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रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से निलंबित किया गया, वोटिंग में अनुपस्थित रहा भारत

रूसी सैनिकों द्वारा यूक्रेन के बुचा शहर में की गई नागरिकों की हत्याओं की तस्वीरें एवं वीडियो सामने आने के बाद अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने 47 सदस्यीय मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने का अभियान शुरू किया था. रूस के ख़िलाफ़ वोटिंग में मौजूद नहीं रहने पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि यदि भारत ने कोई पक्ष लिया है तो वह है शांति और हिंसा को तत्काल समाप्त करना है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फोटो: रॉयटर्स)

संयुक्त राष्ट्र/ब्रसेल्स/लंदन: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व की शीर्ष मानवाधिकार संस्था से रूस को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से रूस को निलंबित करने के लिए अमेरिका द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव को पारित करने के लिए 193 सदस्यीय महासभा (यूएनजीए) में इसके (प्रस्ताव के) पक्ष में 93 मत पड़े, जबकि भारत सहित 58 देश अनुपस्थित रहे.

‘मानवाधिकार परिषद में रूसी संघ की सदस्यता के निलंबन अधिकार’ शीर्षक वाले प्रस्ताव के खिलाफ 24 मत पड़े. मतदान से अनुपस्थित देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया, इराक, मलेशिया, मालदीव, नेपाल, पकिस्तान, कतर, सउदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद कहा, ‘भारत ने आज (बृहस्पतिवार) महासभा में रूसी महासंघ को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने से संबधित प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया. हमने तर्कसंगत और प्रक्रिया सम्मत कारणों से यह किया.’

उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक भारत शांति, संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है. हमारा मानना है कि खून बहाने और निर्दोष लोगों के प्राण लेने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. यदि भारत ने कोई पक्ष लिया है तो वह है शांति और हिंसा को तत्काल समाप्त करने का.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी से भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महासभा और मानवाधिकार परिषद में प्रक्रियात्मक वोटों और मसौदा प्रस्तावों से परहेज किया है, जिन्होंने यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण को अस्वीकार कर दिया था.

इससे पहले बीते पांच अप्रैल को भारत ने यूक्रेन के बुचा में नागरिकों की हत्याओं की ‘गहरी परेशान करने वाली’ रिपोर्टों की स्पष्ट रूप से निंदा की थी और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन किया था.

यूक्रेन के विदेश मंत्री दमित्रो कुलेबा ने ट्वीट किया कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को अभी-अभी निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि युद्ध अपराधियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में कोई जगह नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘सभी सदस्य देशों का आभारी हूं जिन्होंने संबंधित यूएनजीए प्रस्ताव का समर्थन किया और इतिहास में सही पक्ष के साथ खड़े हुए.’ यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने के आरोपों से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित किया गया.

अमेरिका और यूक्रेन ने रूसी सैनिकों के इस कृत्य को युद्ध अपराध करार दिया है.

उल्लेखनीय है कि रूस दूसरा देश है, जिसकी यूएनएचआरसी सदस्यता छीन ली गई है. महासभा ने 2011 में लीबिया को परिषद से निलंबित कर दिया था.

2011 में लीबिया को महासभा द्वारा निलंबित कर दिया गया था, जब इस उत्तरी अफ्रीकी देश में जारी उथल-पुथल ने लंबे समय तक यहां के नेता रहे मोअम्मर गद्दाफी को सत्ता से मुक्त कर दिया था.

रूसी सैनिकों द्वारा यूक्रेन के बुचा शहर में की गई नागरिकों की हत्याओं की तस्वीरें एवं वीडियो सामने आने के बाद अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने 47 सदस्यीय मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने का अभियान शुरू किया था.

यूरोपीय संघ ने पुतिन की दोनों बेटियों पर लगाए प्रतिबंध

यूक्रेन पर आक्रमण के लिए रूस को लक्षित करने वाले नए प्रतिबंधों के तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो वयस्क बेटियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. यूरोपीय संघ के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

यूरोपीय संघ ने उन लोगों की एक अद्यतन सूची तैयार की है, जिनकी सम्पत्ति जब्त की जाएगी और उन पर यात्रा प्रतिबंध लगाए जाएंगे. इनमें पुतिन की बेटी मारिया वोरोनत्सोवा और कतरीना तिखोनोवा का नाम भी शामिल हैं.

यूरोपीय संघ के दो देशों के अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को यह जानकारी दी है. इन प्रतिबंधों की अभी तक सार्वजनिक रूप से घोषणा नहीं की गई है.

अमेरिका ने भी दो दिन पहले ऐसे ही प्रतिबंध लगाए थे.

ब्रिटेन ने पुतिन की बेटियों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया

ब्रिटेन ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो बेटियों को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है. उसने अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा उठाए गए कदम का अनुकरण करते हुए यह कार्रवाई की.

ब्रिटिश सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने पुतिन की बेटियों- कैटरीना तिखोनोवा और मारिया वोरोंत्सोवा तथा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की बेटी-याकेतरीना विनोकुरोवा की संपत्ति जब्त कर ली है तथा उन पर यात्रा पाबंदियां लगाई हैं.

ब्रिटेन ने कहा है कि यूक्रेन पर 24 फरवरी को रूसी हमला होने के बाद से उसने 1,200 रूसी नागरिकों और कारोबारों पर प्रतिबंध लगाए हैं जिनमें 16 बैंक भी शामिल हैं.

रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे: रिजर्व बैंक

मुंबई: इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भारत-रूस व्यापार के लिए भुगतान निपटान समाधान पर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस तरह का कोई भी समाधान यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद मॉस्को पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के प्रति संवेदनशील होगा.

आरबीआई ने कहा कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जो रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ जाता हो.

रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस मसले से पहले सरकार को निपटना होगा, और जहां तक ​​केंद्रीय बैंक का संबंध है, तो हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जो प्रतिबंधों के खिलाफ हो.

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने कहा कि चूंकि यूक्रेन युद्ध ने व्यापार और भुगतान को बाधित कर दिया है, इसलिए हम सभी हितधारकों के साथ चर्चा कर रहे हैं, और साथ ही, हम आर्थिक प्रतिबंधों के प्रति संवेदनशील हैं.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ भी तय होने पर इसकी घोषणा की जाएगी.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कोई नया भुगतान मंच उपलब्ध नहीं है.

शंकर ने आगे स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को किसी औपचारिक या अनौपचारिक रुपया-रूबल भुगतान तंत्र के बारे में पता नहीं है. उद्योग समूह, बैंक और संबंधित सभी लोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन बदली हुई परिस्थितियों में सर्वोत्तम भुगतान कैसे किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, ‘हम सभी विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं… लेकिन, हमें प्रतिबंधों के प्रति भी संवेदनशील होना होगा. हम इन सभी विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. एक बार कुछ तय हो जाने के बाद आपको इसके बारे में पता चल जाएगा.’

जापान ने आठ रूसी राजनयिकों के निष्कासन की घोषणा की

टोक्यो: जापान सरकार ने कहा है कि वह यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर अपने देश से आठ रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर रही है.

जापानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हिकारिको ओनो ने शुक्रवार को इस फैसले की घोषणा की. उन्होंने कहा कि उप-विदेश मंत्री ताकेओ मोरी ने रूसी राजदूत मिखाइल गालुजिन को इस बारे में सूचित कर दिया है.

यूक्रेन पर रूस के हमले के चलते यूरोपीय देशों ने दर्जनों रूसी राजनयिकों को अपने यहां से निष्कासित कर दिया है.

समूह-7 के देशों के बीच हुए एक समझौते के अनुरूप जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की ओर से रूस के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है. मॉस्को पर टोक्यो पहले भी कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)