यूक्रेन: बंकरों में छिपे भारतीय छात्र, कहा- भोजन-पानी सीमित, कभी भी जा सकती है बिजली-नेटवर्क

यूक्रेन में रूस की सीमा से लगते सूमी शहर पर रूसी सैनिकों के कब्ज़े के बाद कम से कम 400 भारतीय छात्रों ने एक तहखाने में शरण ली है. इनमें अधिकतर सूमी स्टेट मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं. उन्होंने कहा कि बाहर गोलियों की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं और वे लंबे समय तक वहां नहीं रह पाएंगे.

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रूसी सेना के आक्रमण की शुरुआत में यूक्रेन के खारकीव में एक बंकर में छिपे भारतीय छात्र-छात्राएं. (फोटो साभार: ट्विटर/@hemantrajora_)

यूक्रेन में रूस की सीमा से लगते सूमी शहर पर रूसी सैनिकों के कब्ज़े के बाद कम से कम 400 भारतीय छात्रों ने एक तहखाने में शरण ली है. इनमें अधिकतर सूमी स्टेट मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं. उन्होंने कहा कि बाहर गोलियों की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं और वे लंबे समय तक वहां नहीं रह पाएंगे.

यूक्रेन के खारकीव में एक बंकर में छिपे भारतीय छात्र-छात्राएं. (फोटो साभार: ट्विटर/@hemantrajora_)

नई दिल्ली/वाशिंगटन/कीव/चेन्नई: यूक्रेन में रूस की सीमा से लगते सूमी शहर पर रूसी सैनिकों के कब्जे के बाद कम से कम 400 भारतीय छात्रों ने एक तहखाने में शरण ली है और भारत सरकार से उन्हें निकालने की अपील की है.

इनमें अधिकतर सूमी स्टेट मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं. उन्होंने कहा कि बाहर गोलियों की आवाजें सुनाई देने के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है.

एक छात्र ललित कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘इस वक्त हम अपने छात्रावास के तहखाने में छिपे हुए हैं और हमें नहीं पता कि यहां हम कब तक सुरक्षित रह पाएंगे. हम भारत सरकार से हमें यूक्रेन के पूर्वी इलाके से सुरक्षित निकालने की अपील करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अपने आप यात्रा करना संभव नहीं है. यहां मार्शल लॉ लागू है, जिसका मतलब है कि कोई बाहर नहीं जा सकता, कार, बस और निजी वाहन नहीं निकल सकते. एटीएम और सुपर मार्केट भी बंद हैं.’

छात्रों ने उस तहखाने का वीडियो भी साझा किया जहां वे छिपे हुए हैं. कुमार ने कहा, ‘हमारे पास यहां ज्यादा सामान नहीं है कि हम लंबे समय तक यहां नहीं टिक पाएंगे. भारत सरकार हमारी आखिरी उम्मीद है….हम अपने देश वापस जाना चाहते हैं और अपने लोगों से मिलना चाहते हैं. हमारी मदद कीजिए.’

पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले के रायदिघी के अर्कोप्रोभो वैद्य एवं नॉर्थ 24 परगना जिले के बारासात के बृजेश घोष ने कीव मेडिकल कॉलेज के भूतल में शरण ले रखी है. दोनों ही वहां प्रथम वर्ष के विद्यार्थी हैं.

पश्चिम बंगाल एवं भारत के अन्य भागों के विद्यार्थियों के साथ ही इन दोनों ने बताया कि बृहस्पतिवार को जब आसपास के क्षेत्रों में रूक-रूककर बमबारी की आवाज आने लगी तब उन लोगों से भूतल में चले जाने को कहा गया.

उन्होंने कहा, ‘हम बहुत चिंतिंत हैं. हमें यहां रूकने को कहा गया है. हमसे भारतीय दूतावास ने कहा कि वे हमें सुरक्षित तरीके से यहां से निकालने की कोशिश कर रहे हैं. जब थोड़ी शांति होती है तो हम जरूरी चीजें खरीदने बाहर जाते हैं और हमें उनके लिए बहुत ऊंची कीमत देनी पड़ती है.’

ये दोनों ही अपने परिवारों के संपर्क में हैं क्योंकि उनके स्थान पर इंटरनेट कनेक्शन काम कर रहा है.

उत्तरपूर्व यूक्रेन के खारकीव में एक अभियांत्रिकी संस्थान से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे बंगाल के ही दीपक सरकार और विभास हलदर ने कहा कि गोलाबारी बढ़ जाने पर उन्हें 100 अन्य भारतीय विद्यार्थियों के साथ भारतीय दूतावास ले जाया गया और एक भूमिगत बंकर में ठहराया गया.

पूर्बा बर्धमान जिले के कालना के इन दोनों छात्रों ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मेरा अनुरोध है कि कृपया वहां से शीघ्र निकालने एवं स्वदेश वापसी में सहयोग करें.’

उन दोनों ने कहा कि दूतावास ने उन्हें सुरक्षित निकालने की संभावित तारीख के बारे में अभी कुछ नहीं बताया है.

एक मेडिकल कॉलेज की छात्राएं जुड़वां बहनें रूमकी और झुमकी बंदोपाध्याय पिछले दो दिनों से खारकीव में फंसी हैं. दुर्गापुर की रहने वाली इन दोनों बहनों के द्वारा भेजी गई तस्वीरों ने उनके परिवार को परेशान कर दिया है.

रूंधे गले से उनकी मां ने कहा, ‘हम बस इतना चाहते हैं कि हमारी बेटियां लौट आएं. वे दिसंबर में ही गई थीं और वे ठहरने के इंतजाम में जुटी थीं. लेकिन बृहस्पतिवार से चीजें बिगड़ गई हैं.’

यूक्रेन में फंसे अपने बच्चों की तस्वीरें दिखाती अमृतसर की महिलाएं. (फोटो: पीटीआई)

अर्कोप्रोभो के पिता पलाश वैद्य ने कहा कि वह और उनकी पत्नी चिंता के कारण सो भी नहीं पाते हैं. उन्होंने अपने एकमात्र पुत्र की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों से वित्तीय मदद मांगी है और वापसी के लिए सभी पहल करने का अनुरोध किया है.

यू्क्रेन में टर्नोपोली स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में पांचवें वर्ष के छात्र पुष्पक सरनकार ने कहा कि उन्होंने 26 फरवरी के लिए विमान का टिकट बुक कराया था लेकिन अब पूरी संभावना है कि उड़ान रद्द हो जाएगी. पुष्पक सोनारपुर के रहने वाले हैं.

संकटग्रस्त यूक्रेन में फंसे हुए केरल के छात्रों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और वे अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित एवं घबराए हुए हैं.

कीव में फंसी हुई अरुंधति नामक केरल की छात्रा ने एक स्थानीय टेलीविजन चैनल से कहा, ‘अधिकारियों ने हमें जल्द से जल्द आवश्यक सामान लेकर विश्वविद्यालय के छात्रावास के बंकरों में जाने के लिए कहा था. हमारे पास केवल भोजन और पानी का सीमित भंडार है. नेटवर्क कवरेज कभी भी जा सकता है.’

इस बातचीत में अरुंधति बेहद चिंतित और घबराई हुईं नजर आ रही थीं. अरुंधति के वीडियो कॉल से साफ समझ में आ रहा था कि वहां मौजूद छात्र किस प्रकार की कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहे हैं क्योंकि 60 से अधिक छात्रों को खचाखच भरे एक बंकर में अपने बैकपैक और आवश्यक वस्तुओं के साथ फर्श पर बैठे देखा जा सकता था, जहां बेहद कम रोशनी थी.

केरल की रहने वाली अरुंधति यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं. अरुंधति ने कहा कि सुबह से रह-रहकर विस्फोट की आवाजें सुनाई दे रही हैं और वे सभी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

मध्य यूक्रेन में स्थित एक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली अशरा नामक एक अन्य छात्रा ने कहा कि वह और अन्य भारतीय छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं, क्योंकि उनके पास इस बारे में कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं है कि उन्हें क्या करना चाहिए और कहां रहना चाहिए.

अशरा ने कहा, ‘हमारे परिसर में अकेले केरल से ही 200 से लेकर करीब 300 छात्र हैं. हमें क्या करना है, इसको लेकर हमें कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है.’

अशरा का कहना है कि शुरू में उन्हें बंकर में जाने के लिए कहा गया था लेकिन जब वे अपना बैग पैक कर वहां पहुंचे, तो विश्वविद्यालय के प्रमुख ने उन्हें छात्रावास के कमरों में वापस जाने के लिए कहा.

अशरा ने कहा, ‘विश्वविद्यालय के प्रमुख के कहने पर हम वापस छात्रावास में आ गए. इस समय कहीं भी बाहर निकलना बहुत जोखिम भरा है.’

यूक्रेन में फंसे हुए अन्य भारतीय छात्रों का कहना है कि उनके पास भोजन और पीने के पानी का सीमित मात्रा में है. छात्रों का कहना है कि बिजली की आपूर्ति कभी भी बाधित हो सकती है और नेटवर्क कभी भी जा सकता है.

रूस के राजनयिक सूत्रों ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों को शांत रहने व यथास्थान रहने की सलाह दी

इस बीच यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत के कूटनीतिक प्रयासों के बीच रूस के राजनयिक सूत्रों ने शुक्रवार को पूर्वी यूरोपीय देश में फंसे भारतीयों को शांत रहने और यथास्थान रहने की सलाह दी.

सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि यूक्रेन में की जा रही सैन्य कार्रवाई से आम नागरिकों को कोई खतरा नहीं है.

एक रूसी राजनयिक सूत्र ने कहा, ‘भारतीय नागरिकों को शांत रहना चाहिए और परेशान नहीं होना चाहिए. उन्हें वहीं रहना चाहिए जहां वे हैं.’

एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया था कि पुतिन के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री ने उन्हें यूक्रेन में रह रहे भारतीय लोगों की सुरक्षा के प्रति चिंता से अवगत कराया और कहा कि उनकी सुरक्षित घर वापसी भारत की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है.

रूस की ओर से जारी बयान के अनुसार पुतिन ने कहा कि इसके लिए ‘आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे.’

सूत्रों ने कहा कि विशेष अनुरोध प्राप्त होने पर, रूस निश्चित तौर पर भारत के नागरिकों को निकालने के लिए सहायता प्रदान करेगा.

रूसी हमले के बाद यूक्रेन की सरकार ने देश की वायुसीमा बंद कर दी है इसलिए भारत अपने नागरिकों को जमीन के रास्ते निकालने के लिए हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और रोमानिया से लगती यूक्रेन की सीमाओं के जरिये प्रयास कर रहा है.

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यूक्रेन में लगभग 20 हजार भारतीय हैं और उनमें से लगभग चार हजार लोग बीते कुछ दिनों में भारत लौट चुके हैं.

भारतीयों के लिए निकासी उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है: सूत्र

भारत सरकार भारतीय नागरिकों को यूक्रेन की उसके पड़ोसी देशों के साथ लगती सीमाओं के रास्ते से सड़क मार्ग से निकालने का प्रयास कर रही है और फिर उन्हें वतन लाया जाएगा. आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि भारतीयों के लिए निकासी उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है.

भारत हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और रोमानिया के साथ यूक्रेन की सीमाओं के जरिये भारतीयों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है क्योंकि यूक्रेन की सरकार ने रूसी सैन्य हमले के बाद देश के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है.

संबंधित घटनाक्रम में, यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने कहा कि रोमानिया और हंगरी सीमा से भारतीयों को निकालने के प्रयास जारी हैं.

दूतावास ने एक परामर्श में कहा कि भारतीय टीम को हंगरी सीमा पर चोप-जाहोनी चेक पोस्ट के साथ-साथ रोमानिया सीमा के पास पोरबने-स्ट्रीट पर, उजहोरोड में चेर्नित्सी के आसपास तैनात किया जा रहा है.

परामर्श में कहा गया, ‘इस कठिन परिस्थिति में, भारत का दूतावास भारतीयों से मजबूत, सुरक्षित और सतर्क रहने का अनुरोध करता है. दूतावास भी यूक्रेन में भारतीय समुदाय की मदद करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा है.’

परामर्श में कहा गया कि भारत सरकार और दूतावास रोमानिया और हंगरी से निकासी मार्ग स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं.

श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीयों की निकासी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है और भारतीय अधिकारियों की टीम हंगरी में जाहोनी सीमा चौकी, पोलैंड में क्राकोविएक सीमा, स्लोवाकिया में वेस्ने नेमेके, रोमानिया में सुसेवा सीमा पर तैनाती के लिए रास्ते में है.

उन्होंने कहा, ‘हमने अपने कुछ अधिकारियों को यूक्रेन में सीमा के करीबी स्थानों पर शिविर कार्यालय स्थापित करने के लिए भी कहा है. इनमें पोलैंड के करीब ल्वीव और रोमानिया के करीब चेर्नित्सी चिह्नित किए गए हैं.’

विदेश मंत्री एस. जयशंकर. (फोटो: ट्विटर/@DrSJaishankar)

भारतीयों की निकासी के लिए लीव, चेर्निवित्सी में कैंप कार्यालय स्थापित किया गया

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को पश्चिमी यूक्रेन के लीव एवं चेर्निवित्सी शहरों में कैंप कार्यालय स्थापित किया ताकि वहां से भारतीयों को हंगरी, रोमानिया और पोलैंड के लिए पारगमन सुविधा प्रदान की जा सके. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

समझा जाता है कि लीव का कैंप कार्यालय भारतीयों को निकालकर पोलैंड और हंगरी ले जाने में समन्वय करेगा जबकि चेर्निवित्सी से रोमानिया ले जाने के लिए सुविधा प्रदान की जायेगी.

सूत्रों ने बताया कि रूसी भाषा बोलने वाले अतिरिक्त अधिकारियों को इन कैंप कार्यालयों में भेजा जा रहा है ताकि यूक्रेन से भारतीयों के पारगमन का लेकर समन्वय स्थापित किया जा सके.

एक सूत्र ने बताया, ‘अधिकारी इन शहरों तक पहुंचने वाले भारतीय नागरिकों की मदद कर रहे हैं. वे इनसे लगी सीमा चौकियों के जरिये यूक्रेन से निकलने में सहायता करेंगे.’

सूत्रों ने बताया कि भारतीय छात्रों का पहला जत्था चेर्निवित्सी से यूक्रेन-रोमानिया सीमा के लिए रवाना हो गया है.

अधिकारियों ने बताया कि कुछ भारतीयों को निकालने के लिए एयर इंडिया द्वारा रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट की खातिर दो उड़ानें संचालित करने की योजना है.

यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने फंसे हुए भारतीयों से मजबूत, सुरक्षित और सतर्क रहने की अपील की

यूक्रेन में स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को फंसे हुए भारतीयों से ‘मजबूत, सुरक्षित और सतर्क’ बने रहने की अपील की और कहा कि रोमानिया और हंगरी सीमा के रास्ते उन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं.

दूतावास ने एक परामर्श में कहा कि भारतीय टीमों को हंगरी सीमा पर चोप-जाहोनी सीमा बिंदु और रोमानिया सीमा पर उजहोरोड में चेर्नित्सि के पोरबने-स्ट्रीट के आसपास तैनात किया जा रहा है.

परामर्श में कहा गया है, ‘इस कठिन परिस्थिति में भारतीय दूतावास भारतीयों से मजबूत, सुरक्षित और सतर्क रहने का अनुरोध करता है. दूतावास भी यूक्रेन में भारतीय समुदाय की मदद के लिए चौबीस घंटे काम कर रहा है.’

परामर्श के अनुसार, ‘भारत सरकार और दूतावास रोमानिया व हंगरी के जरिये निकासी मार्ग स्थापित करने पर काम कर रहे हैं.’

दूतावास ने भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से चोप-जहोनी और पोरबने-स्ट्रीट सीमा बिंदुओं के निकट रहने वाले छात्रों को सलाह दी कि वे ‘इस विकल्प को साकार करने’ के लिए विदेश मंत्रालय की टीमों के साथ समन्वय करते हुए ‘संगठित तरीके’ से प्रस्थान करें.

दूतावास ने कहा, ‘उपरोक्त मार्गों के चालू होने के बाद अपनी व्यवस्था से यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को इन सीमाओं पर मौजूद चौकियों की ओर बढ़ने और संबंधित चौकियों पर स्थापित हेल्पलाइन नंबरों के संपर्क में रहने की सलाह दी जाएगी.’

मिशन ने कहा कि नियंत्रण कक्ष स्थापित होने के बाद संपर्क नंबर साझा किए जाएंगे. दूतावास ने व्यवस्थित आवाजाही के लिए छात्रों को छात्र ठेकेदारों के संपर्क में रहने की भी सलाह दी.

दूतावास ने भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट, नकदी, किसी भी आपातकालीन खर्च के लिए अधिमानतः अमेरिकी डॉलर, और कोविड ​​​​-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र जैसे अन्य आवश्यक सामान ले जाने के लिए कहा.

इसके अलावा उन्हें यदि उपलब्ध हो तो ‘भारतीय ध्वज का प्रिंट आउट साथ लेने और यात्रा करते समय वाहनों और बसों पर इन्हें चिपकाने’ की भी सलाह दी.

चेन्नई में विश्व शांति के लिए हुई एक प्राथना में एक छात्र. (फोटो: पीटीआई)

कई मुख्यमंत्री व नेताओं ने सरकार से की उनके राज्य के छात्रों को सुरक्षित वापस लाने की अपील

यूक्रेन में रूस के आक्रमण के बीच कई भारतीय राज्यों के नेताओं और शासन ने केंद्र सरकार से उनके प्रदेश के लोगों, खासकर छात्रों को सुरक्षित वापस लाने की अपील की है.

 महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उदय सामंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे राज्य के करीब 1,200 छात्रों की सुरक्षित वापसी के प्रबंध किए जाएं.

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार के एक अधिकारी ने मदद की गुजारिश करते हुए बताया कि इस पूर्वी यूरोपीय देश में अध्ययनरत राज्य के विद्यार्थियों की कुल संख्या अभी तक ज्ञात नहीं है और उसका आकलन किया जा रहा है.

उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने यूक्रेन में उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों में वहां फंसे राज्य के विद्यार्थियों और अन्य लोगों को सहायता पहुंचाने तथा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास से समन्वय के लिए एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है और एक हेल्पलाइन सेवा शुरू की है.

उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्‍य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यूक्रेन में उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों के लिए वहां फंसे विद्यार्थियों और अन्य व्यक्तियों को सहायता पहुंचाने तथा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास से समन्वय के लिए राहत आयुक्त एवं राजस्‍व विभाग के सचिव रणवीर प्रसाद को नोडल अधिकारी नामित किया गया है.

गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघानी ने शुक्रवार को बताया कि रूस के सैन्य अभियान के बीच गुजरात के करीब 2,500 छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं.

यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते वहां फंसे मध्य प्रदेश के 46 विद्यार्थियों के अभिभावकों ने सहायता के लिए मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर पंजीयन कराया है.

प्रदेश के गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश राजोरा ने बताया कि यूक्रेन में फंसे होने को लेकर प्रदेश में अब तक पंजीकृत किए गए 46 विद्यार्थियों में से भोपाल के नौ, उज्जैन व देवास के चार-चार, इंदौर व रायसेन के तीन-तीन, बड़वानी व सीहोर के दो-दो तथा जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, मुरैना, नर्मदापुरम, डिंडोरी, टीकमगढ़, छतरपुर, खरगोन, झाबुआ, , सागर, बालाघाट, रतलाम और बुरहानपुर का एक-एक छात्र शामिल हैं.

गुरुवार रात करीब 8.30 बजे मिली आखिरी रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी छात्र वहां सुरक्षित थे.

वहीं, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से यूक्रेन में फंसे राज्य के करीब 130 लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया.

कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को बताया कि राज्य के 346 लोग युद्ध प्रभावित यूक्रेन में फंसे हुए हैं और उन्हें वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने युद्धग्रस्त देश में फंसे छात्रों की सुरक्षा और वहां से उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की.

कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के राज्य आपात ऑपरेशन केन्द्र (एसईओसी) को यूक्रेन में फंसे लोगों के संबंध में शुक्रवार अपराह्न तीन बजे तक मिली जिलेवार सूचना के अनुसार राज्य के कुल 346 लोग वहां फंसे हुए हैं.

आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेन में फंसे राज्य के लोगों में से 115 बेंगलुरु से हैं जबकि मैसूरू से 30, विजयपुरा से 24, बगलकोटे से 22, तुमकुरु से 16 लोग और शेष अन्य जिलों से हैं.

तमिलनाडु सरकार यूक्रेन से छात्रों की वापसी का खर्च उठाएगी: मुख्यमंत्री स्टालिन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घोषणा की है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे प्रदेश के विद्यार्थियों को वापस लाने पर आने वाला पूरा यात्रा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पूर्वी यूरोपीय देश यूक्रेन में फंसे नागरिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा नई दिल्ली के अलावा राज्य और जिला स्तर पर नियुक्त अधिकारियों से अब तक 916 विद्यार्थियों और प्रवासी नागरिकों ने संपर्क किया है.

बयान में कहा गया है, ‘इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घोषणा की है कि तमिलनाडु के छात्रों की सुरक्षित स्वदेश वापसी पर आने वाला पूरा यात्रा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.’

बयान में आगे कहा गया है कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए रिहैबिलेशन एंड वेलफेयर ऑफ नन-रेजिडेंट्स तमिल्स के निदेशक जसिंथा लजारस से भी संपर्क किया जा सकता है.

राज्य सरकार ने यह घोषणा स्टालिन के उस आह्वान के एक दिन बाद की है, जिसके तहत उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को तमिलनाडु के विद्यार्थियों और प्रवासियों को यूक्रेन से सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष वंदे भारत मिशन उड़ानें शुरू करने का अनुरोध किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)