नॉर्थ ईस्ट डायरी: ‘वायु प्रदूषण के डर से हिंदुओं की चिता जलाने पर भी याचिका पड़ सकती है’

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

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मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय (फोटो: पीटीआई)

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

Tathagata Roy PTI
त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय. (फोटो: पीटीआई)

अगरतला: दिवाली पर होने वाली आतिशबाज़ी पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने बीते 10 अक्टूबर को मोमबत्ती और पुरस्कार वापसी गिरोह पर निशाना साधा और कहा कि वायु प्रदूषण के डर से हिंदुओं के दाह संस्कार पर भी अर्ज़ी आ सकती है.

भाजपा के नेता रह चुके राज्यपाल ने दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी पर रोक पर और दही हांडी के विषय पर हिंदी में ट्वीट किया. दही हांडी का मुद्दा भी अदालत में आया था.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘कभी दही हांडी, आज पटाखा, कल हो सकता है प्रदूषण का हवाला लेकर मोमबत्ती और पुरस्कार वापसी गैंग हिंदुओं की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे.’

शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा था कि दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक होगी.

इससे पहले जन्माष्टमी पर दही हांडी पर बनने वाले पिरामिड की ऊंचाई, उसमें भाग लेने वालों की उम्र का विषय अदालत में चर्चा में रहा.

अरुणाचल प्रदेश: सेना के बेस पर हमले में एनएससीएन का हाथ होने का संदेह

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में नियाउसा स्थित सेना के ठिकाने सीओबी पर संदिग्ध उग्रवादियों ने नौ अक्टूबर की देर रात हमला किया लेकिन इसमें किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि इस हमले में जान-माल के किसी तरह के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि संभवत: इस हमले को एनएससीएन (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड खापलांग) के उग्रवादियों ने अंजाम दिया है.

कोहिमा में रक्षा प्रवक्ता कर्नल चिरणजीत कंवर ने बताया कि लोगों के एक समूह ने देर रात लगभग सवा एक बजे लोंगडिंग ज़िले के नियाउसा में स्थित कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) पर छोटे हथियारों से पांच से 10 राउंड गोलियां चलाई की और एक लाथोड ग्रेनेड दागा. कंवर ने बताया कि संतरियों ने जवाबी कार्रवाई की जिसके बाद हमलावर भाग गए.

रक्षा प्रवक्ता ने बताया, सीओबी में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. इलाके के ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनज़र जवाबी गोलीबारी को नियंत्रित रखा गया. उन्होंने बताया कि हमलावरों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया जा रहा है.

मणिपुर: मुख्यमंत्री में छापेमार समूहों से बातचीत करने को इच्छुक

N Biren Singh PTI
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो: पीटीआई)

इम्फाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह का कहना है कि उनकी सरकार राजनीतिक समाधान खोजने और शांति स्थापित करने के लिए केंद्र की भागीदारी के साथ राज्य में मौजूद विभिन्न छापेमार समूहों से बातचीत करने को तैयार है.

बीते 10 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत में सिंह ने कहा कि राज्य में 30 अलग-अलग सशस्त्र छापेमार समूह मौजूद हैं और वह उन सभी से एक साथ बातचीत करना चाहते हैं. अगर लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान मिलता है तो उनकी पार्टी सत्ता छोड़ने को भी तैयार है.

उन्होंने कहा, हम हथियार उठा चुके लोगों के साथ बातचीत करना चाहते हैं. शांतिपूर्ण समाधान बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, मैं उग्रवादी समूहों से बातचीत पर एक संयुक्त अपील के लिए केंद्र और प्रधानमंत्री की भागीदारी चाहता हूं. राज्य सरकार इसे आगे ले जाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी.

मणिपुर में उग्रवादियों का लंबा इतिहास है और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), पीपुल्स रिवोलुशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपैक (पीआरईपीएके), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और कांगली यावोल कन्ना लूप आदि राज्य में प्रतिबंधित समूह हैं.

अरुणाचल प्रदेश: ‘तिब्बती शरणार्थियों पर नीति स्थानीय लोगों को प्रभावित नहीं करेगी’

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बीते नौ अक्टूबर को कहा कि यहां बसे तिब्बती शरणार्थियों पर कोई भी फैसला स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि सरकार ने इस मामले पर लोगों से सहयोग मांगा है.

यह घोषणा विभिन्न संगठनों द्वारा यहां किए जा रहे प्रदर्शन को देखते हुए की गई. प्रदर्शनकारी संगठनों का दावा है कि केंद्र की 2014 की तिब्बतियों के पुनर्वास की नीति को लागू करना स्थानीय लोगों के हितों के लिए नुकसानदेह होगा.

तिब्बती पुनर्वास नीति में केंद्र ने 2014 में संशोधन किया था ताकि राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार में रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं पर एकसमान दिशा-निर्देश का प्रावधान किया जा सके.

अरुणाचल प्रदेश में तीन तिब्बती बस्ती क्षेत्र हैं.

विज्ञप्ति में बताया गया कि पिछले महीने, केंद्रीय नीति पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई. बैठक में समुदाय आधारित संगठनों और हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद राज्य की देशी आबादी के हितों को ध्यान में रखते हुए संशोधन को आंशिक रूप से लागू करने का फैसला किया गया.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी तवांग में हाल में हुई एक बैठक में कहा था कि ऐसा कोई भी फैसला नहीं किया जाएगा जो राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाए.

असम: भाजपा ने सिंचाई मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोपों को किया ख़ारिज

गुवाहाटी: भाजपा की असम इकाई ने अपने सांसद आरपी शर्मा द्वारा राज्य के सिंचाई मंत्री रंजीत दत्ता के ख़िलाफ़ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए ख़ारिज कर दिया है और सभी सदस्यों को ग़ैरज़िम्मेदाराना टिप्पणी करने से बचने के प्रति आगाह किया है.

मंत्री के ख़िलाफ़ शर्मा के आरोपों को भाजपा की असम इकाई की विशेष बैठक में बीते सात अक्टूबर की रात खारिज कर दिया गया. पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख रंजीत दास ने आठ अक्टूबर को संवाददाताओं से कहा कि पार्टी सदस्यों से संयम बरतने को कहा गया.

एक स्थानीय टेलीविजन चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में सांसद ने राज्य के सिंचाई मंत्री पर विभागीय कार्यों के आवंटन के लिए कमीशन लेने का आरोप लगाया था.

दत्ता ने आरोपों का खंडन किया था और भाजपा के पदाधिकारियों के समक्ष शिकायत दी थी. मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और दास ने शर्मा से अपने आरोपों को सिद्ध करने को कहा था.

दास ने कहा, शर्मा सबूत प्रदान करने में विफल रहे. हम सभी सदस्यों से संयम बरतने और पार्टी के हितों के ख़िलाफ़ टिप्पणियां नहीं करने की अपील करते हैं.

उन्होंने कहा कि सदस्यों को इस तरह का गंभीर आरोप लगाने के दौरान सतर्क रहना चाहिये क्योंकि भाजपा सत्ता में है और इस तरह की ग़ैर ज़िम्मेदाराना टिप्पणियों से उसकी छवि को नुकसान होता है.

बैठक में मुख्यमंत्री और भाजपा के अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया. बैठक की एक रिपोर्ट भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी.

 

असम: छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने को केंद्र का समर्थन

Ramdas Athawale PTI
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बीते आठ अक्टूबर को कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है कि असम में उन छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए जो इसकी मांग कर रहे हैं.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा, असम सरकार ने कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, चुटिया, मोरन, मटक और चाय बागान क्षेत्र के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था और हम इसका समर्थन करते हैं.

अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन ओबीसी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने का आश्वासन दिया है और हम निश्चित तौर पर इसे आगे बढ़ाएंगे और इसे संभव बनाना सुनिश्चित करेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, अगर अनुसूचित जनजाति आयोग विचार करता है और इसकी अनुशंसा करता है तो संसद में विधेयक पेश किया जा सकता है और इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाएगा.

अठावले ने कहा कि इन समुदायों के अलावा सरकार असम में कलिता और ब्राह्मणों जैसी सामान्य जातियों के लोगों को आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण प्रदान करना चाहती है .

उन्होंने कहा, सामान्य जातियों में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और इनको नौकरियों और शिक्षा दोनों में आरक्षण की ज़रूरत है.

मणिपुर: प्रतिबंधित संगठन ने इम्फाल में बम हमले की ज़िम्मेदारी ली

इम्फाल: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी ने यहां स्थानीय मीडिया संस्थाओं को भेजे ईमेल में बीते 13 अक्टूबर की रात एक मेले में हुए शक्तिशाली बम विस्फोट की ज़िम्मेदारी ली है.

पुलिस ने कहा कि अज्ञात बदमाशों ने इम्फाल पश्चिम ज़िले के टेरा लाकराम लेइराक क्षेत्र में हथगोला फेंका जिसमें कम से कम 10 लोग घायल हो गए. घायलों में दो की हालत गंभीर है.

ईमेल में संगठन ने घटना पर संतुष्टि जताई और स्थानीय लोगों को मेलों में शामिल होने को लेकर चेताया.

यहां क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल के एक डाक्टर ने कहा कि विस्फोट में एक महिला और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे आतंकवादी कृत्य बताया. सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, मैं विस्फोट की कड़ी निंदा करता हूं. यह आतंकवादी कृत्य है, और कुछ नहीं. मैं पीड़ित परिवार की भावनाओं को साझा करता हूं.

अरुणाचल प्रदेश: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक नीति की होगी समीक्षा

Pema Khandu PTI
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू. (फोटो: पीटीआई)

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बीते 14 अक्टूबर को कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को निवेशकों के अधिक अनुकूल बनाने और आर्थिक वृद्धि को तेज़ करने के लिए मौजूदा औद्योगिक नीति की समीक्षा करेगी.

मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के विधायक गैब्रिएल देनवांग वांगसु द्वारा विधानसभा में पेश एक निजी प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. उन्होंने कहा, हम राज्य की औद्योगिक नीति की समीक्षा करेंगे और उसके लिए हम हर चयनित प्रतिनिधि को सुझाव देने के लिए आमंत्रित करेंगे, ताकि राज्य को निवेशकों के अधिक अनुकूल बनाया जा सके.

वांगसु ने अपने प्रस्ताव में सरकार से अनुरोध किया था कि राज्य के पर्वतीय इलाकों में उद्योग स्थापित करने के लिए क़दम उठाए जाएं.

खांडू ने कहा कि राज्य के 2017-18 के बजट में पर्वतीय इलाकों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है. यह प्रस्ताव सचिवों की समिति के सामने लंबित है.

उन्होंने कहा कि पर्वतीय इलाकों में औद्योगिक इकाइयां बनाने से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा इससे बेरोज़गारी भी कम होगी.

उन्होंने कहा, यदि एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर संचार नेटवर्क बेहतर करने के साथ काम किया गया तो चीन, भूटान और तिब्बत से सीमा साझा करने वाले अरुणाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव आएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें ख़ुद दिलचस्पी ले रहे हैं.

पूर्वोत्तर के राज्यों में म्यूचुअल फंड संपत्ति 66 प्रतिशत बढ़ी

मुंबई: म्यूचुअल फंड कंपनियों की पूर्वोत्तर क्षेत्र से प्रबंधन अधीन कुल परिसंपत्तियां इस साल अगस्त में सालाना आधार पर 65.76 प्रतिशत बढ़कर 14,454 करोड़ रुपये रहीं.

उद्योग के आक्रामक तरीके से विपणन और जागरूकता अभियान से म्यूचुअल फंड के प्रति लोग आकर्षित हुए हैं.

एसोसिएशन आॅफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने म्यूचुअल फंड को निवेश का लोकप्रिय ज़रिया बनाने के लिए मार्च में नया मीडिया अभियान शुरू किया था.

एएमएफआई के अनुसार पूर्वोत्तर के सात राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम से प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां बढ़कर 14,455 करोड़ रुपये पहुंच गईं.

मेघालय: दुनिया का पहला चेरी ब्लॉसम फेस्ट आ आगाज़ आठ नवंबर से

(फाइल फोटो साभार: फेसबुक/समरसॉल्ट)
(फाइल फोटो साभार: फेसबुक/समरसॉल्ट)

नई दिल्ली: चेरी ब्लॉसम का ज़िक्र आते ही ज़ेहन में जापान और अमेरिका के वे ठंडे इलाके याद आते है जहां चेरी के फूलों से लदे बागान सर्द मौसम का स्वागत करने को बेताब दिखते है.

लेकिन अब चेरी की रंगत का लुत्फ़ उठाने के लिए जापान या अमेरिका जाने की ज़रूरत नहीं होगी. सर्द मौसम की आमद पर भारत ने दुनिया भर के सैलानियों को चेरी ब्लॉसम की खुशनुमा रंगत से लुभाने की तैयारी कर ली है.

भारत में दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय चेरी ब्लॉसम महोत्सव मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में आयोजित किया जा रहा है. अपने तरह के इस अनूठे आयोजन की विस्तृत रूपरेखा का खुलासा मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल एम. संगमा 16 अक्टूबर को करेंगे.

केंद्र सरकार के सहयोग से मेघालय सरकार द्वारा आगामी आठ नवंबर को इस महोत्सव का आगाज़ होगा. केंद्र सरकार के जैव प्रोद्यौगिकी विभाग द्वारा मणिपुर के इम्फाल में संचालित जैव संसाधन एवं सतत विकास संस्थान (आईबीएसडी) और राज्य सरकार चार दिन तक चलने वाले इस महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं.

संस्थान के वैज्ञानिक सचिव अलबर्ट चिआंग ने बताया कि आसमान को अपनी ऊंचाई से नीचे होने का एहसास कराने वाली मेघालय की गगनचुम्बी पहाड़ियों में चेरी की बहार हर साल नवंबर में पूरे उफान पर होती है. कुदरत के इस नायाब तोहफे से दुनिया को रूबरू करने के लिए वैश्विक स्तर के आयोजन की रूपरेखा बनाई गई है.

जापान में सकुरा कही जाने वाली गुलाबी रंग की जिस चेरी के पतझड़ को देखने के लिए सैलानी खिंचे चले जाते हैं, उस चेरी की दोहरी रंगत सैलानियों को शिलॉन्ग और यहां की विश्व प्रसिद्ध झील वार्ड्स लेक का रुख़ करने को मजबूर कर देगी, जहां सड़क के दोनों ओर चेरी से पेड़ चेरी ब्लॉसम का अनूठा अहसास कराएंगे.

चिआंग ने बताया कि जापान में पांचवी सदी में राजकीय तौर पर चेरी ब्लॉसम को पारंपरिक पर्व के रूप में मनाने की पहल दूसरे महायुद्ध के बाद विश्वशांति की पहल में तब्दील हो गई. तब जापान ने चेरी के हज़ारों पौधे मैत्री संदेशवाहक के रूप में अमेरिका को तोहफे में दिए जो आज वाशिंगटन में स्थानीय स्तर पर हर साल होने वाले चेरी ब्लॉसम महोत्सव में दुनिया भर के सैलानियों को लुभाते हैं.

उन्होंने बताया कि संस्थान के निदेशक दीनबंधु साहू ने पर्यटन और अन्य देशों से आपसी रिश्तों को मज़बूत करने में चेरी ब्लॉसम की सामाजिक आर्थिक अहमियत को समझाते हुए साल 2015 में राज्य स्तरीय चेरी ब्लॉसम महोत्सव शुरू करने की पहल की थी. पिछले साल इसे राष्ट्रीय स्तर पर सफलतापूर्वक आयोजित करने के बाद इस साल इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने का फैसला किया गया है.

इस दौरान चेरी के फूलों से ढकी सड़कों पर नाइट वाक के साथ चेरी से बनी वाइन और अन्य पकवानों के जायके का लुत्फ़ स्थानीय पारंपरिक नृत्य और संगीत से सराबोर माहौल में उठाया जा सकेगा.

साथ ही इस आयोजन में रोमांच को चेरी ब्लॉसम की तरह पूरे उफान पर ले जाने के लिए फुटबाल मैच, साइकिल रैली और फोटोग्राफी प्रतियोगिता के बीच चेरी के फूलों से बने परिधानों की प्रतियोगिता के लिए ब्यूटी कांटेस्ट का भी आयोजन किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)