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कर्नाटक: हिजाब विवाद के बीच परीक्षा न दे पाने वाली छात्राओं के लिए नहीं होगा दोबारा इम्तिहान

कर्नाटक हाईकोर्ट के मामले पर अंतिम निर्णय के इंतज़ार में कई छात्राओं ने तय किया था कि वे न कक्षाओं में जाएंगी, न ही प्रैक्टिकल परीक्षाएं देंगी. इस पर शिक्षा मंत्री बीसी नागेश का कहना है कि वे अनुपस्थित छात्राओं के लिए फिर से परीक्षा आयोजित नहीं करेंगे, छात्राएं चाहें तो पूरक परीक्षाओं में शामिल हो सकती हैं.

16 फरवरी 2022 को उडुपी के पीयू कॉलेज के छात्राएं. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कर्नाटक में हिजाब विवाद के चलते जिन छात्राओं को हिजाब पहने होने के कारण स्कूल और कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला था और जिसके चलते वे अपनी परीक्षा नहीं दे पाई थीं, ऐसी छात्राओं के लिए दोबारा परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी. ऐसा राज्य सरकार का कहना है.

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट के मामले पर अंतिम फैसले के इंतजार में कई छात्राओं ने तय किया था कि वे कक्षाओं में शामिल नहीं होंगी न ही  अपनी प्रैक्टिकल परीक्षा नहीं देंगी. उन्हें उम्मीद थी कि अदालत उनके पक्ष में फैसला सुनाएगी.

हालांकि, अदालत का अंतिम फैसला उसके अंतरिम फैसले की तरह ही था, जिसमें उसने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखा था.

कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने द हिंदू को बताया कि अनुपस्थित छात्रों के लिए राज्य में कभी भी वापस परीक्षा नहीं कराई गई है, फिर चाहे कोई भी कारण हो, और हम अभी भी इसकी शुरुआत नहीं करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हम अनुपस्थित छात्राओं के लिए फिर से परीक्षा आयोजित करके एक नया उदाहरण पेश नहीं करेंगे. वे बाकी सभी की तरह पूरक परीक्षाओं में शामिल हो सकती हैं. हम कोई अपवाद खड़ा करने नहीं जा रहे हैं.’

गौरतलब है कि हिजाब का विवाद कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में सबसे पहले तब शुरू हुआ था, जब छह लड़कियां पिछले साल दिसंबर में हिजाब पहनकर कक्षा में आईं और उन्हें कॉलेज में प्रवेश से रोक दिया गया.

उनके हिजाब पहनने के जवाब में कॉलेज में हिंदू विद्यार्थी भगवा गमछा पहनकर आने लगे. धीरे-धीरे यह विवाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल गया, जिससे कई स्थानों पर शिक्षण संस्थानों में तनाव का माहौल पैदा हो गया था.

इस विवाद के बीच इन छह में से एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करके कक्षा के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया था.

हाईकोर्ट ने इस संबंध में लगी याचिकाओं को खारिज करते हुए हिजाब पर प्रतिबंध को बरक़रार रखा था. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है.