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भारत युद्ध बंदियों सहित 83 लापता सैन्यकर्मियों की पाकिस्तान से रिहाई की मांग कर रहा है: सरकार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि भारत 1965 और 1971 के 62 युद्ध बंदियों सहित 83 लापता सैन्यकर्मियों की राजनयिक एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों के जरिये रिहाई और उन्हें स्वदेश वापस भेजने की पाकिस्तान से मांग कर रहा है. सरकार ने यह जानकारी थल सेना के अधिकारी कैप्टन संजीत भट्टाचार्य की मां द्वारा दायर याचिका पर दी है. उनका बेटा 24 साल से अधिक समय से पाकिस्तान की जेल में क़ैद है.

नई दिल्ली: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि भारत 1965 और 1971 के 62 युद्ध कैदियों सहित 83 लापता सैन्यकर्मियों की राजनयिक एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों के जरिये रिहाई और उन्हें स्वदेश वापस भेजने की पाकिस्तान से मांग कर रहा है.

सरकार ने एक याचिका पर विदेश मंत्रालय के जरिये न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया है. याचिका, थल सेना के अधिकारी कैप्टन संजीत भट्टाचार्य की मां ने दायर की है, जिन्होंने केंद्र को उनके बेटे की स्वदेश वापसी के लिए राजनयिक माध्यमों के जरिये तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

महिला ने याचिका में कहा है कि उनका बेटा 24 साल से अधिक समय से पाकिस्तान की जेल में कैद है.

याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्हें यह सूचना मिली थी कि संजीत, जो अगस्त 1992 में थल सेना के गोरखा राइफल्स रेजिमेंट के अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल हुए थे, वह लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा है कि उनके परिवार को अप्रैल 1997 में सूचना दी गई कि उनका बेटा गुजरात में कच्छ के रण में संयुक्त सीमा पर रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान गश्त पर गया था और उन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों ने 20 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पकड़ लिया.

सरकार ने अपने हलफनामे में आठ मार्च 2021 के राजनयिक पत्र को संलग्न किया है, जिसमें उसने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी कई राजनयिक पत्रों और 83 लापता भारतीय सैन्यकर्मियों का जिक्र किया है. साथ ही, उसमें उनका पता लगाने और लापता भारतीय रक्षाकर्मियों की शीघ्र रिहाई एवं स्वदेश वापस भेजने का अनुरोध किया है.

सूची के मुताबिक, 83 लापता सैन्यकर्मियों में चार 1965 के युद्ध में लापता हुए कैदी हैं और ज्यादातर 1971 के युद्ध में लापता हुए कैदी हैं. वहीं, कुल 21 रक्षाकर्मी 1996 से 2010 तक लापता हुए थे.

केंद्र ने हलफनामे में कहा है, ‘यह जानकारी दी जा रही है कि भारत सरकार कैप्टन संजीत भट्टाचार्य का मामला नियमित रूप से राजनयिक एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों से उठा रही है.’

इसमें कहा गया है, ‘लापता रक्षाकर्मियों की शीघ्र रिहाई एवं स्वदेश वापसी के लिए इस्लामाबाद में स्थित भारतीय उच्चायोग पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के समक्ष नियमित रूप से यह विषय उठाता रहा है.’

विदेश मंत्रालय में अवर सचिव (पाकिस्तान), नेहा सिंह के मार्फत दाखिल हलफनामे में कहा गया है, ‘पाकिस्तान सरकार ने कैप्टन संजीत भट्टाचार्य के अपनी हिरासत में मौजूदगी की बात उल्लेखित तारीख तक स्वीकार नहीं की है.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकार ने कहा कि इस्लामाबाद भारतीय उच्चायोग के माध्यम से याचिकाकर्ता के बेटे कैप्टन संजीत भट्टाचार्य के संबंध में कोई भी जानकारी हासिल करने का हरसंभव प्रयास कर रहा है.

बयान में कहा गया है, ‘भारत सरकार इस मुद्दे को पाकिस्तान सरकार के साथ उठाना जारी रखेगी, जिसमें कैप्टन संजीत भट्टाचार्य की स्थिति पर जवाब देने का अनुरोध किया जाएगा.’

इससे पहले, पीठ ने पिछले साल 5 मार्च को नोटिस जारी किया था और कैप्टन संजीत भट्टाचार्य की मां 81 वर्षीय कमला भट्टाचार्य द्वारा दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें अधिकारियों को हस्तक्षेप करने के निर्देश देने की मांग की गई थी.

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को बाद में 31 मई, 2010 को एक मेजर जनरल का एक पत्र मिला, जो राष्ट्रपति के तत्कालीन सैन्य सचिव थे, जिसमें बताया गया था कि संजीत का नाम युद्ध के मौजूदा लापता कैदियों की सूची में जोड़ा गया है.

याचिका में कहा गया है, ‘याचिकाकर्ता का परिवार आज तक कैप्टन संजीत की वापसी का इंतजार कर रहा है. याचिकाकर्ता के पति का पिछले 23 साल से अपने बेटे का इंतजार करने के बाद 28 नवंबर, 2020 को निधन हो गया. याचिकाकर्ता खुद 81 साल की उम्र में अपने बेटे को एक नजर देखने के लिए तड़प रही है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)