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पैंडोरा पेपर्सः ऑफशोर कंपनियों की जांच के लिए आयकर विभाग के तलाशी अभियान शुरू

पैंडोरा पेपर्स नाम के अंतरराष्ट्रीय ख़ुलासे में सामने आया था कि सैकड़ों बड़े भारतीय नाम टैक्स से बचने के लिए संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, कुल संपत्तियों का खुलासा न करने में शामिल हैं. अब आयकर विभाग और इसकी नवगठित विदेशी संपत्ति जांच इकाई ने इसे लेकर कार्रवाई तेज़ कर दी है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: आईसीआईजे)

नई दिल्लीः आयकर विभाग और इसकी नवगठित विदेशी संपत्ति जांच इकाई (एफएआईयू) ने पिछले साल इंडियन एक्सप्रेस द्वारा पैंडोरा पेपर्स नामक ग्लोबल इन्वेस्टिगेशन के तहत सामने आई जानकारी को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है.

आयकर विभाग और एफएआईयू ने इस महीने दो प्रमुख तलाशी अभियान शुरू किए हैं जो इस अंतरराष्ट्रीय मीडिया लीक से जुड़े हुए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पहला तलाशी अभियान कांग्रेस के पूर्व मंत्री दिवंगत सतीश शर्मा के परिवार के सदस्यों पर जबकि दूसरा निर्माण कंपनी हीरानंदानी समूह पर केंद्रित है.

अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही अभियान सफल रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस और इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) की इन्वेस्टिगेशन में सामने आए लगभग सभी भारतीयों को नोटिस भेजे जाने के बाद पैंडोरा पेपर्स जांच खुलासे में सामने आए लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई.

दुनियाभर के 117 देशों के 150 से अधिक मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर इंडियन एक्सप्रेस द्वारा पैंडोरा पेपर्स पर अपनी पहली रिपोर्ट प्रकाशित करने के दिन सरकार ने एमएजी का गठन किया था. पैंडोरा पेपर्स के तहत 1.19 करोड़ से अधिक गोपनीय दस्तावेजों का खुलासा किया गया था.

मालूम हो कि भारतीयों को आयकर रिटर्न के विदेशी संपत्ति (एफए) घोषणा खंड में किसी ऑफशोर ट्रस्ट के साथ किसी तरह के संबंध की घोषणा करना जरूरी है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर 2015 काला धन अधिनियम के तहत जुर्माना और कठोर दंड का प्रावधान है.

जांच अधिकारियों का कहना है कि पैंडोरा पेपर्स में जिन भारतीयों के नामों का खुलासा हुआ है, उन्हें लेकर वे एक खास पैटर्न ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत या तो ऑफशोर ट्रस्ट के साथ ये अपने जुड़ाव का खुलासा नहीं कर रहे या आंशिक रूप से इसका खुलासा कर रहे हैं.

कांग्रेस के पूर्व मंत्री और दिवंगत नेता सतीश शर्मा के परिवार के सदस्यों के मामले में एफएआईयू ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली, मुंबई और गोवा में तलाशी अभियान शुरू किया था.

पैंडोरा पेपर्स में इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल से पता चला कि सतीश सर्मा दो ऑफशोर ट्रस्ट- जैन जेगर्स ट्रस्ट, और जेजेड II ट्रस्ट के संरक्षक थे. केमैन आइलैंड्स पर 1995 में स्थापित जेन जेगर्स ट्रस्ट में सतीश शर्मा के परिवार के 10 सदस्य लाभार्थी हैं जबकि न्यूजीलैंड की जेजेड II ट्रस्ट में उनकी पत्नी स्टेरे शर्मा लाभार्थी के रूप में सूचीबद्ध है.

इन ट्रस्ट के रिकॉर्ड से पता चलता है कि फ्रांस और सिंगापुर में ऐसी कई ऑफशोर कंपनियां और संपत्तियां थीं, जिन पर उनका मालिकाना हक है.

ठीस इसी तरह रिकॉर्ड से पता चलता है कि किस तरह हीरानंदानी के परिवार ने सॉलिटेयर ट्रस्ट के नाम से एक बीवीआई इकाई स्थापित की.

इस ट्रस्ट से 25 ऑफशोर कंपनियां जुड़ी हुई हैं और इन कंपनियों की शेयरहोल्डिंग को इस ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था और 2017 में इसकी कुल संपत्ति छह करोड़ डॉलर थी.

पिछले हफ्ते इस संबंध में आयकर विभाग ने मुंबई, बेंगुलुरू और चेन्नई में तलाशी ली गई और जिसके बाद कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि ट्रस्ट और इसकी संपत्तियां वास्तविक और कानून के अनुरूप हैं.

अधिकारियों का कहना है कि पैंडोरा पेपर्स के तहत लीक हुए भारतीय नामों में से और के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.

बता दें कि पैंडोरा पेपर्स नामक अंतरराष्ट्रीय ख़ुलासे से पता चला कि सैकड़ों बड़े भारतीय नाम टैक्स से बचने के लिए अपनी संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, कुल संपत्तियों का खुलासा न करने में शामिल हैं.