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अभिनेता सलीम ग़ौस का निधन

सलीम ग़ौस ने अपने अभिनय की शुरुआत 1978 में फिल्म स्वर्ग नरक से की थी, जिसके बाद उन्होंने चक्र, सारांश, मोहन जोशी हाज़िर हो जैसी कई अन्य फिल्मों में अभिनय किया था. उन्होंने श्याम बेनेगल की टीवी सीरीज़ भारत एक खोज में राम, कृष्ण और टीपू सुल्तान की भूमिकाएं निभाई थीं. साथ वह दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक वागले की दुनिया का भी हिस्सा थे.

सलीम ग़ौस. (फोटो साभार: ट्विटर)

मुंबई: फिल्म और टीवी अभिनेता सलीम ग़ौस का बृ​हस्पतिवार को मुंबई को मुंबई में हृदय गति रुकने (कार्डिएक अरेस्ट) से निधन हो गया. वह 70 वर्ष के थे.

सलीम की पत्नी अनीता सलीम ने अपने पति के निधन की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि बुधवार की रात सीने में दर्द का अनुभव करने के बाद गुरुवार की सुबह कार्डिएक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें कल रात कोकिलाबेन अस्पताल ले गए और आज सुबह उनका निधन हो गया. वह शोक से घृणा करते थे और चाहते थे कि जीवन चलता रहे. उन्हें किसी तरह का कष्ट नहीं हुआ, वह किसी पर निर्भर रहना पसंद नहीं करते थे. वह बहुत स्वाभिमानी व्यक्ति थे. वह एक बहुमुखी अभिनेता, एक मार्शल आर्टिस्ट, एक अभिनेता, एक निर्देशक और रसोई घर में एक प्यारे रसोइया थे.’

द फैमिली मैन फेम अभिनेता शारिब हाशमी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘पहली बार सलीम साहब को टीवी सीरियल सुबह में देखा था! और उनका काम बेहद लाजवाब लगा था!! उनकी आवाज़ बहुत कमाल थी.’

सलीम ग़ौस ने अपने अभिनय की शुरुआत 1978 में फिल्म स्वर्ग नरक से की थी, जिसके बाद उन्होंने चक्र (1981), सारांश (1984), मोहन जोशी हाज़िर हो (1984) जैसी कई अन्य फिल्मों में अभिनय किया था.

अन्य फिल्मों जिनमें उन्होंने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं, उनमें मंथन, कलयुग, त्रिकाल, अघाट, द्रोही, सरदारी बेगम, कोयला, सैनिक, अक्स और कई अन्य शामिल हैं.

सलीम को हिंदी के अलावा अन्य भाषा की फिल्मों में उनकी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है. उनकी कुछ लोकप्रिय तमिल फिल्में हैं, जैसे- कमल हासन की ‘वेट्री विझा’, विजय की ‘वेत्तइकरण’, मणिरत्नम निर्देशित ‘थिरुदा थिरुदा’.

टेलीविजन इंडस्ट्री में भी घोष एक जाना-पहचाना चेहरा थे. उन्होंने श्याम बेनेगल की टीवी सीरीज़ भारत एक खोज में राम, कृष्ण और टीपू सुल्तान की भूमिकाएं निभाई थीं. वह दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक वागले की दुनिया (1988) का भी हिस्सा थे.

थियेटर के क्षेत्र में भी वह एक प्रसिद्ध नाम थे. वह एफटीआईआई पुणे से स्नातक थे और मुंबई थियेटर के क्षेत्र भी सक्रिय रूप से शामिल थे. सलीम के पास किम, द परफेक्ट मर्डर, द डिसीवर्स, द महाराजाज़ डॉटर और गेटिंग पर्सनल जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट भी थे.