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असम: वन रक्षकों की गोली से ग्रामीण की मौत के बाद विरोध-प्रदर्शन

असम के मोरीगांव ज़िले में वन रक्षकों की गोली से एक ग्रामीण की मौत से गुस्साए स्थानीय लोगों और कई छात्र संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया और गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की. सोनाईकुची रिज़र्व वन में कथित तौर पर पेड़ काटने को लेकर वन रक्षकों ने कार्रवाई की थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मोरीगांव: असम के मोरीगांव जिले में वन रक्षकों की गोली से एक ग्रामीण की मौत से गुस्साए स्थानीय लोगों और कई छात्र संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बुधवार को धरना-प्रदर्शन किया.

जिले के सोनाईकुची रिजर्व वन में कथित तौर पर पेड़ काटने को लेकर वन रक्षकों ने कार्रवाई की थी.

मोरीगांव उपायुक्त अदालत के पास करीब दो घंटे धरना देने के बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को ज्ञापन भेजा, जिसमें गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई. साथ ही इस घटना में कथित भूमिका के लिए जगीरोड और कुठोरी के वन बीट अधिकारियों को गिरफ्तार करने की मांग भी उठाई.

मोरीगांव में जगीरोड के पास मंगलवार (बीते 15 फरवरी को) को वन में कथित तौर पर दो लोगों द्वारा पेड़ काटे जाने पर वन रक्षकों ने गोली चलाई, जिसमें बोरसिंग तिसो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राजीव सिंगनार घायल हो गया.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गोली चलाने की कार्रवाई बिना किसी उकसावे के की गई, इसलिए इसे हत्या माना जाना चाहिए.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दो ग्रामीण मंगलवार को कुल्हाड़ी लेकर जंगल में पेड़ काटने गए थे और इसी दौरान ये घटना हुई.

पुलिस ने कहा कि पेड़ों के गिरने की आवाज सुनकर वन रक्षक मौके पर पहुंचे और कई राउंड गोलियां चलाईं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ऑल तिवा स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएसयू), कार्बी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू), कार्बी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (केएसए), तिवा युवा छात्र परिषद (टीवाईसीपी), ऑल तिवा वीमेंस एसोसिएशन (एटीडब्ल्यूए), मोरीगांव जिला आदिवासी संघ और ऑल असम ट्राइबल यूथ लीग (एएटीयूएल) और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने दो घंटे तक धरना दिया.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी और इसे हत्या माना जाना चाहिए, क्योंकि पीड़ितों को वन अधिकारियों द्वारा सोनाईकुची रिजर्व फॉरेस्ट में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में कुछ अन्य अधिकारियों ने दोनों को गोली मार दी.

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दोनों मंगलवार (बीते 15 फरवरी को) की सुबह वन रक्षकों को रिश्वत देने के बाद जंगल के अंदर गए थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, घटना के समय दोनों ग्रामीण कुठौरी वन शिविर के पास कुल्हाड़ियों से पेड़ काट रहे थे.

पुलिस ने बताया कि पेड़ों की कटाई की आवाज सुनकर वन रक्षक मौके पर पहुंचे और कई राउंड फायरिंग की.

फायरिंग की खबर फैलते ही स्थानीय लोग जमा हो गए और कुठौरी वन बीट कार्यालय में आग लगा दी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आगजनी के बाद सुरक्षा दल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में किया.

इससे पहले मध्य असम के नागांव में बीते 22 जनवरी को पुलिस ने ड्रग विरोधी अभियान के दौरान पूर्व छात्र नेता कीर्ति कमल बोरा को गोली मार दी थी.

पुलिस ने उन पर ड्रग रैकेट में शामिल होने का आरोप लगाया था, लेकिन उनके परिवार और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) की स्थानीय इकाई का कहना था कि बोरा को मामले में फंसाया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)