कैंपस

जेएनयूः एबीवीपी द्वारा रामनवमी पर कथित तौर पर मांसाहार बनाने से रोकने के बाद हिंसा, केस दर्ज

आरोप है कि विश्वविद्यालय के कावेरी छात्रावास में रविवार को एबीवीपी के सदस्यों ने मेस में मांसाहार बनाने से रोकने के बाद हुई हिंसा में छह छात्र घायल हो गए. एबीवीपी ने दावा किया है कि वामपंथी छात्रों ने उनकी रामनवमी पूजा बाधित की. जेएनयू छात्रसंघ समेत कई छात्र संगठनों की शिकायत पर अज्ञात एबीवीपी सदस्यों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.

रामनवमी पर जेएनयू में छात्र समूहों के बीच झड़प में घायल छात्र. (फोटोः स्पेशल अरेंजमेंट)

नयी दिल्लीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कावेरी छात्रावास में रविवार को मांसाहारी भोजन परोसे जाने पर असहमति के कारण दो समूहों में हुई झड़प में कई छात्र घायल हो गए.

बताया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने रामनवमी पर मांसाहारी भोजन परोसे जाने का विरोध किया था.

पुलिस ने बताया कि इस घटना में छह छात्र घायल हो गए. हालांकि, दोनों गुटों ने दावा किया कि दोनों पक्षों के 60 से अधिक छात्र घायल हुए हैं.

जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) और एबीवीपी के बीच छात्रावास के ‘मेस’ में मांसाहारी भोजन परोसने को लेकर हुई झड़प के मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एबीवीपी के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.

जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के सदस्यों ने छात्रों को छात्रावास में मांसाहारी भोजन खाने से रोका और हिंसा का माहौल बनाया.

वहीं, एबीवीपी ने आरोप से इनकार कर दावा किया कि रामनवमी पर छात्रावास में आयोजित पूजा कार्यक्रम में वामपंथी छात्रों ने बाधा डाली.

दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पथराव करने और अपने-अपने सदस्यों के घायल होने का आरोप लगाया.

इस बीच हिंसा से जुड़े कई कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें अख्तरिस्ता अंसारी नाम के छात्र के सिर से खून बहता दिख रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है.

जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के सदस्यों ने गुंडागर्दी की, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें कोई भी मांसाहारी भोजन तैयार नहीं करने के लिए कहा.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘वे सभी छात्रों के लिए रात के खाने के भोजन (मेन्यू) में बदलाव करने और उसमें से सामान्य मांसाहारी खाने को हटाने के लिए ‘मेस’ समिति को मजबूर कर रहे थे और उन पर हमला भी किया गया.’

जेएनयूएसयू ने कहा कि जेएनयू और उसके छात्रावास किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जेएनयू छात्रसंघ की काउंसिलर अनघा प्रदीप ने कहा, ‘हर रविवार को सभी हॉस्टलों में मांसाहारी और शाकाहारी दोनों तरह का भोजन पकाय जाता है. यह सामान्य प्रक्रिया है. एबीवीपी कावेरी हॉस्टल के पास कुछ कार्यक्रम कर रहे थे और जब वेंडर चिकन डिलीवर करने आया तो उन्होंने उसे रोक लिया. वेंडर और मेस सचिव दोनों को प्रताड़ित कर कहा गया कि हवन किया जा रहा है और मांसाहार नहीं बनाया जा सकता.’

दूसरी ओर, एबीवीपी ने दावा किया कि वामपंथी छात्रों ने कैंपस में रामनवमी की पूजा बाधित की थी.

एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना है, ‘मांसाहारी भोजन कोई मुद्दा नहीं था. जेएनयू के छात्र कावेरी हॉस्टल में रामनवमी का हवन कर रहे थे लेकिन वामपंथी विवाद चाहते थे और इसी मंशा से उन्होंने हवन को रोकने की कोशिश की और लोगों को इसमें शामिल नहीं होने दे रहे थे. यह हवन शाम 3.30 बजे होना था लेकिन हंगामे की वजह से शाम पांच बजे तक भी शुरू नहीं हो पाया. किसी ने मांसाहारी भोजन का विरोध नहीं किया, इस विवाद को एक ढाल की तरह तैयार किया गया. हॉस्टल में बिना किसी विवाद के इफ्तार पार्टी और हवन हो रहे थे.’

उधर, पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पश्चिम) मनोज सी. ने बताया कि कुल छह छात्रों को चोटें आईं हैं, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया.

उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह उन्हें जेएनयूएसयू, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्य छात्रों से एबीवीपी के अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत मिली है.

उन्होंने कहा, ‘हमने शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 509 (महिलाओं की गरिमा भंग करना), 506 (धमकी देना) और 34 (समान मंशा से आपराधिक कृत्य करना) के तहत एक एफआईआर दर्ज की है. साक्ष्य एकत्र करने और दोषियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है.’

पुलिस ने यह भी जोड़ा कि थाने में एबीवीपी के छात्रों द्वारा जवाबी शिकयत दर्ज कराई जाएगी और उसी के अनुसार कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.

बता दें कि जेएनयू में छात्रों के दो समूहों के बीच झड़प के एक दिन बाद सोमवार को शांति बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

पुलिस के मुताबिक, परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अभी परिसर के बाहर ही पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी परिसर के अंदर सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे हैं.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारे कर्मियों को अभी तक जेएनयू परिसर के अंदर तैनात नहीं किया गया है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने अभी तक सुरक्षा के लिए अनुरोध नहीं किया है. हालांकि, हम स्थिति पर नजर बनाए हैं.’

अधिकारी ने कहा, ‘हमने परिसर के बाहर अपने दल तैनात किए हैं. अगर विश्वविद्यालय अनुरोध करेगा, तो यकीनन परिसर के भीतर भी हमारे कर्मी तैनात किए जाएंगे. विश्वविद्यालय के पास अपने सुरक्षा कर्मी हैं, जिन्हें परिसर के भीतर तैनात किया गया है.’

सूत्रों के अनुसार, घटना के वक्त विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित परिसर में नहीं थीं और मामले की सूचना मिलने के बाद तुरंत वह रविवार रात यहां पहुंची.

हिंसा के कई कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें से एक में एक छात्रा अख्तरिस्ता अंसारी के सिर से खून निकलता दिख रहा है. रविवार देर रात ट्विटर पर अंसारी ने बताया कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है और वह बेहतर महसूस कर रही हैं.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मुझे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से छुट्टी मिल गई है और मैं बेहतर महसूस कर रही हूं. संघी गुंडों और फासीवादी ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. इंकलाब जिंदाबाद. संघी गुंडों को गिरफ्तार करें.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)