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यूपी: चौरी चौरा में एक युवा और उनकी स्पेशल साइकिल बने सपा के ‘स्टार प्रचारक’

नवीं कक्षा में पढ़ने वाले मोहम्मद मेराज अहमद की स्पेशल साइकिल चुनावी मौसम में चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र में एक स्टार प्रचारक का दर्जा पा चुकी है. मेराज अपने गांव और आस-पास के क्षेत्रों में रोज़ इसे लेकर प्रचार को निकलते हैं.

अपनी साइकिल पर मेराज. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

चौरी चौरा: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) का चुनाव चिह्न साइकिल उस समय चर्चा में आ गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई की चुनावी जनसभा में साइकिल को आतंकवादियों से जोड़ दिया. उन्होंने कहा, ‘यहां समाजवादी पार्टी का जो चुनाव सिंबल है, शुरू के जो बम धमाके हुए वो सारे के सारे बम धमाके उन्होंने साइकिल पर रखे हुए थे. मैं हैरान हूं कि साइकिल को उन्होंने क्यों पसंद किया.’

प्रधानमंत्री जब यह बात कह रहे थे, उसके ठीक चार महीने पहले गोरखपुर जिले के चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र के राजधानी गांव का एक किशोर अपनी कबाड़ हो चुकी साइकिल की जगह नई साइकिल की चाहत कर रहा था. उसकी यह मासूम चाहत भी मजदूर पिता पूरी नहीं कर पाए.

किशोर के मन में कुछ और चल रहा था. उसने अपनी कबाड़ साइकिल की मरम्मत कर उसे एक नया रूप दे दिया और फिर साइकिल से सपा के लिए चुनाव प्रचार पर निकल पड़ा.

नवीं कक्षा में पढ़ने वाले मोहम्मद मेराज अहमद की यह स्पेशल साइकिल चुनावी मौसम में चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र में एक स्टार प्रचारक की हैसियत पा चुकी है. मेराज अपने गांव और आस-पास के इलाके में रोज अपनी यह विशेष साइकिल लेकर प्रचार में निकल जाते हैं.

करीब दो साइकिल की ऊंचाई वाली उसकी यह विशेष साइकिल देख लोग उन्हें रोक लेते हैं और उस साइकिल व सपा के प्रचार में बारे में बातचीत करते हैं. बहुत से लोग साइकिल चलाने की कोशिश भी करते हैं.

मेराज और उनकी साइकिल से भेंट 25 फरवरी की दोपहर चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र के रामपुर रकबा (मल्ल की छावनी) गांव में हुई. यहां पर सपा प्रत्याशी कैप्टन बृजेश लाल पासवान के पक्ष में पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के अध्यक्ष डॉ. संजय चौहान और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के उपाध्यक्ष महेंद्र राजभर की सभा थी.

लोग साइकिल, मोटरसाइकिल, टेम्पो से सभा में पहुंच रहे थे तभी मेराज अपनी साइकिल लेकर पहुंचे. कुछ ही देर में मेराज और उनकी साइकिल सबके आकर्षण के केंद्र में आ गई. लोग उनसे बातचीत करने लगे.

सुभासपा का एक कार्यकर्ता ने साइकिल चलाने की इच्छा जाहिर की. बड़ी मुश्किल के बाद ही वह साइकिल पर चढ़ने में कामयाब हो पाए और कुछ दूर तक चला सके. मेराज ने कई बार सभास्थल के चारों तरफ अपनी साइकिल चलाकर शो-सरीखा किया.

मेराज ने गर्व के साथ बताते हैं कि वह शहीद अब्दुल्ला के गांव राजधानी के निवासी हैं और उनका घर शहीद अब्दुल्ला के घर के पास ही है. शहीद अब्दुल्ला चौरी चौरा विद्रोह के नायकों में से एक थे और चौरी चौरा विद्रोह की अगुवाई करने के लिए उन्हें फांसी की सजा हुई थी.

मेराज को चौरी चौरा विद्रोह और शहीद अब्दुल्ला के बारे में थोड़ी जानकारी ही थी लेकिन पिछले वर्ष चौरी चौरा विद्रोह की बरसी पर हुए एक कार्यक्रम में उन्हें विस्तार से इसके बारे में जानकारी मिली. यह आयोजन उनके स्कूल में हुआ था.

मेराज कहते हैं कि चौरी चौरा विद्रोह के बारे में पूरी जानकारी मिलने के बाद उन्हें अपने गांव पर गर्व होता है और वे अपना परिचय शहीद अब्दुल्ला के गांव से देना पसंद करते हैं.

मेराज के पिता शाकिर अली पहले राजधानी गांव में साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे. उनके बड़े भाई महराजगंज जिले के एक मदरसे में पढ़ाया करते थे. कोरोना लाॅकडाउन में भाई की नौकरी छूट गई और अब वह बेरोजगार हैं. घर में बढ़ते आर्थिक संकट के कारण शाकिर अली सात महीने पहले मजदूरी करने सूरत चले गए. वे अब वहां वेल्डिंग का काम करते हैं और कमाई घर पर भेजते हैं जिससे सबका खर्च चलता है.

मेराज ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही साइकिल मरम्मत और वेल्डिंग का काम पिता के साथ सीख लिया. वह घर पर वेल्डिंग का काम करते हैं लेकिन उनकी मां को डर रहता है कि इसकी रोशनी से आंखें खराब हो जाएंगी. जब चार महीने पहले उन्होंने अपनी साइकिल को अलग डिजाइन देने का काम शुरू किया तब भी मां ने रोका था लेकिन बाद में इजाजत दे दी.

मेराज ने चार दिन में वेल्डिंग कर और नए पुर्जे जोड़कर उसे विशेष रूप दे दिया. इस साइकिल को मेराज ने लगभग अपने कद के बराबर ऊंचाई दी है और डबल चेन और पैडल लगाया है.

इस साइकिल को तैयार करने में कुल लागत 700 रुपये आई हैं. काफी ऊंची होने के बाद भी वह बहुत आसानी से साइकिल को पकड़कर चलते हुए चढ़ जाते हैं और उसे सहज ढंग से संतुलन बनाते हुए चलाते हैं. साइकिल के हैंडल में लंबे झंडे लगाने के लिए उन्होंने इसमें एक पाइप भी डाला है. इस साइकिल को चलाने के लिए मेराज को दो दिन अभ्यास करना पड़ा.

यह पूछने पर कि उसके दिमाग में यह साइकिल बनाने का ख्याल कैसे आया तो उनका कहना था, ‘शुरू से ही अखिलेश यादव अच्छे लगते हैं. इसलिए उनका प्रचार करने की सोची. छोटी साइकिल की तरफ लोगों का ध्यान कम जाता इसलिए साइकिल की ऊंचाई लगभग डबल कर दी.’

मेराज ने बताया कि पिछले चार महीने से अक्सर वह अपनी साइकिल लिए निकल पड़ते हैं और लोग उत्सुकतावश रोककर सपा का प्रचार करने के बारे में पूछते हैं.

मेराज को इस चार महीने में तमाम अच्छे अनुभव हुए लेकिन तीन-चार बार ऐसा हुआ जब कुछ लोगों ने उनसे कहा कि वह सपा का प्रचार नहीं करें. इन लोगों ने कहा कि वह भाजपा का झंडा लगा ले और भाजपा का प्रचार करें लेकिन मेराज ने साफ मना कर दिया. मेराज ने यह भी बताया कि अभी तक किसी ने उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं किया.

मेराज की साइकिल चलाते हुए एक सुभासपा कार्यकर्ता.

मेराज अभी वोटर नहीं हैं क्योंकि उनकी आयु अभी 18 वर्ष से कम है. वह कहते हैं कि अगले चुनाव तक वोटर बन जाएंगे. उन्हें विश्वास है कि अखिलेश सरकार बना लेंगे.

वह कहते हैं, ‘सौ परसेंट अखिलेश की सरकार बनेगी. हमारे गांव के अधिकतर लोग उन्हें ही वोट दे रहे हैं. अखिलेश की सरकार बनेगी तो बिजली का बिल माफ होगा और गरीब बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी.’

वह आगे कहते हैं कि चुनाव तक उनकी साइकिल चलती रहेगी. यह पूछने पर कि प्रधानमंत्री का साइकिल पर दिया गया बयान उन्होंने सुना है, तो मेराज का जवाब था कि इसके बारे में नहीं मालूम. उनके पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है इसलिए उन्हें यह खबर नहीं पता.

(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)