार बार चुने गए बर्मन ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया है. वह 2016 में पांच अन्य विधायकों के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे और एक साल बाद भाजपा में शामिल हो गए थे. अब उनका कहना है कि उन्हें अपने इस फैसले पर खेद है.

बर्मन ने भाजपा की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा, ‘हम वोटों के विभाजन को कम करने और (2018 में) वाम मोर्चे को सत्ता में आने से रोककर लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान करना चाहते थे, लेकिन बीते चार सालों में हमने जो देखा है, उसे देखते हुए भाजपा को राजनीति की जानकारी नहीं है.’

उन्होंने संयुक्त भर्ती बोर्ड त्रिपुरा (जेआरबीटी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं और नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया. उन्होंने सरकार को रैंक सूचियां प्रकाशित करने की चुनौती दी.

बर्मन ने कहा, ‘चुने गए 75 फीसदी लोग अन्य राज्यों से हैं. सिर्फ 25 फीसदी ही हमारे राज्य से हैं. सरकार जेआरबीटी के नतीजों का ऐलान करने से हिचकिचा रही है, क्योंकि भर्ती का आश्वासन देकर रिश्वत ली गई. अब उन्हें पैसा लौटाना होगे या उनका उत्पीड़न होगा. मुझे कुछ अधिकारियों से रिपोर्ट मिली है. मैंने कुछ समय ईमानदारी से काम किया. मैं सरकार से मांग करता हूं कि वह भर्ती रैंक सूची प्रकाशित करें.’

बर्मन ने भाजपा सरकार के इस दावे को खारिज किया कि उन्होंने 2018 के चुनावी वादों में से 90 फीसदी को पूरा कर लिया है.

बर्मन ने कहा, ‘हमारा पार्टी में दम घुट रहा था. यह सरकार डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती. मैंने अपना एस्कॉर्ट (सुरक्षा करने वाले) छोड़ दिया था, जिससे बोरो कर्ता (आका) परेशान हो गए. त्रिपुरा में बेरोजगारी दर 71.1 फीसदी है, जो देश में तीसरी सबसे बड़ी दर है.’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद को पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया, क्योंकि भाजपा पिछले साल परिषद चुनाव नहीं जीत सकी थी. उन्होंने कहा, ‘वहां ग्राम समिति के चुनाव कराने की तिथि समाप्त हो गई है. वहां विकास ठप हो गया है.’

बर्मन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर परिषद के लिए प्रत्यक्ष फंडिंग के प्रस्ताव को खारिज करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि शाह ने यह कहते हुए यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था कि इससे ‘ईसाई धर्म का सशक्तीकरण’ होगा.

बर्मन ने सभी गैर-भाजपा दलों से कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की अपील की.

उन्होंने कहा, ‘त्रिपुरा में असहमति की आवाज को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं. मैं सभी दलों से इस बार कायरतापूर्ण तरीके से काम नहीं करने का आग्रह करता हूं.’

उनकी इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने माकपा के साथ अपने करीबी संबंधों को साबित कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘ये सभी प्रयास माकपा को सत्ता में पास लाने के हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. जब से यह सरकार (भाजपा) सत्ता में आई है, कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है.’

बर्मन के साथ ही कांग्रेस में शामिल हुए आशीष कुमार साहा ने कहा कि भाजपा मोटरसाइकिल सवार गुंडों के जरिये लोगों को डराने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने युवाओं से इस तरह के हथकंड़ों का विरोध करने और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के इन हमलों का जवाब देने के लिए इसी तरह की मोटरसाइकिल टीम बनाने का आग्रह किया.