पुतिन की आक्रामकता से निपटने में भारत का रुख़ असमंजस भरा है: जो बाइडन

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बैठक के दौरान कहा कि रूस के आक्रामक रुख के जवाब में भारत के अलावा क्वाड एकजुट है. भारत की स्थिति पुतिन के आक्रमण से निपटने के लिहाज़ से थोड़ी असमंजस वाली है लेकिन क्वाड देशों का हिस्सा, जापान और ऑस्ट्रेलिया अत्यधिक मजबूत हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन. (फोटो: अमेरिकी विदेश विभाग)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बैठक के दौरान कहा कि रूस के आक्रामक रुख के जवाब में भारत के अलावा क्वाड एकजुट है. भारत की स्थिति पुतिन के आक्रमण से निपटने के लिहाज़ से थोड़ी असमंजस वाली है लेकिन क्वाड देशों का हिस्सा, जापान और ऑस्ट्रेलिया अत्यधिक मजबूत हैं.

एक मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन. (फाइल फोटो: अमेरिकी विदेश विभाग)

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के खिलाफ समर्थन दिखाने में भारत की स्थिति थोड़ी असमंजस वाली है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के ज्यादातर मित्रों और सहयोगियों ने व्लादिमीर पुतिन के आक्रामक रुख से निपटने में एकजुटता दिखाई है.

बता दें कि रूस की सेना ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला कर दिया था, जो अब तक जारी है. हमले से तीन दिन पहले रूस ने यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी.

बाइडन ने सोमवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की एक बैठक में कहा, ‘पुतिन को अच्छी तरह जानने के कारण एक चीज को लेकर मैं आश्वस्त हूं कि वह नाटो को विभाजित करने में सक्षम होने का भरोसा कर रहे थे. उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि नाटो सुलझा हुआ रहेगा, पूरी तरह एकजुट रहेगा. मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि नाटो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कारण आज के मुकाबले पहले कभी इतिहास में इतना मजबूत या अधिक एकजुट नहीं रहा.’

उन्होंने कहा, ‘उनके आक्रामक रुख के जवाब में हमने नाटो और प्रशांत क्षेत्र में एकजुटता दिखाई है. भारत के अलावा क्वाड एकजुट है. भारत की स्थिति पुतिन के आक्रमण से निपटने के लिहाज से थोड़ी असमंजस वाली है लेकिन जापान अत्यधिक मजबूत है और ऑस्ट्रेलिया भी.’

पिछले महीने बाइडन ने कहा था कि भारत और अमेरिका, यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले के मुद्दे पर अपने मतभेदों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बैठक में कहा, ‘हमने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और प्रशांत क्षेत्र में एकजुटता दिखाई और आपने रूसी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और प्रतिबंध लगाने में हमारी मदद के लिए काफी कुछ किया. आपने जो कुछ भी किया, वह वाकई महत्वपूर्ण है. जो भी आप लोगों में से आगे बढ़कर आया, उसने एक बड़ा अंतर पैदा किया.’

नाटो 30 उत्तरी अमेरिकी और यूरोपियन देशों का समूह है. नाटो के मुताबिक, इसका उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य अर्थों में इसके सदस्य देशों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

क्वाड में जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका शामिल हैं. यह एक गठबंधन नहीं है बल्कि साझा हितों और मूल्यों से प्रेरित देशों का एक समूह है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती देने में रुचि रखता है.

बाइडन मुख्य कार्यकारी अधिकारियों  के एक गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए थे. उन्होंने विभिन्न उद्योगों की प्रमुख कंपनियों के 16 सीईओ से बात की और यूक्रेन के खिलाफ पुतिन के बिना उकसावे वाले और अनुचित युद्ध संबंधी हालिया घटनाक्रमों पर एक ब्रीफिंग की.

सम्मेलन में प्रतिभागियों ने पुतिन द्वारा वैश्विक बाजार और आपूर्ति श्रृंखला में खड़े किए गए व्यवधानों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)